UP Politics: उत्तर प्रदेश की राजनीति में कब क्या हो जाए, इसका अंदाजा लगाना बहुत मुश्किल है। यहां सिर्फ विपक्षी पार्टियों से ही नहीं लड़ना होता, बल्कि कई बार पार्टी के अंदर चल रही खींचतान भी बड़ी सुर्खियां बन जाती है। इन दिनों समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) के अंदर पश्चिमी यूपी में एक ऐसा ही सियासी ड्रामा देखने को मिल रहा है।
यह कहानी है सपा की तेज-तर्रार सांसद रुचि वीरा और पूर्व मंत्री व सपा विधायक कमाल अख्तर के बीच चल रही गुटबाजी की। इस आपसी लड़ाई का नतीजा यह हुआ कि मंगलवार (30 जून) को सपा प्रमुख अखिलेश यादव के कड़े निर्देश के बाद कमाल अख्तर को विधान मंडल के ‘मुख्य सचेतक’ (Chief Whip) पद से इस्तीफा देना पड़ गया। कमाल अख्तर के इस्तीफे को रुचि वीरा का खेमा अपनी एक बड़ी राजनीतिक जीत के तौर पर देख रहा है। आइए, एक दोस्त की तरह बिल्कुल आसान भाषा में समझते हैं कि यह पूरा विवाद कैसे शुरू हुआ, अखिलेश यादव के जन्मदिन पर 53 फीट का केक क्यों कटा और रुचि वीरा ने तमाम अफवाहों पर क्या जवाब दिया है।
क्या है 53 फीट के केक और ‘जीत के जश्न’ का राज?
राजनीति में टाइमिंग बहुत मायने रखती है। एक तरफ मंगलवार को कमाल अख्तर की कुर्सी गई और दूसरी तरफ रुचि वीरा के आवास पर एक भव्य जश्न का माहौल बन गया।
मौका था सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के जन्मदिन का। इस खुशी में सांसद रुचि वीरा ने अपने घर पर पूरे 53 फीट लंबा केक कटवाया। सियासी गलियारों में यह चर्चा बहुत तेज है कि रुचि वीरा ने इससे पहले कभी अखिलेश यादव का जन्मदिन इतने बड़े और भव्य स्तर पर नहीं मनाया था। लोग इसे सीधे तौर पर कमाल अख्तर पर मिली जीत के जश्न से जोड़कर देख रहे हैं।
हालांकि, जब पत्रकारों ने रुचि वीरा से पूछा कि क्या यह केक कमाल अख्तर के इस्तीफे की खुशी में कटा है? तो उन्होंने बड़ी ही समझदारी से जवाब देते हुए कहा कि मंगलवार (30 जून) को केक कटवाने का यह प्रोग्राम अचानक बना था और इसका कमाल अख्तर के इस्तीफे से कोई लेना-देना नहीं है।
कैसे शुरू हुई रार? (PDA पंचायत का वो विवाद)
अब आप सोच रहे होंगे कि आखिर एक ही पार्टी के दो बड़े नेताओं के बीच इतनी बड़ी दुश्मनी शुरू कैसे हुई?
दरअसल, इस पूरी लड़ाई की जड़ एक ‘पीडीए (PDA) पंचायत’ है। हाल ही में एक पीडीए पंचायत का आयोजन किया गया था, जिसमें इलाके की सांसद होने के बावजूद रुचि वीरा को नहीं बुलाया गया।
रुचि वीरा को यह बात बिल्कुल रास नहीं आई कि उन्हें उनके ही क्षेत्र के कार्यक्रम में नजरअंदाज किया गया। उनका सीधा आरोप था कि इस सबके पीछे कमाल अख्तर का हाथ है। उन्होंने बिना कोई देरी किए इस बात की शिकायत सीधे पार्टी हाईकमान यानी अखिलेश यादव से कर दी। मामला इतना हाईलाइट हुआ कि आखिरकार अखिलेश यादव को सख्त कदम उठाना पड़ा और कमाल अख्तर को अपनी कुर्सी गंवानी पड़ी।
रुचि वीरा ने अखिलेश यादव का आभार जताते हुए कहा, “मैंने जो भी शिकायत की, राष्ट्रीय अध्यक्ष जी ने उस पर तुरंत संज्ञान लिया, इसके लिए उनका बहुत-बहुत धन्यवाद। वह सबको साथ लेकर चलने वाले नेता हैं।”
“हमें आपस में नहीं, बीजेपी से लड़ना है”
इस पूरी खींचतान के बीच रुचि वीरा ने एक बहुत ही सुलझी हुई राजनीतिक बात कही। उन्होंने कहा कि उनका कमाल अख्तर से कोई ‘संपत्ति के बंटवारे’ का झगड़ा नहीं है। जो राजनीतिक शिकायत थी, वह उन्होंने अपने नेता को बता दी।
रुचि वीरा ने संदेश देते हुए कहा, “हमें आपस में नहीं लड़ना है, हमारी लड़ाई भारतीय जनता पार्टी (BJP) से है। इसलिए राष्ट्रीय अध्यक्ष ने जो भी फैसला लिया है, वह पार्टी के हित में एकदम सही है।”
बेटी के टिकट और BJP में जाने की अफवाहों पर रुचि वीरा का बेबाक जवाब
इस विवाद के दौरान रुचि वीरा को लेकर कई तरह की अफवाहें उड़ रही थीं। कुछ लोगों ने कहा कि वह अपनी बेटी के लिए मुरादाबाद से टिकट मांग रही हैं, तो कुछ ने यह भी अफवाह फैला दी कि सपा के कई सांसद और रुचि वीरा पार्टी तोड़कर बीजेपी में जा रहे हैं।
इन सब पर रुचि वीरा ने अपना रुख बिल्कुल साफ कर दिया:
बेटी के टिकट पर: उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने अपनी बेटी के लिए ‘मुरादाबाद’ से कोई टिकट नहीं मांगा है। उन्होंने बस पार्टी से इतना कहा है कि बिजनौर जिले की जो भी सीट सपा के लिए सबसे कमजोर हो, वहां से उनकी बेटी को टिकट दे दिया जाए।
बीजेपी में जाने की बात पर: उन्होंने कड़े शब्दों में कहा, “मेरे टूटने या बीजेपी में जाने की खबर बिल्कुल झूठी है। मेरे परिवार के इतिहास में पिछले 100 सालों में भी कोई बीजेपी में नहीं गया। मेरे खिलाफ ये भ्रामक बातें फैलाई जा रही हैं।” उन्होंने कहा कि एक सांसद होने के नाते यह उनका फर्ज है कि वो अपने नेता (अखिलेश यादव) को जमीनी हकीकत से अवगत कराएं।













