भाजपा को देना पड़ सकता है संघ प्रमुख की बैठक में काम का हिसाब

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भोपाल । राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख सर संघचालक मोहन भागवत द्वारा भोपाल में संघ के अनुषांगिक संगठनों की ली जाने वाली बैठक को लेकर राज्य के भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रमुख नेताओं में हलचल है। वे थोड़ा चिंतित भी हैं क्योंकि उन्हें बीते एक साल का हिसाब देना पड़ सकता है। भोपाल में पांच और छह फरवरी को संघ प्रमुख मोहन भागवत की मौजूदगी में संघ के अनुषांगिक संगठनों की बैठक होने वाली है। इस बैठक को राज्य की सियासत के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ऐसा इसलिए क्योंकि राज्य में भाजपा 15 साल सत्ता में रही और बीते एक साल से भाजपा विपक्ष की भूमिका में है। इस एक साल में भाजपा ने राज्य में क्या किया, इस पर मंथन होगा।

स्ांघ के सूत्रों का कहना है कि संघ प्रमुख पांच और छह फरवरी को भोपाल में अनुषांगिक संगठनों की बैठक लेने वाले हैं। इस बैठक को लेकर भाजपा के नेता खासे गंभीर है क्योंकि उन्हें बीते एक साल की अपनी भूमिका का हिसाब देना पड़ सकता है। बीते साल हुए लोकसभा चुनाव में तो भाजपा का प्रदर्शन बेहतर रहा है मगर एक उपचुनाव झाबुआ की हार का भी हिसाब देना पड़ सकता है। आगामी दिनों में होने वाले दो विधानसभा क्षेत्रों जौरा और आगर मालवा में उप चुनाव की तैयारी को लेकर भी ब्यौरा देना होगा।

भाजपा प्रवक्ता डॉ. दीपक विजयवर्गीय ने कहा, “संघ अपना एजेंडा अपने कार्य के हिसाब से तय करता है। जहां तक अन्य अनुषांगिक संगठनों की बैठक की बात है तो संगठन राष्ट्र के समक्ष चुनौतियों और उनसे निपटने की रणनीति पर विचार व्यक्त करते हैं। वहीं, भाजपा राष्ट्रीय मुद्दों पर राय रखती है। जिस राज्य में बैठक होती है, वहां के विकास और विस्तार के मुद्दों पर चर्चा होती है।”

राजनीतिक विश्लेषक इस बैठक को राज्य की भाजपा इकाई के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण मान रहे हैं, क्योंकि नए प्रदेशाध्यक्ष का चयन होना है। इस चयन से पहले संघ प्रमुख का राज्य में आकर अनुषांगिक संगठनों के साथ बैठक करना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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