Trump Tariff News: अमेरिका के 25 राज्यों ने ट्रंप प्रशासन के नए आयात शुल्क (टैरिफ़) को अदालत में चुनौती दी है। राज्यों का कहना है कि यह फैसला मनमाना और कानून के खिलाफ है। जानिए पूरा मामला।

  • 25 अमेरिकी राज्यों ने ट्रंप प्रशासन के खिलाफ मुकदमा दायर किया।
  • 60 देशों से आने वाले सामान पर 10–12.5% टैरिफ़ को चुनौती।
  • राज्यों ने फैसले को मनमाना और गैर-कानूनी बताया।
  • ट्रंप प्रशासन ने जबरन श्रम रोकने के नाम पर टैरिफ़ लगाए।
  • ब्राज़ील, जापान और चीन ने भी अमेरिकी फैसले का विरोध किया।

अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नए टैरिफ़ (आयात शुल्क) को लेकर बड़ा कानूनी विवाद खड़ा हो गया है। देश के 25 राज्यों ने ट्रंप प्रशासन के फैसले के खिलाफ अदालत में मुकदमा दायर करते हुए इसे मनमाना, तर्कहीन और कानून के खिलाफ बताया है।

यह मामला उन नए टैरिफ़ से जुड़ा है, जिन्हें ट्रंप प्रशासन ने जुलाई में लागू किया था। इनका असर ब्रिटेन, चीन, यूरोपीय संघ सहित करीब 60 व्यापारिक साझेदार देशों से अमेरिका आने वाले सामान पर पड़ता है।

क्या है पूरा मामला?

ट्रंप प्रशासन ने जुलाई में कई देशों से आयात होने वाले उत्पादों पर 10% से 12.5% तक अतिरिक्त टैरिफ़ लगाया था।

अमेरिकी सरकार का तर्क है कि कई देश जबरन श्रम (Forced Labor) से बने उत्पादों के निर्यात को रोकने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठा रहे हैं। ऐसे में अमेरिकी उद्योगों और कंपनियों के हितों की रक्षा के लिए यह कार्रवाई जरूरी है।

राज्यों ने क्यों किया विरोध?

मुकदमा दायर करने वाले 25 राज्यों का कहना है कि यह फैसला कानूनी प्रक्रिया का पालन किए बिना लिया गया है।

राज्यों के अनुसार—

  • यह निर्णय मनमाना है।
  • इसका पर्याप्त कानूनी आधार नहीं है।
  • इससे अमेरिकी उपभोक्ताओं और कारोबार पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा।
  • अंतरराष्ट्रीय व्यापार संबंधों पर भी नकारात्मक असर पड़ सकता है।

व्हाइट हाउस का क्या कहना है?

व्हाइट हाउस के प्रवक्ता कुश देसाई ने ट्रंप प्रशासन के फैसले का बचाव किया है।

उन्होंने कहा कि अमेरिका अपने कानूनी अधिकारों के तहत यह कदम उठा रहा है। उनका कहना है कि जबरन श्रम से बने उत्पादों के आयात पर रोक लगाना जरूरी है, क्योंकि इससे अमेरिकी कंपनियों को नुकसान होता है और निष्पक्ष व्यापार प्रभावित होता है।

किस कानून के तहत लगाए गए टैरिफ़?

ट्रंप प्रशासन ने ये टैरिफ़ 1974 के अमेरिकी ट्रेड एक्ट की धारा 301 (Section 301 of the Trade Act) के तहत लगाए हैं।

यह कानून अमेरिका को उन देशों के खिलाफ व्यापारिक कार्रवाई करने की अनुमति देता है, जहां अनुचित व्यापारिक गतिविधियों या जबरन श्रम जैसी स्थितियों को लेकर गंभीर चिंताएं हों।

किन देशों ने जताई नाराज़गी?

अमेरिकी फैसले पर कई देशों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है।

  • ब्राज़ील ने इसे अनुचित करार दिया।
  • जापान ने भी इस कदम पर आपत्ति जताई।
  • चीन ने इसे राजनीतिक उद्देश्य से उठाया गया कदम बताया।

चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने कहा कि अमेरिका जबरन श्रम का मुद्दा केवल राजनीतिक दबाव बनाने के लिए इस्तेमाल कर रहा है।

आगे क्या होगा?

अब इस मामले में अमेरिकी अदालत को यह तय करना होगा कि ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाए गए टैरिफ़ कानून के अनुरूप हैं या नहीं। यदि अदालत राज्यों की दलीलों से सहमत होती है, तो इन टैरिफ़ पर रोक लग सकती है या प्रशासन को अपने फैसले में बदलाव करना पड़ सकता है।