Political Update: देश में लड़कियों की शादी की उम्र और महिला सुरक्षा हमेशा से एक बहुत ही संवेदनशील मुद्दा रहा है। भारत का संविधान सबको बराबरी का हक देता है। लेकिन जब कोई जिम्मेदार व्यक्ति महिलाओं की सुरक्षा को उनकी शादी की उम्र से जोड़कर अजीबोगरीब बयान दे दे, तो राजनीति गरमाना तय है।
इन दिनों ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी के एक बयान ने देश की सियासत में भूचाल ला दिया है। लड़कियों की शादी को लेकर दिए गए उनके बयान पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेताओं ने कड़ा ऐतराज जताया है। बीजेपी नेताओं ने साफ कर दिया है कि यह देश किसी धार्मिक कानून या ‘शरिया’ से नहीं, बल्कि बाबासाहेब के बनाए संविधान से चलता है। आइए, एक दोस्त की तरह बिल्कुल आसान भाषा में समझते हैं कि आखिर मौलाना ने ऐसा क्या कह दिया जिस पर इतना बवाल मच गया है, और बीजेपी के बड़े नेताओं ने उन्हें क्या-क्या जवाब दिए हैं।
क्या है पूरा मामला? (मौलाना साजिद रशीदी का वो बयान)
इस पूरे विवाद की शुरुआत तब हुई जब मौलाना मोहम्मद साजिद रशीदी ने हाल ही में लड़कियों की शादी को लेकर एक दावा किया। उन्होंने कहा कि भारत में लड़कियों की शादी में देरी हो रही है, और इसी देरी की वजह से देश में रेप (दुष्कर्म) समेत महिलाओं के खिलाफ अपराध बढ़ रहे हैं।
आसान शब्दों में कहें तो, मौलाना का इशारा इस तरफ था कि अगर लड़कियों की शादी कम उम्र में (यानी 18 साल से पहले) कर दी जाए, तो ऐसे अपराधों में कमी आ सकती है। आज के इस आधुनिक दौर में, जहां सरकार लड़कियों को पढ़ाने और आगे बढ़ाने की बात कर रही है, वहां एक धार्मिक गुरु का ऐसा बयान आना कई लोगों को बहुत पीछे ले जाने वाली सोच लगा। इसी बयान के बाद बीजेपी के नेता उन पर हमलावर हो गए।
‘पैसे नहीं हैं तो पाकिस्तान का टिकट हम देंगे’- बाबूलाल मरांडी
मौलाना के इस बयान पर सबसे तीखी प्रतिक्रिया झारखंड विधानसभा में नेता विपक्ष और बीजेपी के कद्दावर नेता बाबूलाल मरांडी की तरफ से आई।
मरांडी ने कड़े शब्दों में कहा कि यह देश सिर्फ और सिर्फ संविधान के हिसाब से चलेगा। उन्होंने आजादी के समय का जिक्र करते हुए कहा कि जिन लोगों को लगता था कि हिंदू और मुसलमान एक साथ नहीं रह सकते, उन्होंने पाकिस्तान की मांग की थी और बंटवारे के बाद वे पाकिस्तान चले भी गए।
मरांडी ने मौलाना रशीदी को सीधा संदेश देते हुए कहा, “अगर मौलाना साजिद रशीदी को भारत के संविधान के अनुसार यहां रहने में कोई भी दिक्कत है, तो उन्हें पाकिस्तान चले जाना चाहिए।” उन्होंने यहां तक कह दिया कि अगर ऐसे लोगों के पास पाकिस्तान जाने के पैसे नहीं हैं, तो भारत सरकार उनके टिकट का इंतजाम भी कर देगी। लेकिन भारत में रहना है, तो संविधान का सख्ती से पालन करना ही होगा।
‘देश शरिया से नहीं, संविधान से चलेगा’- सांसद बृजलाल का कड़ा जवाब
इस बहस में बीजेपी के राज्यसभा सांसद और यूपी के पूर्व डीजीपी बृजलाल ने भी अपनी बात रखी। उन्होंने मौलाना के उस लॉजिक को पूरी तरह से गलत बताया जिसमें शादी की उम्र और रेप को जोड़ा गया था।
बृजलाल ने कहा, “रशीदी साहब को यह समझ लेना चाहिए कि यह देश शरिया कानून से नहीं चलेगा, यह हमेशा संविधान से ही चलेगा।” उन्होंने इतिहास की याद दिलाते हुए कहा कि पहले के जमाने में जब 10-10 साल की मासूम बच्चियों की शादी कर दी जाती थी, तब भी उनके साथ बुरा बर्ताव होता था और अपराध होते थे। इसलिए यह कहना बिल्कुल बेतुका है कि उम्र बढ़ने की वजह से रेप हो रहे हैं। उन्होंने ‘शरिया’ की बात करने वाली इस सोच की कड़ी निंदा की।
शाहनवाज हुसैन की नसीहत: ‘समुदाय को बदनाम न करें, माफी मांगें’
बीजेपी के वरिष्ठ नेता सैयद शाहनवाज हुसैन ने भी मौलाना रशीदी के बयान को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण (Unfortunate) बताया।
शाहनवाज हुसैन ने कहा कि इस तरह की बातें करके मौलाना सिर्फ अपनी छवि नहीं खराब कर रहे हैं, बल्कि पूरे मुस्लिम समुदाय (Community) को बदनाम कर रहे हैं। उन्होंने नसीहत दी कि एक जिम्मेदार पद पर बैठे व्यक्ति को ऐसी भाषा का इस्तेमाल बिल्कुल नहीं करना चाहिए। शाहनवाज हुसैन ने मौलाना से इस बयान के लिए तुरंत माफी मांगने की मांग की है।
बवाल बढ़ने पर मौलाना रशीदी ने दी क्या सफाई?
जब इस बयान पर टीवी चैनलों और सोशल मीडिया पर हंगामा बढ़ा और बीजेपी नेताओं ने चौतरफा हमला शुरू कर दिया, तो मौलाना साजिद रशीदी बैकफुट पर आ गए।
आलोचनाओं का जवाब देते हुए मौलाना ने अपनी बात का बचाव किया। उन्होंने कहा कि उनके बयान को तोड़-मरोड़ कर (संदर्भ से हटाकर) पेश किया गया है और इसके जरिए सिर्फ राजनीति की जा रही है। उन्होंने सफाई देते हुए कहा कि उन्होंने कभी भी 18 साल से कम उम्र की बच्चियों की शादी करने की वकालत (समर्थन) नहीं की थी। उनका आरोप है कि राजनीतिक फायदे के लिए उनकी बातों का गलत मतलब निकाला गया है।












