कोरोना से स्वास्थ्य सेवाओं को इम्यूनिटी की बूस्टर डोज दे गया साल

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कानपुर, वर्ष 2020 की शुुरुआत नई बीमारी की दस्तक की दहशत के साथ हुई। चीन के वुहान से फैले कोविड-19 यानी कोरोना वायरस के संक्रमण ने कुछ ही दिनों में दुनिया भर के देशों को अपने आगोश में ले लिया। जिले में कोरोना ने 23 मार्च में अमेरिका से आए मरीज के जरिए दस्तक दी तो खलबली मच गई। न सुविधाएं-संसाधन तथा न कोई इलाज, न ही कोई दवाएं थीं।

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स्वास्थ्य को लेकर वर्ष 2020 आजीवन याद रहेगा। शहर में भी कोरोना वायरस ने कहर बरपाया और लोग काल के गाल में समा गए बड़ी संख्या में संक्रमित अस्पताल में भर्ती हुए और स्वस्थ होकर घर भी गए। इन सबके बीच अच्छी बात यह रही कि स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर हुईं।

कोरोना ने साधन संपन्न लोगों से लेकर आमजन को जहां चिकित्सकीय सेवाओं की अहमियत बताई, वहीं, शासन के हुक्मरानों को अर्से से दरकिनार स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में बहुत कुछ करने की जरूरत का अहसास कराया। फिर दम तोड़ रहीं चिकित्सकीय सेवाओं को जरूरत के हिसाब से ऑक्सीजन की डोज देने की कवायद शुरू हो गई। कोरोना काल के नौ माह में स्वास्थ्य सेवाओं को सुविधा-संसाधन एवं शोध-ट्रायल की डोज से मिली इम्यूनिटी के बूते वायरस से जंग लड़ी जा रही है जो वैक्सीन आने तक जारी रहेगी।

चीन से आए परिवार से खलबली

23 जनवरी को चीन से पति, पत्नी और उनका एक बच्चा आर्य नगर में आया था। उनके आने की सूचना से मोहल्ले में खलबली मच गई। जिला प्रशासन, पुलिस और स्वास्थ्य महकमे के अफसरों के फोन घनघनाने लगे। आनन-फानन टीमें वहां पहुंचीं। हालांकि वह सभी जांच प्रक्रिया से गुजरने के बाद शहर पहुंचे थे।

एयरपोर्ट पर लिया गया पहला नमूना

चकेरी एयरपोर्ट पर पहला नमूना चार मार्च को लिया गया। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आइआइटी) में ङ्क्षसगापुर एवं जापान से आए चार विशेषज्ञों का सैंपल कोरोना की जांच के लिए गए। हालांकि उनकी जांच रिपोर्ट निगेटिव आई थी।

कोरोना से निपटने को नहीं थे संसाधन

कोरोना महामारी नई थी। इससे निपटने के लिए उस स्तर के इंतजाम भी नहीं थे। शासन के निर्देश पर जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के संक्रामक रोग अस्पताल (आइडीएच) में सबसे पहले 12 बेड की व्यवस्था की गई। उसके लिए दो पुराने वेंटीलेटर थे, जिसमें से एक खराब पड़ा था। पांडु नगर के कर्मचारी राज्य बीमा के अस्पताल से बात चली रही थी, लेकिन बन नहीं सकी। वहीं, निजी क्षेत्र में कोई सुविधा नहीं थी।

पहले कोरोना केस से सामने आई हकीकत

जिले में 23 मार्च को पहला कोरोना संक्रमित सामने आया। अमेरिका से आए बुजुर्ग में कोरोना के संक्रमण की पुष्टि होने के बाद उन्हें भर्ती कराने के लिए पूरा प्रशासनिक अमला हैलट के आइडीएच पहुंच गया। संक्रमित के स्वजन ने वहां की स्थिति देखकर भर्ती होने से ही इन्कार कर दिया। ऐसे में तात्कालीन जिला महामारी वैज्ञानिक डॉ. देव सिंह उन्हें लेकर उर्सला पहुंचे, जहां उन्हें भर्ती कराया गया। उस समय वहां 10 बेड सुरक्षित किए गए।

 

भयभीत व डरे-सहमे थे डॉक्टर-कर्मचारी

उस समय सुविधाएं और संसाधन नहीं थे। देश-दुनिया में कहर बरपा रहे वायरस के संक्रमण की गंभीरता की खबरों से डॉक्टर एवं कर्मचारी सहमे हुए थे। संक्रमण रोकने के लिए न मास्क, न पर्सनल प्रोटेक्शन इक्यूपमेंट किट और न सैनिटाइजर था। इसलिए संक्रमित या संदिग्ध के पास जाने से सभी डर रहे थे।

कोविड हॉस्पिटल बनाने की कवायद

प्रदेश के कई जिलों में तब्लीगी जमात के सदस्यों के कोरोना संक्रमित होने की सूचना के बाद शासन के स्तर से एल-वन, एल-टू और एल-थ्री कोविड हॉस्पिटल बनाने की कवायद शुरू हुई। हैलट में 100 बेड का कोविड एल-वन, एल-टू एवं एल-थ्री हॉस्पिटल बनाया गया। एडी मंडल डॉ. आरपी यादव एवं जिला महामारी वैज्ञानिक डॉ. देव ङ्क्षसह ने सरसौल के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में 21 बेड का एल-वन कोविड हॉस्पिटल बनवाया। सीएमओ डॉ. अशोक शुक्ला ने निजी क्षेत्र में मंधना के रामा मेडिकल कॉलेज और पनकी के नारायणा मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पिटल को कोविड हॉस्पिटल बनाया।

