Ayodhya News: अयोध्या का राम मंदिर सिर्फ एक ईंट-पत्थर का ढांचा नहीं है, बल्कि यह देश के करोड़ों लोगों की गहरी आस्था का प्रतीक है। जब कोई आम आदमी अपनी मेहनत की कमाई में से 10 रुपये या 100 रुपये मंदिर की दान पेटी में डालता है, तो वह यह सोचकर डालता है कि उसका पैसा भगवान के काम आएगा। लेकिन, जब उसी चढ़ावे में हेराफेरी या चोरी की खबर आती है, तो हर रामभक्त का दिल दुखता है।
हाल ही में राम मंदिर के दान में हुई कथित गड़बड़ी का यह मामला अब देश की सबसे बड़ी अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) तक पहुंच गया है। एक तरफ जहां सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में तुरंत सुनवाई करने से फिलहाल मना कर दिया है, वहीं दूसरी तरफ अयोध्या में पुलिस एक्शन मोड में है। रविवार को आरोपियों के ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की गई है। आइए, एक दोस्त की तरह बिल्कुल आसान भाषा में समझते हैं कि सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा है, पुलिस की जांच कहां तक पहुंची है और आज (29 जून) इस मामले में क्या होने वाला है।
सुप्रीम कोर्ट ने जल्द सुनवाई से क्यों किया इनकार?
राम मंदिर में चंदा चोरी के इस गंभीर मामले को लेकर एक याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उनकी मांग थी कि इस मामले की सुनवाई तुरंत (Urgent hearing) की जाए।
लेकिन, सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को तुरंत सुनने से साफ इनकार कर दिया है। कोर्ट ने याचिकाकर्ता से सीधा सवाल पूछा, “आखिर इस मामले में इतनी जल्दबाजी किस बात की है?” कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि अभी अदालत की छुट्टियां चल रही हैं। जब कोर्ट पूरी तरह से खुलेगा, तभी इस मामले को सुना जाएगा। इसका सीधा सा मतलब है कि अब इस मामले की अगली सुनवाई 12 जुलाई के बाद ही हो पाएगी।
याचिकाकर्ता की दलील: ‘सबूत मिटाए जाने का है डर’
सुप्रीम कोर्ट के इनकार के बावजूद याचिकाकर्ता ने अपनी चिंता जाहिर की है। उन्होंने कोर्ट को बताया कि राम जन्मभूमि ट्रस्ट पर लगे ये आरोप बहुत गंभीर हैं।
याचिकाकर्ता का तर्क है कि जिस तरह से प्रशासन ने अब तक काम किया है, उस रवैये पर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं। उनका सबसे बड़ा डर यह है कि अगर इस मामले की सुनवाई में देरी हुई, तो चोरी और गड़बड़ी से जुड़े अहम सबूतों के साथ छेड़छाड़ की जा सकती है या उन्हें मिटाया जा सकता है। इसलिए इस मामले पर तुरंत ध्यान देना जरूरी है।
कौन हैं ये 8 आरोपी और क्या था इनका काम?
अब बात करते हैं पुलिस की कार्रवाई की। अयोध्या पुलिस ने इस मामले में 8 लोगों को गिरफ्तार किया था। ये कोई बाहरी चोर नहीं हैं, बल्कि मंदिर व्यवस्था से जुड़े हुए लोग ही हैं।
इन आरोपियों के नाम हैं: अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लव कुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडे, रामशंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव और रामाशंकर उर्फ टिन्नू यादव।
आप सोच रहे होंगे कि आखिर ये लोग करते क्या थे? दरअसल, इन सभी लोगों की ड्यूटी राम मंदिर के ‘गणना कक्ष’ (Counting Room) में लगी थी। इनका काम था मंदिर की दान पेटियों से निकलने वाली नकदी (Cash) और कीमती जेवर-आभूषणों को गिनना और उनका हिसाब रखना। इसी जिम्मेदारी का फायदा उठाकर इन्होंने कथित तौर पर चढ़ावे में सेंध लगाई।
ताबड़तोड़ छापेमारी: आरोपियों के घरों से क्या-क्या मिला?
पुलिस इस मामले की तह तक जाने में जुटी है। इसी सिलसिले में रविवार (28 जून) को पुलिस टीमों ने सभी 8 आरोपियों के ठिकानों पर एक साथ छापेमारी (Raids) की।
पुलिस ने लव कुश मिश्रा, अविनाश शुक्ला और रामाशंकर यादव समेत सभी के घरों की तलाशी ली। पीटीआई (PTI) की रिपोर्ट के हवाले से खबर है कि इस छापेमारी के दौरान पुलिस ने आरोपी मनीष यादव के घर से कई अहम दस्तावेज बरामद किए हैं। इनमें आधार कार्ड, पैन कार्ड और बैंक खातों से जुड़े पेपर्स शामिल हैं। पुलिस अब इन बैंक खातों की जांच कर रही है ताकि पता चल सके कि क्या हाल के दिनों में इनके खातों में अचानक से कोई बड़ा पैसा तो नहीं आया है।
आज (29 जून) कोर्ट में पेशी, पुलिस मांग सकती है रिमांड
आपको बता दें कि अयोध्या की लोकल कोर्ट ने दो दिन पहले ही इन सभी आठ आरोपियों को 29 जून (आज) तक के लिए न्यायिक हिरासत (Judicial Custody) में जेल भेज दिया था।
आज सोमवार को इन सभी आरोपियों को दोबारा कोर्ट में पेश किया जाएगा। सूत्रों का मानना है कि आज पुलिस कोर्ट से इन आरोपियों की ‘रिमांड’ (Police Remand) मांग सकती है। अगर पुलिस को रिमांड मिल जाती है, तो इन सभी से आमने-सामने बिठाकर कड़ी पूछताछ की जाएगी, जिससे इस चोरी के पीछे का पूरा नेटवर्क और असली मास्टरमाइंड बेनकाब हो सकता है।













