भारत: भारत मे बेरोजगारी दिन प्रति दिन बढ़ती जा रही है महंगाई से लोग काफी परेशान है। विपक्ष लगातार महंगाई और बेरोजगारी के मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेर रहा है। लेकिन इस राजनीतिक लड़ाई के बीच सबसे ज्यादा विचार करने वाली बात यह है कि आखिर ऐसा क्या है कि भारत के लोगो को रोजगार नही मिल पा रहा है और भारत के लोग बेरोजगारी की मार झेल रहे हैं।
आय दिन रोजगार को लेकर युवा सड़को पर सरकार उतरकर हंगामा करते हैं। सरकार पर आरोप लगाते हैं कि वह युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है। वही जब भी बेरोजगारी का मुद्दा उठाया जाता है तो लोग सबसे पहले अगर बात करते हैं तो वह है CMIE के आकड़ो की। क्योंकि इसे विश्वशनीयता का माध्यम माना जाता है।
CMIE के डेटा के मुताबिक भारत मे बेरोजगारी दर में इजाफा हुआ है। भारत मे इस समय बेरोजगारी दर 7.8% हो गई है। जानकारो का कहना है देश मे बेरोजगारी ग्रामीण इलाकों में बड़ी बेरोजगारी के कारण बढ़ी है। ग्रामीण क्षेत्र में बेरोजगारी एक बड़ी समस्या बन गई है। युवाओं को अच्छी नौकरी तो दूर की बात है नौकरी ही नही मिल पा रही है। जो देश के लिए बड़ी समस्या है।
लेकिन अब सवाल यह भी उठता है कि बेरोजगारी इतनी अधिक क्यों बढ़ रही है और भारत के युवा नौकरी क्यों नही हासिल कर पा रहे हैं। इसका अगर हम सबसे अहम कारण ढूंढे तो वह सबसे पहला भारत की शिक्षा व्यवस्था होगी। आज भारत ने अपनी शिक्षा प्रणाली में काफी परिवर्तन किये हैं लेकिन भारत अभी भी विदेशों के मुकाबले खुद को खड़ा नहीं कर पाया है। अगर भारत के युवा विदेशी कम्पनियों में काम करने के लिये जाते हैं तो वह इंटरव्यू में ही बाहर हो जाते हैं कारण हमारे देश मे बच्चो को उस तरह तैयार ही नही किया जाता है।
हमारे देश मे आज भी बच्चो पर किताबो का बोझ अधिक है। उन्हें प्रयोग से अधिक किताबी कीड़ा बनाया जाता है। उनकी सर्जनात्मकता का उपयोग नही होता है। जिसके कारण वह अपनी क्रिएटिविटी नही दिखा पाते और उन्हें रोजगार नही मिलता।
वही अगर हम दूसरा मूल कारण खोजे तो वह है भाषाई भेदभाव। हमारे देश मे हमारी मूल भाषा, हमारी जननी हिंदी को अंग्रेजी से तौला जाता है। अंग्रेजी के सम्मुख हिंदी को हमेशा नीचा दिखाया जाता है उसे उतना सम्मान नही मिलता जितना वास्तव में मिलना चाहिए। इस भाषाई भेदभाव के कारण ग्रामीण लोग सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं और उन्हें रोजगार नही मिलता।
