Uttarakhand Hidden Gems: जब भी उत्तराखंड घूमने की बात आती है, तो हमारे दिमाग में सबसे पहले नैनीताल, मसूरी या ऋषिकेश का नाम आता है। लेकिन आजकल इन जगहों पर इतनी भीड़ और ट्रैफिक होता है कि कई बार तो लगता है जैसे हम अपने शहर के ही किसी भीड़-भाड़ वाले इलाके में आ गए हैं। अगर आप शहर के शोर-शराबे, प्रदूषण और रोजमर्रा की भागदौड़ से दूर कुछ दिन बिल्कुल शांति में बिताना चाहते हैं, तो आज हम आपको उत्तराखंड के एक ऐसे छिपे हुए गांव के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं।
इस खूबसूरत गांव का नाम है ‘वाण गांव’ (Wan Village)। यह गांव इतना शांत और सुंदर है कि एक बार यहां जाने के बाद आपका वापस लौटने का मन नहीं करेगा। आइए, एक दोस्त की तरह बिल्कुल आसान भाषा में आपको बताते हैं कि यह गांव कहां है, यहां क्या-क्या खास है और आप यहां कैसे पहुंच सकते हैं।
कहां बसा है वाण गांव और क्या है इसकी खासियत?
वाण गांव उत्तराखंड के खूबसूरत चमोली जिले में स्थित है। यह कोई आम गांव नहीं है। यह समुद्र तल से करीब 2400 से 2500 मीटर (लगभग 8000 फीट) की ऊंचाई पर बसा हुआ है।
इस गांव की सबसे बड़ी खासियत इसकी प्राकृतिक सुंदरता है। यह चारों तरफ से ऊंचे-ऊंचे पहाड़ों से घिरा हुआ है। गांव के आसपास देवदार और ओक (बांज) के घने जंगल फैले हुए हैं, जो इस जगह को एक जादुई रूप देते हैं। यहां आपको आम टूरिस्ट स्पॉट्स की तरह भीड़भाड़ नहीं मिलेगी। यहां बस कुछ गिने-चुने घर हैं, दूर-दूर तक फैली हिमालय की चोटियां हैं और ऐसी ताजी हवा है जो आपकी सारी थकान मिटा देगी।
लाटू देवता का घर: क्या है इस गांव की धार्मिक अहमियत?
वाण गांव सिर्फ अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी गहरी धार्मिक आस्था के लिए भी जाना जाता है। उत्तराखंड के लोगों के लिए यह गांव बहुत पवित्र है, क्योंकि इसे ‘लाटू देवता’ (Latu Devta) का घर माना जाता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, लाटू देवता को पहाड़ों की रक्षक ‘मां नंदा देवी’ का धर्म भाई माना जाता है। इस गांव में लाटू देवता का एक बेहद प्राचीन और रहस्यमयी मंदिर भी है। जब उत्तराखंड की विश्व प्रसिद्ध ‘नंदा देवी राजजात यात्रा’ निकलती है, तो वह इस गांव से होकर ही गुजरती है। यही वजह है कि स्थानीय लोगों के दिलों में वाण गांव की एक बहुत ही खास और अलग पहचान है।
रूपकुंड ट्रेकर्स का बेस कैंप
भले ही आम पर्यटकों को इस गांव के बारे में ज्यादा जानकारी न हो, लेकिन जो लोग ट्रेकिंग (Trekking) के शौकीन हैं, वे इस गांव को बहुत अच्छी तरह जानते हैं।
दरअसल, वाण गांव मशहूर ‘रूपकुंड ट्रेक’ (Roopkund Trek) के रास्ते में पड़ता है। रूपकुंड वही रहस्यमयी झील है, जहां इंसानी कंकाल मिलते हैं। इस झील तक पहुंचने के लिए ट्रेकर्स को वाण गांव से होकर ही गुजरना पड़ता है। इसलिए हर साल हजारों ट्रेकर्स और एडवेंचर के शौकीन लोग अपने सफर के दौरान इस गांव में रुकते हैं।
वाण गांव कैसे पहुंचें? (सफर का पूरा रूट)
अगर आप वाण गांव जाने का मन बना रहे हैं, तो आपको बता दें कि यहां पहुंचना थोड़ा सा रोमांचक है। आप सीधे किसी ट्रेन, फ्लाइट या लग्जरी बस से यहां नहीं पहुंच सकते।
पहला पड़ाव: सबसे पहले आपको देश के किसी भी हिस्से से फ्लाइट, ट्रेन या बस के जरिए देहरादून, हरिद्वार या ऋषिकेश पहुंचना होगा।
दूसरा पड़ाव: ऋषिकेश या हरिद्वार से आपको चमोली जिले के ‘कर्णप्रयाग’ या ‘थराली’ (Tharali) के लिए बस या शेयरिंग टैक्सी लेनी होगी।
आखिरी पड़ाव: थराली पहुंचने के बाद आपको ‘देवाल’ (Dewal) होते हुए वाण गांव पहुंचना होगा। थराली या देवाल से वाण गांव के लिए आपको लोकल गाड़ियां आसानी से मिल जाएंगी।
सफर पर जाने से पहले इन 3 बातों का रखें खास ध्यान
अगर आप वाण गांव जा रहे हैं, तो कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना बहुत जरूरी है:
यह कोई कमर्शियल टूरिस्ट स्पॉट नहीं है: वाण एक बहुत ही सीधा-साधा और पारंपरिक गांव है। यहां आपको बड़े-बड़े होटल या पार्टी करने की जगहें नहीं मिलेंगी। इसलिए यहां जाकर शोर न मचाएं और स्थानीय लोगों की संस्कृति का पूरा सम्मान करें।
कचरा न फैलाएं: यह जगह कुदरत का एक अनमोल तोहफा है। कृपया अपने साथ प्लास्टिक की बोतलें या चिप्स के पैकेट ले जाएं तो उन्हें वहां न फेंकें। पर्यावरण को साफ रखें।
ड्राइविंग में सावधानी: अगर आप अपनी निजी कार या बाइक से जा रहे हैं, तो ध्यान रखें कि पहाड़ों के रास्ते बहुत घुमावदार और संकरे हैं। अगर आपको पहाड़ों पर गाड़ी चलाने का अच्छा अनुभव नहीं है, तो अपनी गाड़ी ले जाने से बचें और लोकल टैक्सी का ही इस्तेमाल करें।
वाण गांव उन लोगों के लिए एक परफेक्ट ‘वीकेंड गेटअवे’ है, जो सोशल मीडिया और शहर की भागदौड़ से कटकर खुद के साथ या अपने परिवार के साथ कुछ सुकून के पल बिताना चाहते हैं। ऊंचे पहाड़, घने जंगल और लाटू देवता का आशीर्वाद— यह सब मिलकर आपके इस सफर को जिंदगी भर के लिए यादगार बना देंगे। तो अगली बार जब भी उत्तराखंड आएं, तो इस छिपे हुए स्वर्ग को अपनी लिस्ट में जरूर शामिल करें…..












