Delhi Protest: देश के लाखों युवाओं और छात्रों का भविष्य इन दिनों दिल्ली की सड़कों पर इंसाफ की गुहार लगा रहा है। नीट (NEET-UG) पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में हुई कथित धांधली के खिलाफ ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) का विरोध प्रदर्शन लगातार उग्र होता जा रहा है। सोमवार को हुए ‘संसद मार्च’ के बाद भी प्रदर्शनकारियों का जोश ठंडा नहीं हुआ है और वे अभी भी जंतर-मंतर पर डटे हुए हैं। उनकी सबसे बड़ी मांग है— केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा।
इस आंदोलन को तब और ज्यादा ताकत मिल गई जब देश के मशहूर शिक्षाविद् और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक (Sonam Wangchuk) छात्रों के समर्थन में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल (अनशन) पर बैठ गए। अनशन के कारण उनकी तबीयत बिगड़ी और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। लेकिन अब लगता है कि छात्रों की जिद और वांगचुक के अनशन ने सरकार को झुकने पर मजबूर कर दिया है।
केंद्र सरकार अब इस मामले को सुलझाने के लिए ‘बैकफुट’ पर आती दिख रही है। आज (बुधवार) सरकार और सीजेपी (CJP) के प्रतिनिधियों के बीच बातचीत का एक बहुत अहम दौर होने जा रहा है। आइए, एक दोस्त की तरह बिल्कुल आसान भाषा में समझते हैं कि आधी रात को अस्पताल में क्या हुआ, सरकार ने क्या मांग मान ली है और राहुल गांधी के प्रदर्शन का इस पर क्या असर पड़ा है।
क्या है ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) का आंदोलन?
‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) कोई राजनीतिक दल नहीं, बल्कि छात्रों और युवाओं का एक संगठन है, जो देश के एग्जामिनेशन सिस्टम (परीक्षा प्रणाली) में फैले भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ रहा है।
इन छात्रों का कहना है कि जब तक नीट (NEET) जैसी परीक्षाओं में हुई धांधली की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए शिक्षा मंत्री इस्तीफा नहीं देते और पूरे सिस्टम में सुधार नहीं होता, वे अपना प्रदर्शन खत्म नहीं करेंगे। इस आंदोलन में उन्हें विपक्षी पार्टियों और सोनम वांगचुक जैसे बड़े चेहरों का भी समर्थन मिल रहा है।
अस्पताल में सोनम वांगचुक: नड्डा और जितेंद्र सिंह की मुलाकात ने जगाई उम्मीद
सोनम वांगचुक लगातार भूख हड़ताल पर थे, जिसकी वजह से उनकी तबीयत बहुत ज्यादा खराब हो गई। दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश के बाद उन्हें सफदरजंग अस्पताल से ‘मेदांता अस्पताल’ (Medanta Hospital) में शिफ्ट किया गया।
सरकार भी जानती है कि वांगचुक जैसे राष्ट्रीय स्तर के व्यक्ति की जान खतरे में डालना कोई समझदारी नहीं है। इसलिए, मंगलवार की देर रात केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा (JP Nadda) और केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह खुद मेदांता अस्पताल पहुंचे। उन्होंने वांगचुक से मुलाकात की और छात्रों की मांगों पर विस्तार से चर्चा की।
सरकारी सूत्रों का कहना है कि वांगचुक के साथ हुई यह ‘आधी रात की बैठक’ काफी सकारात्मक (Positive) रही है। सरकार को अब पूरी उम्मीद है कि इस बातचीत से कोई ऐसा समाधान निकल आएगा जिससे यह लंबा गतिरोध (टकराव) खत्म हो जाए।
क्या मान गई सरकार? (संसद में चर्चा की बड़ी मांग)
छात्रों और सोनम वांगचुक की एक बहुत बड़ी मांग यह थी कि पूरे देश के युवाओं से जुड़े इस इतने बड़े मुद्दे पर ‘संसद में चर्चा’ (Discussion in Parliament) होनी चाहिए।
सूत्रों के मुताबिक, सरकार ने अब अपना रुख थोड़ा नरम किया है और वह इस मांग पर सहमत (राजी) हो गई है। सरकार का यह कदम इस बात का साफ संकेत है कि वे बातचीत के जरिए इस मामले को सुलझाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। सरकार ने पहले भी कहा था कि उनके दरवाजे बातचीत के लिए हमेशा खुले हैं। इसी कड़ी में आज (बुधवार) डॉ. जितेंद्र सिंह सीजेपी (CJP) के प्रतिनिधियों के साथ एक बहुत अहम बैठक करने जा रहे हैं, जिसमें ‘आगे का रास्ता’ तय किया जाएगा।
सड़क से संसद तक राहुल गांधी का ‘हल्लाबोल’
इस मुद्दे पर सिर्फ छात्र ही नहीं, बल्कि विपक्ष भी पूरी तरह से हमलावर है। मंगलवार को इस मामले ने एक नया राजनीतिक मोड़ ले लिया जब लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi), प्रियंका गांधी वाड्रा और विपक्ष के कई बड़े नेता छात्रों के समर्थन में सड़क पर उतर आए।
विपक्ष ने सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आवास (PM Awas) की ओर मार्च करने की कोशिश की। हालात को काबू में करने के लिए दिल्ली पुलिस ने राहुल गांधी और अन्य नेताओं को कुछ समय के लिए हिरासत (Detain) में भी ले लिया था, हालांकि बाद में उन्हें छोड़ दिया गया। इसके अलावा, संसद के मौजूदा मानसून सत्र (Monsoon Session) में भी विपक्ष लगातार ‘छात्र आंदोलन’ पर चर्चा की मांग को लेकर हंगामा कर रहा है।
आज की बैठक पर टिकी सबकी नजर
कई दिनों के भारी तनाव, लाठीचार्ज और अनशन के बाद अब यह मामला एक सकारात्मक मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है। आज (बुधवार, 22 जुलाई 2026) डॉ. जितेंद्र सिंह और सीजेपी प्रतिनिधियों के बीच होने वाली बैठक पर पूरे देश के छात्रों और मीडिया की नजरें टिकी हुई हैं। अगर सरकार सच में संसद में चर्चा कराने और शिक्षा प्रणाली में सुधार का ठोस भरोसा दे देती है, तो उम्मीद है कि वांगचुक अपना अनशन तोड़ देंगे और छात्र भी अपना प्रदर्शन वापस ले लेंगे। अब बस इस बात का इंतजार है कि आज की इस निर्णायक बैठक से क्या ‘गुड न्यूज़’ बाहर आती है।












