Maharashtra TET Paper Leak: जब कोई छात्र दिन-रात एक करके सरकारी नौकरी की तैयारी करता है, तो उसके मन में सिर्फ एक ही सपना होता है— एक सुरक्षित भविष्य। लेकिन सोचिए, उस छात्र और उसके परिवार पर क्या बीतती होगी जब परीक्षा के बाद अचानक खबर आती है कि “पेपर लीक हो गया है।”
हाल ही में महाराष्ट्र शिक्षक पात्रता परीक्षा (Maharashtra TET) के पेपर लीक मामले ने पूरे देश में हड़कंप मचा दिया है। जैसे-जैसे पुलिस इस मामले की तह में जा रही है, वैसे-वैसे एक ऐसे बड़े ‘सिंडिकेट’ (गिरोह) का पर्दाफाश हो रहा है, जिसकी जड़ें किसी एक राज्य में नहीं बल्कि पूरे देश में फैली हैं। इस पूरे खेल का मास्टरमाइंड कोई और नहीं, बल्कि बिहार के समस्तीपुर का रहने वाला ब्रजेंद्र गुप्ता बताया जा रहा है।
आइए, बिल्कुल आसान भाषा में समझते हैं कि एक साधारण परिवार से आने वाला ब्रजेंद्र कैसे पेपर लीक का इतना बड़ा ‘डॉन’ बन गया और पुलिस अब तक उस तक क्यों नहीं पहुंच पाई है।
महाराष्ट्र TET पेपर लीक: कैसे खुला मास्टरमाइंड का राज?
ठाणे पुलिस जब महाराष्ट्र टीईटी पेपर लीक मामले की जांच कर रही थी, तब उन्होंने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया। जब इन तीनों से कड़ाई से पूछताछ की गई, तो उन्होंने उस ‘अदृश्य’ इंसान का नाम उगल दिया जो पर्दे के पीछे से इस पूरे खेल को चला रहा था। वह नाम था— ब्रजेंद्र गुप्ता।
जैसे ही यह नाम सामने आया, महाराष्ट्र पुलिस अलर्ट हो गई। पुलिस को पता चला कि ब्रजेंद्र सिर्फ महाराष्ट्र तक सीमित नहीं है, बल्कि वह देश के अलग-अलग राज्यों में सरकारी भर्ती परीक्षाओं के पेपर लीक कराने वाले नेटवर्क का मुख्य सरगना है। उसकी तलाश में फिलहाल महाराष्ट्र पुलिस की कई टीमें दिल्ली, हरियाणा, यूपी और बिहार की खाक छान रही हैं।
कौन है ब्रजेंद्र गुप्ता? (साधारण परिवार से करोड़ों की संपत्ति तक का सफर)
यह जानकर आपको हैरानी होगी कि करोड़ों का साम्राज्य खड़ा करने वाला ब्रजेंद्र गुप्ता एक बेहद साधारण परिवार से आता है। वह बिहार के समस्तीपुर जिले का रहने वाला है और चार भाइयों में सबसे छोटा है।
ब्रजेंद्र के पिता, बालेश्वर साह, गांव में तेल पेराई (कोल्हू) का काम करके अपना घर चलाते हैं, और बाकी भाई भी छोटे-मोटे कारोबार से जुड़े हैं। जब पुलिस ब्रजेंद्र के गांव पहुंची, तो परिवार वालों ने बताया कि उनका ब्रजेंद्र से सालों से कोई संपर्क नहीं है। उनके मुताबिक, वह कई सालों से गांव नहीं आया है और परिवार का उसके कामों से कोई लेना-देना नहीं है।
लेकिन दूसरी तरफ, ब्रजेंद्र की संपत्ति के आंकड़े हैरान करने वाले हैं। खबरों की मानें तो पेपर लीक के इस काले धंधे से उसने करोड़ों रुपये कमाए हैं। समस्तीपुर के उसके पैतृक गांव से लेकर दिल्ली और पटना जैसे बड़े शहरों में उसके आलीशान फ्लैट होने की बात सामने आ रही है। फिलहाल पुलिस उसकी संपत्तियों के सोर्स (आय के साधन) की भी बारीकी से जांच कर रही है।
