Iran War: CBS News की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान के साथ युद्ध के दौरान अमेरिका ने ATACMS और अन्य लंबी दूरी की मिसाइलों का बड़ा हिस्सा इस्तेमाल कर लिया। जानिए रिपोर्ट में क्या दावा किया गया और पेंटागन ने क्या कहा।
ईरान के साथ हालिया युद्ध के दौरान अमेरिका की सैन्य क्षमता को लेकर एक नई रिपोर्ट सामने आई है। बीबीसी के अमेरिकी साझेदार CBS News की रिपोर्ट के अनुसार, युद्ध के दौरान अमेरिका ने अपनी लंबी दूरी की गाइडेड मिसाइलों का बड़ा हिस्सा इस्तेमाल कर लिया, जिससे उसके रणनीतिक हथियारों के भंडार को लेकर नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
रिपोर्ट में क्या दावा किया गया?
बीबीसी फ़ारसी के अनुसार, मामले की जानकारी रखने वाले दो सूत्रों के हवाले से CBS News ने दावा किया कि अमेरिका ने ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ के दौरान अपने Army Tactical Missile System (ATACMS) और Precision Strike Missiles (PrSM) का लगभग पूरा उपलब्ध स्टॉक इस्तेमाल कर लिया।
इससे पहले समाचार एजेंसी रॉयटर्स भी अपनी रिपोर्ट में कह चुकी है कि इस अभियान में अमेरिका ने अपनी “लगभग सभी” लंबी दूरी की मिसाइलों का उपयोग किया था।
इंटरसेप्टर मिसाइलों को लेकर भी चिंता
रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी रक्षा प्रतिष्ठान के सामने सबसे बड़ी चिंता केवल लंबी दूरी की मिसाइलों की नहीं, बल्कि Patriot और THAAD इंटरसेप्टर मिसाइलों के घटते स्टॉक को लेकर भी है।
बताया गया है कि इन मिसाइलों का इस्तेमाल इतनी तेज़ी से हो रहा है कि अमेरिकी रक्षा उद्योग फिलहाल उसी गति से उनका उत्पादन नहीं कर पा रहा है।
अमेरिकी रक्षा विभाग ने क्या कहा?
अमेरिकी रक्षा विभाग (Pentagon) के वरिष्ठ प्रवक्ता शॉन पार्नेल ने इन दावों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा,
“अमेरिकी सेना दुनिया की सबसे ताकतवर सैन्य शक्ति है और उसके पास अपने मिशन को पूरा करने के लिए हर ज़रूरी क्षमता मौजूद है। हमने विभिन्न क्षेत्रों में सफल अभियान चलाए हैं और यह सुनिश्चित किया है कि देश और उसके हितों की रक्षा के लिए आवश्यक सैन्य संसाधन उपलब्ध रहें।”
हालांकि उन्होंने मिसाइलों के वास्तविक स्टॉक या संख्या पर कोई टिप्पणी नहीं की।
क्या है रणनीतिक महत्व?
यदि रिपोर्ट में किए गए दावे सही साबित होते हैं, तो यह अमेरिका के लिए रक्षा उत्पादन क्षमता और हथियारों की पुनःपूर्ति (Replenishment) को लेकर एक महत्वपूर्ण रणनीतिक चुनौती हो सकती है। हालांकि, अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि उसकी सैन्य तैयारियों और वैश्विक सुरक्षा क्षमताओं पर कोई असर नहीं पड़ा है।












