Pakistan Water Crisis: पानी के बिना जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती। लेकिन क्या हो जब किसी देश का पूरा खेती-किसानी का सिस्टम ही पानी की कमी से जूझने लगे? इन दिनों हमारे पड़ोसी देश पाकिस्तान में कुछ ऐसा ही माहौल है।
कहानी शुरू होती है जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद। इस हमले के जवाब में भारत ने एक बहुत ही कड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया— भारत ने ‘सिंधु जल संधि’ (Indus Waters Treaty) को स्थगित (सस्पेंड) कर दिया। भारत के इस फैसले के बाद पाकिस्तान के सरकारी दफ्तरों से लेकर आम किसानों तक हड़कंप मच गया। सबको लगा कि अब पाकिस्तान सूखे की चपेट में आ जाएगा। लेकिन फिर कुदरत ने एक ऐसा खेल खेला जिसने पूरी कहानी पलट दी। हालांकि, यह राहत सिर्फ कुछ पल की है, क्योंकि अब पाकिस्तान के सामने एक ऐसा नया खतरा आ खड़ा हुआ है, जिसका इलाज बाढ़ और बारिश के पास भी नहीं है।
आइए, बिल्कुल आसान भाषा में समझते हैं कि पाकिस्तान में पानी का यह पूरा गणित क्या है और वहां असल में क्या चल रहा है।
भारत का कड़ा फैसला और पाकिस्तान में पानी का ‘हाहाकार’
भारत की तरफ से सिंधु जल संधि पर रोक लगने के बाद, पाकिस्तान के अधिकारियों की रातों की नींद उड़ गई थी। पाकिस्तान की आधिकारिक रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2025 के ‘खरीफ सीजन’ (गर्मियों की फसल) की शुरुआत में वहां के अधिकारियों ने अनुमान लगाया था कि देश में 21 फीसदी तक पानी की कमी हो सकती है।
हालत इतने खराब लग रहे थे कि पाकिस्तान के दो सबसे बड़े डैम (जलाशय)— टरबेला और मंगला का पानी लगभग ‘डेड स्टोरेज’ (खत्म होने की कगार) पर पहुंच गया था। पाकिस्तान के पंजाब और सिंध जैसे राज्य पूरी तरह से खेती पर निर्भर हैं। वहां के अधिकारियों को डर था कि चिनाब और झेलम नदी में पानी कम होने से फसलें बर्बाद हो जाएंगी। बैठकों में साफ कहा जा रहा था कि भारत की तरफ से पानी कम आने की वजह से जो संकट पैदा हुआ है, उससे बचने के लिए बचा हुआ पानी बहुत सोच-समझकर खर्च करना होगा।
कुदरत का खेल: कैसे एक झटके में बदल गई तस्वीर?
पाकिस्तानी सरकार सूखे से निपटने की प्लानिंग कर ही रही थी कि अचानक मौसम ने करवट ले ली।
सीजन के दूसरे हिस्से में सिंधु बेसिन के ऊपरी पहाड़ी इलाकों में बहुत तेज गर्मी पड़ी, जिससे बर्फ तेजी से पिघलने लगी और नदियों में पानी का बहाव बढ़ गया। इसके बाद अगस्त 2025 के आखिर में चिनाब और पूर्वी नदियों के इलाकों में भयंकर बारिश हुई, जिसने बाढ़ के हालात पैदा कर दिए।
जो पाकिस्तान बूंद-बूंद पानी के लिए तरसने की तैयारी कर रहा था, उसका पूरा सिस्टम ही पानी से भर गया।
अनुमान: पाकिस्तान ने खरीफ सीजन के लिए 104.03 मिलियन एकड़ फीट (MAF) पानी का अनुमान लगाया था।
हकीकत: लेकिन भारी बारिश और बर्फ पिघलने से उन्हें 122.36 MAF पानी मिल गया, जो उनके अनुमान से 18 फीसदी ज्यादा था।
99 फीसदी तक भर गए डैम (आंकड़ों में समझें)
इस आसमानी पानी का असर तुरंत देखने को मिला। सितंबर 2025 आते-आते पाकिस्तान के प्रमुख जलाशय अपनी क्षमता के 99 फीसदी तक भर गए। जो डैम कुछ महीने पहले सूखने वाले थे, वे अब लबालब थे।
रिपोर्ट बताती है कि कोटरी बैराज के नीचे से बहने वाले अतिरिक्त पानी की मात्रा 30.85 MAF तक पहुंच गई थी। यह उनके सोचे गए अनुमान से तीन गुना ज्यादा और पिछले 5 सालों के औसत से 71 फीसदी ज्यादा थी। यानी कुदरत की इस मेहरबानी ने पाकिस्तान के जल संकट को कुछ समय के लिए टाल दिया।
टरबेला डैम का संकट: पाकिस्तान के लिए क्या है नई मुसीबत?
बारिश और बाढ़ ने फौरी तौर पर राहत तो दे दी, लेकिन पाकिस्तान की असली बीमारी अब भी जस की तस है। पाकिस्तान की जल व्यवस्था की रीढ़ कहे जाने वाले ‘टरबेला डैम’ (Tarbela Dam) की हालत अब बहुत खस्ता हो चुकी है।
दरअसल, जब टरबेला डैम बना था, तब इसमें पानी रोकने की क्षमता 9.68 MAF थी। लेकिन आज यह घटकर सिर्फ 5.73 MAF रह गई है। यानी इतने सालों में इस डैम की क्षमता लगभग 48 फीसदी कम हो चुकी है।
इसके पीछे की असली वजह है— तलछट (Sediment) यानी गाद और मिट्टी का जमा होना।
सरकारी डेटा बताता है कि मई 2022 में इसकी क्षमता 5.827 MAF थी, जो मार्च 2026 तक घटकर 5.580 MAF रह गई। साल 2025 में आई बाढ़ के पानी के साथ जो भारी मात्रा में मिट्टी और गाद बहकर आई, उसने डैम को और ज्यादा भर दिया है।
रोटी और खेती पर मंडराता खतरा (खाद्य सुरक्षा)
विशेषज्ञों का कहना है कि बाढ़ आपको पानी तो दे सकती है, लेकिन डैम में जमी मिट्टी को बाहर नहीं निकाल सकती।
पाकिस्तान की 90 फीसदी खेती ‘सिंधु बेसिन सिंचाई सिस्टम’ पर टिकी है। टरबेला डैम सिर्फ सिंचाई ही नहीं, बल्कि बिजली बनाने के लिए भी बहुत जरूरी है। अगर डैम की क्षमता इसी तरह घटती रही, तो पाकिस्तान पानी स्टोर ही नहीं कर पाएगा।
इसका सीधा असर वहां की फसलों पर पड़ेगा और भविष्य में पाकिस्तान को भुखमरी (खाद्य सुरक्षा) जैसे गंभीर संकट का सामना करना पड़ सकता है।
कुल मिलाकर कहानी यह है कि साल 2025 का संकट भले ही बाढ़ के पानी ने टाल दिया हो, लेकिन पाकिस्तान के सिर पर मंडरा रहा खतरा अभी टला नहीं है। एक तरफ भारत का सिंधु जल संधि को रोकने का सख्त फैसला, दूसरी तरफ बदलता मौसम और तीसरी तरफ मिट्टी से भरते डैम। आने वाले सालों में पाकिस्तान के लिए अपनी खेती और जनता को बचाना एक बहुत बड़ी अग्निपरीक्षा साबित होने वाली है।