25 सालों से चल रहा था ‘पेपर लीक’ का खेल (2011 से जुड़ा है तार)
ब्रजेंद्र गुप्ता का नाम पुलिस की फाइलों के लिए कोई नया नहीं है। जांच एजेंसियों के मुताबिक, वह पिछले करीब 25 सालों से प्रतियोगी परीक्षाओं (Competitive Exams) के प्रश्नपत्र लीक कराने वाले धंधे से जुड़ा हुआ है।
इससे पहले साल 2011 में भी एक बहुत बड़े पेपर लीक कांड में उसका नाम सामने आया था। वह एक ऐसा नेटवर्क चलाता है जो पहले किसी तरह सरकारी भर्तियों के पेपर हासिल करता है और फिर मोटी रकम लेकर उन्हें परीक्षा से पहले ही कुछ खास अभ्यर्थियों (Candidates) तक पहुंचा देता है। पुलिस अब उसके पुराने रिकॉर्ड भी खंगाल रही है ताकि इस गिरोह के बाकी साथियों को पकड़ा जा सके।
पुलिस की रडार से कैसे बच रहा है ब्रजेंद्र? (सोशल मीडिया से दूरी)
आज के समय में जब हर इंसान फेसबुक और इंस्टाग्राम पर अपनी जिंदगी की हर अपडेट शेयर करता है, वहीं ब्रजेंद्र सोशल मीडिया से कोसों दूर रहता है।
जांच एजेंसियों का कहना है कि ब्रजेंद्र इंटरनेट और सोशल मीडिया पर बिल्कुल भी एक्टिव नहीं है। यही कारण है कि उसकी डिजिटल फुटप्रिंट (ऑनलाइन मौजूदगी) नहीं मिलती, जिससे उसे ट्रैक करना बहुत मुश्किल हो रहा है। इसके अलावा, वह बहुत चालाक है और लगातार अपने ठिकाने बदलता रहता है। बताया जा रहा है कि पटना पुलिस भी काफी लंबे समय से किसी मामले में उसकी तलाश कर रही थी, लेकिन वह कभी हाथ नहीं आया।
सिर्फ महाराष्ट्र नहीं, कई राज्यों में फैला है सिंडिकेट
यह मामला सिर्फ एक परीक्षा के लीक होने का नहीं है। पुलिस को शक है कि ब्रजेंद्र और उसके गिरोह ने महाराष्ट्र के अलावा कई अन्य राज्यों की सरकारी भर्ती परीक्षाओं में भी सेंधमारी की होगी।
इस शक को दूर करने के लिए महाराष्ट्र पुलिस अब अलग-अलग राज्यों की पुलिस और जांच एजेंसियों (जैसे STF) के साथ मिलकर काम कर रही है। वे ब्रजेंद्र के बैंक खातों (Financial transactions) और टेक्निकल डेटा की पड़ताल कर रहे हैं, ताकि पता चल सके कि उसने किन-किन राज्यों के युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया है।
ब्रजेंद्र गुप्ता जैसे लोग सिर्फ पेपर नहीं चुराते, बल्कि वे उन लाखों गरीब और मध्यम वर्गीय छात्रों की मेहनत और उनके सपनों को चुराते हैं जो दिन-रात पढ़ाई करते हैं। 25 सालों तक ऐसे ‘सिंडिकेट’ का बिना पकड़े गए चलना हमारे सिस्टम पर भी कई गंभीर सवाल खड़े करता है। अब उम्मीद यही है कि देश भर की पुलिस जल्द ही इस मास्टरमाइंड को सलाखों के पीछे पहुंचाएगी, ताकि भविष्य में कोई भी मेहनत करने वाले छात्रों के साथ इस तरह का धोखा न कर सके।












