Ram Mandir Controversy: राम मंदिर में दान पेटी से चोरी के आरोपों की जांच कर रही एसआईटी (विशेष जांच दल) की कई सिफारिशों को मान लिया गया है। प्रारंभिक जांच में एक करोड़ रुपये से कम की राशि में हेराफेरी की बात सामने आई है।
अब इस मामले में राम मंदिर में काम करने वाले कर्मचारियों समेत कुल 6 लोगों के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज की जाएगी। इसके अलावा एक बड़ा बदलाव यह होने जा रहा है कि मंदिर के कामकाज को और पारदर्शी बनाने के लिए किसी रिटायर्ड अधिकारी को राम मंदिर का ‘सीईओ’ (CEO) बनाया जा सकता है। ट्रस्ट ने भी इस बात पर अपनी सहमति दे दी है।
2. संजय सिंह ने एसआईटी को सौंपे कौन से सबूत?
इस पूरे विवाद को सबसे ज्यादा मुखर होकर आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह उठा रहे हैं। एसआईटी चीफ के बुलावे पर संजय सिंह 25 जून की सुबह लखनऊ में एसआईटी दफ्तर पहुंचे।
उन्होंने जमीन खरीद घोटाले से जुड़े कई दस्तावेज एसआईटी को सौंपे हैं। संजय सिंह का सीधा आरोप है कि ट्रस्ट के लिए जो जमीनें खरीदी गईं, उनके दाम रातों-रात बढ़ा दिए गए। उन्होंने दावा किया कि:
2 करोड़ की जमीन 18.5 करोड़ में खरीदी गई।
3 करोड़ की जमीन के 24 करोड़ दिए गए।
9 करोड़ की प्रॉपर्टी 55.47 करोड़ में ट्रस्ट को बेची गई।
संजय सिंह ने आरोप लगाया है कि ये खरीदारी सीधे तौर पर चंपत राय के जरिए की गई।
3. वीएचपी (VHP) ने भी दिखाए सख्त तेवर, की जेल भेजने की मांग
राम मंदिर आंदोलन से जुड़े रहे विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने भी इस घटना को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। वीएचपी अध्यक्ष आलोक कुमार ने साफ कहा है कि इस मामले में ट्रस्ट का बचाव करने की कोई जरूरत नहीं है, यह एक बहुत बड़ी चूक है।
उन्होंने मांग की है कि बिना किसी दबाव के पुलिस एफआईआर दर्ज करे और इस मामले को ‘फास्ट ट्रैक कोर्ट’ में चलाया जाए। उन्होंने कहा कि 4 महीने के अंदर चंदे का एक भी पैसा चुराने वाला इंसान सलाखों के पीछे होना चाहिए, चाहे वह किसी भी पद पर क्यों न हो।
4. अफवाहों का सच: क्या चंपत राय ने इस्तीफा दे दिया?
सोशल मीडिया पर अक्सर बिना सिर-पैर की खबरें वायरल हो जाती हैं। हाल ही में यह अफवाह उड़ी कि राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है।
ट्रस्ट के विशेष आमंत्रित सदस्य गोपाल राव ने इसे पूरी तरह ‘भ्रामक और अफवाह’ बताया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि अभी तक ऐसा कोई फैसला नहीं लिया गया है। वहीं, चंपत राय ने एसआईटी जांच का हवाला देते हुए पीएमओ (PMO) द्वारा मांगी गई दान और बैंक खातों की डिटेल देने से फिलहाल इनकार कर दिया है।
5. कागभुसुंडि जी की प्रतिमा के गायब होने की क्या है सच्चाई?
एक और आरोप यह लग रहा था कि मंदिर से कागभुसुंडि जी की मूर्ति गायब कर दी गई है। लेकिन यह दावा भी झूठा निकला है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह प्रतिमा कार सेवक पुरम स्थित ‘भरत कुटी मंदिर’ में बिल्कुल सुरक्षित रखी हुई है और खुद चंपत राय रोज इसकी पूजा-अर्चना करते हैं।
(इसके अलावा, स्वामी गोविंदानंद सरस्वती ने एक अलग ही आरोप लगाते हुए अविमुक्तेश्वरानंद को ‘राम मंदिर का पहला चोर’ बता दिया है। उनका दावा है कि स्वरूपानंद सरस्वती द्वारा जुटाया गया करोड़ों का सोना-चांदी अविमुक्तेश्वरानंद ने ट्रस्ट तक पहुंचने ही नहीं दिया।)
6. राजनीतिक बवाल: अखिलेश का तंज और केजरीवाल का विरोध
इस मुद्दे पर राजनीति भी खूब गरमाई हुई है। समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने इसे ‘महापाप’ और आस्था के साथ खिलवाड़ बताया है। उन्होंने एसआईटी की निष्पक्षता पर ही सवाल उठाते हुए तंज कसा कि “क्या एसआईटी का मतलब चोरी में हिस्सेदारी है?”
वहीं, दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल आज अयोध्या दौरे पर हैं, जिसका स्थानीय संत समाज भारी विरोध कर रहा है। हनुमानगढ़ी के महंत राजू दास ने केजरीवाल को ‘कालनेमि’ तक कह दिया है। संतों का कहना है कि राम मंदिर के मुद्दे पर राजनीति नहीं होनी चाहिए और एसआईटी की रिपोर्ट का इंतजार करना चाहिए।
7. सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला
अब यह पूरा मामला देश की सबसे बड़ी अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट भी पहुंच गया है। अधिवक्ता अजय कुमार राय और दिनेश कुमार यादव ने एक याचिका दायर की है, जिसमें इस पूरे गबन और भ्रष्टाचार की जांच ‘सीबीआई’ (CBI) से कराने की मांग की गई है। कोर्ट ने इस मामले पर सोमवार को मेंशनिंग करने को कहा है।
राम मंदिर के दान में गड़बड़ी का यह मामला अब एक नाजुक मोड़ पर है। एक तरफ एसआईटी 6 लोगों पर एफआईआर करने जा रही है, तो दूसरी तरफ राजनीतिक दल इसे बड़ा मुद्दा बना रहे हैं। अब देश की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि एसआईटी की फाइनल रिपोर्ट में किन-किन लोगों के नाम सामने आते हैं और क्या सच में राम भक्तों के पैसे के साथ खिलवाड़ हुआ है या यह सिर्फ एक प्रशासनिक चूक थी।









