Aishe Ghosh News:दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने 2021 के बंगला भवन प्रदर्शन मामले में एसएफआई नेता आइशी घोष के खिलाफ जारी गैर-जमानती वारंट रद्द कर दिया। अदालत ने व्यक्तिगत पेशी के बाद ₹1,000 के जुर्माने के साथ राहत दी।
- दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने आइशी घोष का गैर-जमानती वारंट रद्द किया।
- अदालत ने ₹1,000 जुर्माने के साथ राहत दी।
- मामला वर्ष 2021 के बंगला भवन प्रदर्शन से जुड़ा है।
- आइशी घोष पर आईपीसी की धारा 188 और 447 सहित कई आरोप हैं।
- अदालत में व्यक्तिगत रूप से पेश होने के बाद वारंट रद्द किया गया।
- हाल के छात्र आंदोलन में भी आइशी घोष सक्रिय भूमिका में रही थीं।
नई दिल्ली: दिल्ली की एक अदालत ने गुरुवार (30 जुलाई) को स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) की नेता आइशी घोष के खिलाफ जारी गैर-जमानती वारंट (NBW) रद्द कर दिया। यह वारंट वर्ष 2021 में बंगला भवन के बाहर हुए प्रदर्शन से जुड़े मामले में जारी किया गया था।
पटियाला हाउस कोर्ट के न्यायिक मजिस्ट्रेट (प्रथम श्रेणी) ने आइशी घोष की व्यक्तिगत पेशी के बाद वारंट रद्द करते हुए उन पर ₹1,000 का जुर्माना लगाया।
व्यक्तिगत पेशी के बाद मिली राहत
कानूनी रिपोर्टों के अनुसार, अदालत ने बुधवार को ही गैर-जमानती वारंट के क्रियान्वयन पर रोक लगाते हुए आइशी घोष को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होने का निर्देश दिया था। गुरुवार को उनके अदालत में उपस्थित होने के बाद न्यायालय ने वारंट रद्द करने का आदेश दिया।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला वर्ष 2021 में बंगला भवन के सामने हुए प्रदर्शन से जुड़ा है।
आइशी घोष पर कथित तौर पर:
- लोक सेवक के आदेश की अवहेलना (भारतीय दंड संहिता की धारा 188)
- आपराधिक अतिक्रमण (आईपीसी की धारा 447)
सहित अन्य धाराओं के तहत आरोप लगाए गए हैं। इस मामले में उनके खिलाफ पहले ही आरोपपत्र (चार्जशीट) दाखिल किया जा चुका है।
सीपीएम ने लगाए थे दिल्ली पुलिस पर आरोप
हाल ही में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीएम) ने आरोप लगाया था कि दिल्ली पुलिस ने नई दिल्ली स्थित पार्टी मुख्यालय से आइशी घोष को गिरफ्तार करने की कोशिश की थी। सोशल मीडिया पर सामने आए एक वीडियो में सीपीएम के राज्यसभा सांसद जॉन ब्रिटास को कथित तौर पर सादे कपड़ों में मौजूद एक महिला पुलिस अधिकारी से बहस करते हुए देखा गया।
हाल के छात्र आंदोलन में भी रहीं सक्रिय
हाल के दिनों में आइशी घोष जंतर-मंतर पर परीक्षा संबंधी मुद्दों को लेकर हुए छात्र आंदोलन के प्रमुख चेहरों में शामिल रही हैं। इस आंदोलन में परीक्षा प्रणाली और कथित अनियमितताओं को लेकर विभिन्न छात्र संगठनों ने विरोध प्रदर्शन किया था।












