Broad Peak Avalanche: गिलगित-बाल्टिस्तान स्थित 8,047 मीटर ऊंची ब्रॉड पीक पर हिमस्खलन में अमेरिका, ओमान और नेपाल के तीन पर्वतारोहियों की मौत की पुष्टि हुई है। निर्मल पुर्जा के नेतृत्व वाली टीम के अन्य सदस्यों की तलाश जारी है।
इस्लामाबाद: पाकिस्तान के गिलगित-बाल्टिस्तान क्षेत्र में स्थित काराकोरम पर्वतमाला की ब्रॉड पीक (Broad Peak) पर आए भीषण हिमस्खलन (एवलांच) में अब तक तीन पर्वतारोहियों की मौत की पुष्टि हुई है। राहत एवं बचाव अभियान लगातार जारी है, जबकि कुछ अन्य पर्वतारोहियों की तलाश अभी भी जारी है।
अधिकारियों के अनुसार, मृतकों की पहचान अमेरिका की मैलोरी गीस, ओमान की नाधिरा अहमद अब्दुल्ला अल हार्थी और नेपाल के पूर बहादुर गुरूंग (युक्ता) के रूप में हुई है। तीनों के शव हेलीकॉप्टर के जरिए अस्पताल पहुंचाए गए हैं, जहां कानूनी औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं।
निर्मल पुर्जा की टीम से टूटा था संपर्क
प्रसिद्ध पर्वतारोही निर्मल पुर्जा (निम्स दाई) के नेतृत्व में 10 सदस्यीय दल ब्रॉड पीक पर चढ़ाई कर रहा था। गुरुवार को अचानक आए हिमस्खलन के बाद पूरे दल से संपर्क टूट गया, जिसके बाद बड़े पैमाने पर राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया गया।
ड्रोन से मिले कुछ सुराग
पाकिस्तान अल्पाइन क्लब ने शुरुआत में चार शव मिलने की जानकारी दी थी, लेकिन बाद में स्पष्ट किया कि मौके से दो शव और एक शव का हिस्सा बरामद हुआ है। क्लब के अनुसार, ड्रोन की सहायता से कुछ अन्य पर्वतारोहियों का पता लगाया गया है, लेकिन खराब मौसम के कारण उनकी स्थिति की पुष्टि नहीं हो सकी।
अधिकारियों ने बताया कि मौसम अनुकूल होने पर शनिवार को बचाव अभियान दोबारा शुरू किया जाएगा।
जीवित बचने की संभावना बेहद कम
पाकिस्तान अल्पाइन क्लब की कम्यूनिकेशन लीड नैला कियानी ने कहा कि इतनी कठिन परिस्थितियों में 24 घंटे से अधिक समय तक जीवित बचने की संभावना बेहद कम होती है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि किसी चमत्कार की संभावना से पूरी तरह इनकार नहीं किया जा सकता।
सेना भी बचाव अभियान में शामिल
रेस्क्यू अभियान के लिए पाकिस्तानी सेना ने दो हेलीकॉप्टर, विशेष बचाव दल और अत्याधुनिक उपकरण तैनात किए हैं, ताकि खराब मौसम के बावजूद लापता पर्वतारोहियों तक पहुंचा जा सके।
दुनिया की सबसे कठिन चोटियों में शामिल है ब्रॉड पीक
ब्रॉड पीक की ऊंचाई 8,047 मीटर है और इसे दुनिया की सबसे चुनौतीपूर्ण पर्वत चोटियों में गिना जाता है। यह विश्व की 12वीं सबसे ऊंची चोटी है। इस पर पहली सफल चढ़ाई 1957 में हुई थी। तब से यहां कई बड़े हादसों में दर्जनों पर्वतारोहियों की जान जा चुकी है।
गौरतलब है कि निर्मल पुर्जा ने वर्ष 2019 में दुनिया की 8,000 मीटर से अधिक ऊंचाई वाली सभी 14 चोटियों को मात्र साढ़े छह महीने में फतह कर विश्व रिकॉर्ड बनाया था।












