Lohagad Fort Trekking: बारिश का मौसम आते ही या वीकेंड पर दोस्तों के साथ कहीं घूमने का प्लान बनते ही, महाराष्ट्र के लोहागढ़ फोर्ट (Lohagad Fort) का नाम सबसे पहले दिमाग में आता है। पुणे और लोनावाला के पास स्थित यह ऐतिहासिक किला अपनी प्राचीन वास्तुकला और चारों तरफ फैली हरियाली के लिए मशहूर है। लेकिन, पहाड़ों की ऊंचाई और ट्रेकिंग के रोमांच के बीच हम अक्सर अपनी सुरक्षा (Safety) को नजरअंदाज कर देते हैं।
हाल ही में पहाड़ों और ट्रेकिंग साइट्स पर हुई कुछ दुखद घटनाओं के बाद यह और भी जरूरी हो गया है कि हम सफर पर निकलने से पहले पूरी तैयारी करें। अगर आप भी लोहागढ़ किले की ट्रेकिंग का प्लान बना रहे हैं, तो एक दोस्त की तरह मैं आपको उन 5 गलतियों के बारे में बताने जा रहा हूं, जिनसे आपको हर हाल में बचना चाहिए। आइए जानते हैं कि अपने सफर को सुरक्षित और मजेदार कैसे बनाएं।
लोहागढ़ किला: क्यों है यह पर्यटकों की पहली पसंद?
लोहागढ़ फोर्ट अपने खूबसूरत नजारों और बादलों से घिरी चोटियों के लिए पर्यटकों को अपनी तरफ खींचता है। ट्रेकिंग के शौकीन लोगों के लिए यह जगह किसी जन्नत से कम नहीं है। किले तक पहुंचने का रास्ता काफी रोमांचक है।
जब आप ऊपर पहुंचते हैं, तो वहां से दिखने वाला नजारा आपको घंटों तक वहीं रुकने पर मजबूर कर देता है। लेकिन, यह समझना जरूरी है कि यह किला काफी ऊंचाई पर है और अगर कोई अनहोनी हो जाए, तो वहां तुरंत मदद पहुंचना थोड़ा मुश्किल होता है। इसलिए अपनी सेफ्टी की जिम्मेदारी आपके अपने हाथों में होती है।
ट्रेकिंग के दौरान भूलकर भी न करें ये 5 गलतियां
पहाड़ों पर सफर करते समय आपकी एक छोटी सी लापरवाही भी भारी पड़ सकती है। लोहागढ़ फोर्ट जाते समय इन गलतियों से हमेशा बचें:
1. अकेले सफर पर निकल जाना
पहाड़ी रास्तों और ट्रेकिंग के लिए अकेले जाना कभी भी अच्छा आइडिया नहीं होता। रास्ते में कई बार फिसलन होती है या अचानक मदद की जरूरत पड़ सकती है। इसलिए कोशिश करें कि आप परिवार या दोस्तों के ग्रुप के साथ ही जाएं। अगर फिर भी अकेले जाना पड़े, तो अपने परिवार या किसी करीबी दोस्त को अपनी लोकेशन और रूट के बारे में पूरी जानकारी देकर जाएं।
2. गलत जूतों (Footwear) का चुनाव करना
कई लोग ट्रेकिंग पर भी नॉर्मल स्नीकर्स या फैशन वाले कैजुअल जूते पहनकर चले जाते हैं, जो पहाड़ों के लिए बिल्कुल सही नहीं हैं। किले के रास्ते में बारिश या ओस के कारण काफी फिसलन हो सकती है। अगर जूतों की ग्रिप (Grip) अच्छी नहीं होगी, तो पैर फिसलने का खतरा बना रहता है। इसलिए हमेशा मजबूत और अच्छी ग्रिप वाले ट्रेकिंग शूज (Trekking Shoes) पहनकर ही सफर पर निकलें।
3. पावर बैंक या एक्स्ट्रा फोन साथ न रखना
ऊंचाई पर जाने पर अक्सर मोबाइल का नेटवर्क चला जाता है या बैटरी तेजी से खत्म होती है। ऐसे में अगर आप किसी इमरजेंसी में फंस गए, तो किसी से संपर्क करना मुश्किल हो जाएगा। इसलिए अपने साथ एक फुल चार्ज पावर बैंक जरूर रखें। हो सके तो एक एक्स्ट्रा फोन (चाहे वह कीपैड वाला ही क्यों न हो) भी साथ रखें, ताकि मेन फोन की बैटरी डेड होने पर आप किसी से मदद मांग सकें।
4. शॉर्टकट लेना या देर रात तक रुकना
पहाड़ों पर जल्दी अंधेरा हो जाता है और अंधेरा होते ही रास्ते भटकने का रिस्क बढ़ जाता है। कई बार लोग एडवेंचर के चक्कर में सीधा या शॉर्टकट रास्ता लेने की कोशिश करते हैं, जो बहुत खतरनाक साबित हो सकता है। हमेशा तय किए गए सुरक्षित ट्रेकिंग रूट पर ही चलें। इसके अलावा, समय का खास ध्यान रखें। कोशिश करें कि शाम ढलने या अंधेरा होने से पहले आप किले से नीचे आ जाएं। सुनसान रास्तों पर रुकना सुरक्षित नहीं होता।
5. सेल्फी और फोटोग्राफी के चक्कर में लापरवाही
आजकल हर कोई सोशल मीडिया के लिए अच्छी फोटो या रील बनाना चाहता है। लोहागढ़ फोर्ट का नजारा है ही इतना खूबसूरत कि लोग कैमरे में खो जाते हैं। लेकिन कई बार अच्छी सेल्फी लेने के चक्कर में लोग खाई या किनारे के बहुत करीब चले जाते हैं। याद रखें, आपकी जान एक फोटो से कहीं ज्यादा कीमती है। तस्वीरें जरूर लें, लेकिन एक सुरक्षित जगह पर खड़े होकर।
महिलाओं और अकेले सफर करने वालों के लिए खास टिप्स
अगर आप एक महिला हैं और अकेले या अपनी सहेलियों के साथ ट्रेकिंग पर जा रही हैं, तो अपनी सुरक्षा को लेकर एक्स्ट्रा अलर्ट रहें। कम भीड़-भाड़ वाली या अनजान जगहों पर ज्यादा देर तक न रुकें। अपने बैग में एक फर्स्ट-एड किट (First-aid kit), टॉर्च, पानी की बोतल और जरूरी दवाइयां जरूर रखें। किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ रास्ता शेयर करने से बचें।







