राजनीति: छत्तीसगढ़ विधानसभा जनता कांग्रेस के विधायक धर्मजीत सिंह ने एक पारित करते हुए हसदेव अरण्य में आवंटित सभी कोयले की खदानों को रद्द करने की अपील केंद्र सरकार से की है। इस घोषणा के बाद यह अनुमाम लगाया जा रहा है कि छत्तीसगढ़ सरकार अब जल्द ही कोयला खदानों को मिली तमाम स्वीकृतियों को रद्द करने का काम शुरू कर सकती है। क्योंकि इन खदानों को अंतिम स्वीकृति राज्य सरकार द्वारा ही मिलेगी।
अशासकीय संकल्प पारित होने के पश्चात छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने मीडिया कर्मियों से कहा कि हमने जनता की भावनाओं को ध्यान में रखकर केंद्र सरकार से अपील की है कि वह हसदेव में आवंटित कोयला खदानों को रद कर दें। क्योंकि जो भी आवंटन होते हैं वह भारत सरकार द्वारा किये जाते हैं।
उन्होंने आगे कहा पिछली सरकार में 450 वर्ग किलोमीटर का हाथी रिजर्व अनुसूचित नही किया लेकिन जब हमारी सरकार आई तो हमने इसपर त्वरित काम किया। हमने 1900 वर्ग किलोमीटर से अधिक इलाके में लेमरू हाथी रिजर्व अनुसूचित किया।
जानकारी के लिए बता दें जिस आवंटित कोयला खदान को रद्द करने की मांग भूपेश बघेल सरकार ने की है उसको लेकर बीते एक दशक से विरोध चल रहा है। यह कोयला खदान 1 लाख 70 हजार हेक्टेयर में फैली है। सरकार में आदिवासी जैवविविधता, फर्जी ग्राम सभा सम्बंधित कानूनों का हवाला देकर इन खदानों के आवंटन को रद्द करने की मांग उठाई है। इस हसदेव अरण्य कोयला खदान को लेकर बीते साल सुप्रीम कोर्ट ने चेतावनी दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि अगर एक भी कोयले की खदान खुली तो यह गम्भीर संकट को अपने साथ लेकर आएगी।