अप्रैल से बढऩे लगे कोरोना के केस

जिले के कई क्षेत्रों में तब्लीगी जमात के सदस्य आए थे। उनकी जांच 30 मार्च को कराई गई। एक अप्रैल को आई रिपोर्ट में जमात के सदस्य संक्रमित पाए गए। एक-एक कर संक्रमितों की संख्या बढऩे लगी। उसके हिसाब से इलाज के इंतजामात किए जाने लगे। रामादेवी स्थित कांशीराम अस्पताल को एल-वन सेंटर बनाया गया। वहां 96 बेड सुरक्षित किए गए। इसके अलावा जाजमऊ बीमा अस्पताल और किदवई नगर एवं पांडु नगर बीमा अस्पताल को कोविड हॉस्पिटल बनाया गया। किदवई नगर एवं पांडु नगर के बीमा अस्पतालों में संक्रमितों को भर्ती करने का विरोध झेलना पड़ा।

सैंपल बढ़े तो शुरू हुई कोरोना की जांच

अप्रैल के 10 दिनों में कोरोना के संदिग्धों के सैंपल बढ़ गए, जिन्हें जांच के लिए किंग जार्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी भेजा जा रहा था। जांच रिपोर्ट कई-कई दिनों में आ रही थी। इस वजह से इलाज भी प्रभावित हो रहा था। इस समस्या को देखते हुए मंडलायुक्त, जिलाधिकारी, अपर निदेशक चिकित्सा, स्वास्थ्य की पहल पर जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज में कोविड लैब की स्थापना की गई। 100 सैंपल से शुरू हुई कोरोना की जांच आज दो हजार से अधिक सैंपल रोजाना पहुंच गई है।

मौतें बढ़ीं तो सजग हुआ शासन

अप्रैल में चमनगंज में पहली मौत हुई। उसकी वजह सुविधाएं और संसाधन न होना सामने आया। एक-एक कर मौतों का सिलसिला शुरू हो गया। उसके बाद मई, जून और जुलाई में मौतों की संख्या तेजी से बढऩे लगी, जिससे शासन में खलबली मच गई। कोरोना से मौत में पहले नंबर पर लखनऊ और दूसरे नंबर पर कानपुर आ गया। स्वयं मुख्य सचिव को यहां समीक्षा के लिए आना पड़ा। उन्होंने चिकित्सकीय सुविधाएं बढ़ाने के लिए विशेषज्ञों की टीम भी भेजी।

तैयार हुआ 160 बेड का कोविड आइसीयू

शासन की टीम ने आकर सुविधाओं और संसाधन का आकलन किया, उसकी रिपोर्ट तैयार की। उसके आधार पर 160 बेड का कोविड आइसीयू तैयार कराया गया। 160 बेड आइसोलेशन के लिए बनाए गए। वेंटीलेटर, मल्टी पैरा मॉनीटर, हाई फ्लो नेजल कैनुला एवं सक्शन मशीनें मंगाई गईं। बेड का बंदोबस्त भी किया गया। 300 बेड का डेडीकेटेड कोविड हॉस्पिटल निजी क्षेत्र में भी तैयार कराया गया ताकि जरूर पडऩे पर इस्तेमाल किया जा सके।

कोरोना से बदले डीएम-सीएमओ व मंडलायुक्त

कोरोना के तेजी से बढ़ते केस और मौतों की वजह से पहले सीएमओ डॉ. अशोक शुक्ला को बदल दिया गया। उनकी जगह लखनऊ से डॉ. अनिल मिश्रा ने आकर कमान संभाली। उसके बाद जिलाधिकारी डॉ. ब्रह्मदेव राम तिवारी का भी यहां से तबादला कर दिया गया। उनकी जगह आलोक तिवारी ने कमान संभाली। वहीं, मंडलायुक्त सुधीर एम बोबडे का भी तबादला कर दिया गया। उनकी जगह आकर डॉ. राजशेखर ने आकर कमान संभाली। अधिकारियों की नई टीम ने आकर जिले में कोरोना कंट्रोल कर दिया है।

विश्व पटल में पर छाया शहर

प्रदेश में कानपुर को कोरोना वायरस की वैक्सीन के ट्रायल की अहम जिम्मेदारी दी गई, जिससे विश्व के चिकित्सा पटल पर शहर का नाम छाया। स्वदेशी कोवैक्सीन का देशभर के 12 सेंटरों में ट्रायल शुरू हुआ, जिसमें अपना शहर भी शामिल रहा। इसके तीसरे चरण का फेज-वन पूरा हो चुका है। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज को भी रूसी वैक्सीन स्पूतनिक वी के ट्रायल की कमान मिली। इसका दूसरा चरण पूरा हो चुका है।

हैलट में बढ़ीं सुविधाएं

 

  • 320 बेड का कोविड हॉस्पिटल
  • 160 बेड आइसीयू के 110 वेंटीलेटर भेल से आए
  • 35 हाई फ्लो नेजल कैनूला मंगाए गए
  • 160 मल्टी पैरा मॉनीटर
  • 06 अल्ट्रासाउंड मशीनें
  • 05 डायलिसिस मशीनें
  • 02 एनस्थीसिया वर्क स्टेशन
  • 01 मोबाइल सीटी स्कैन मशीन

कांशीराम अस्पताल

  • 120 बेड का कोविड हॉस्पिटल
  • 20 बेड आइसीयू के 10 वेंटीलेटर
  • भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड 15 हाई फ्लो नेजन कैनूला