अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे और दान के कथित गबन को लेकर राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। कांग्रेस ने रविवार (5 जुलाई) को भारतीय जनता पार्टी (BJP) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर सीधा हमला बोलते हुए इसे ‘भाजपा-आरएसएस इकोसिस्टम’ द्वारा किया गया एक बड़ा घोटाला करार दिया है। कांग्रेस ने इस मामले की सुप्रीम कोर्ट के सिटिंग जज से जांच कराने की मांग की है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व गृह मंत्री अमित शाह की चुप्पी पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
एसआईटी जांच में अब तक 8 गिरफ्तार, 80 लाख रुपये नकद बरामद
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच टीम (SIT) की प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर इस मामले की जांच आगे बढ़ रही है। इस मामले में बीते 25 जून को एफआईआर (FIR) दर्ज की गई थी, जिसके बाद अब तक आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार किए गए आरोपियों में से छह के पास से लगभग 80 लाख रुपये नकद और कुछ विदेशी मुद्रा बरामद की गई है। फिलहाल इस मामले की गहन जांच जारी है।
चंदा चोरी के आरोपों पर कांग्रेस का भाजपा-आरएसएस पर प्रहार
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने पीटीआई वीडियो से बातचीत में कहा कि राम मंदिर के चढ़ावे में ‘चंदा चोरी’ होने की बात अब पूरी तरह से साबित हो चुकी है। उन्होंने इस पूरे विवाद पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के बयान को शर्मनाक और अपमानजनक बताया। जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि जो लोग दूसरों को ईमानदारी, निष्पक्षता और राष्ट्रवाद का सर्टिफिकेट बांटते फिरते हैं, वे खुद इस बेहद अपमानजनक मामले में रंगे हाथों पकड़े गए हैं।
कांग्रेस नेता ने आगे आरोप लगाया कि आम जनता और कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा स्वेच्छा से दिए गए दान में से हजारों करोड़ रुपये का गबन किया गया है। उन्होंने मांग की कि इस पूरे मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट के किसी मौजूदा न्यायाधीश से कराई जानी चाहिए और सभी दोषियों के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई की जानी चाहिए।
भाजपा पर निशाना साधते हुए जयराम रमेश ने कहा कि भाजपा की रणनीति तीन स्तंभों ‘वोट चोरी, सीट चोरी और चंदा चोरी’ पर आधारित है। उन्होंने इस दौरान चुनावी बॉन्ड योजना (Electoral Bond Scheme) का भी जिक्र किया, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने असंवैधानिक घोषित कर दिया था। कांग्रेस नेता ने कहा कि सैकड़ों करोड़ रुपये ‘चंदा दो, धंधा लो’ के तहत जुटाए गए और चंदे का यह पूरा खेल भाजपा के डीएनए (DNA) का हिस्सा है।
सुप्रीम कोर्ट के सिटिंग जज से जांच कराने की उठी मांग
जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की चुप्पी को चौंकाने वाला बताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी, जिन्होंने राम मंदिर निर्माण और 22 जनवरी 2024 को लोकसभा चुनाव से ठीक पहले इसके उद्घाटन का पूरा श्रेय लिया था, उन्हें इस घोटाले पर देश के सामने बयान देना चाहिए।
जयराम रमेश ने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्यों की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट में केवल उन्हीं लोगों को जगह मिली है, जो भाजपा-आरएसएस के बेहद करीबी हैं। उन्होंने पूछा कि जब यह सब चल रहा था, तब प्रधानमंत्री के पूर्व प्रधान सचिव नृपेंद्र मिश्रा क्या कर रहे थे? उन्होंने कहा कि यह एक पूरी तरह से लॉक और आपस में जुड़ा हुआ इकोसिस्टम है, जहां किसी की नजर से कुछ भी नहीं बच सकता है।
FAQ:
Q1: राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में उत्तर प्रदेश सरकार की जांच की वर्तमान स्थिति क्या है?
A1: इस मामले में राज्य सरकार द्वारा गठित विशेष जांच टीम (SIT) की प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर 25 जून को प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई थी। अब तक आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है और उनके पास से लगभग 80 लाख रुपये नकद और कुछ विदेशी मुद्रा बरामद की गई है।
Q2: कांग्रेस ने इस मामले में किस तरह की जांच की मांग की है?
A2: कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि इस मामले में हजारों करोड़ रुपये के दान का गबन हुआ है, इसलिए इसकी जांच सुप्रीम कोर्ट के किसी मौजूदा (सिटिंग) न्यायाधीश से कराई जानी चाहिए।
Q3: कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री और गृह मंत्री पर क्या आरोप लगाए हैं?
A3: जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि चुनाव से ठीक पहले राम मंदिर के उद्घाटन का श्रेय लेने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह इस बड़े घोटाले पर पूरी तरह चुप हैं, जो कि बेहद चौंकाने वाला है।











