Delimitation Bill: परिसीमन विधेयक को लेकर डीएमके ने केंद्र सरकार के सामने तीन अहम शर्तें रखी हैं। जानिए लोकसभा सीटों, संविधान संशोधन और दक्षिणी राज्यों की चिंताओं पर क्या है पूरा मामला।
देश में परिसीमन (Delimitation) को लेकर राजनीतिक हलचल एक बार फिर तेज हो गई है। केंद्र सरकार नए परिसीमन विधेयक को संसद से पारित कराने के लिए विपक्षी दलों का समर्थन जुटाने की कोशिश में है। इसी बीच द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) ने संकेत दिए हैं कि यदि सरकार विधेयक में कुछ महत्वपूर्ण बदलाव करती है, तो पार्टी समर्थन देने पर विचार कर सकती है।
हालांकि, डीएमके के एक वरिष्ठ नेता का कहना है कि केंद्र सरकार ने अब तक पार्टी से इस मुद्दे पर औपचारिक संपर्क नहीं किया है।
क्या हैं डीएमके की तीन प्रमुख शर्तें?
रिपोर्ट के अनुसार, डीएमके ने परिसीमन विधेयक के समर्थन के लिए तीन अहम शर्तें सामने रखी हैं।
1. अगले 25 वर्षों तक लोकसभा सीटों की संख्या स्थिर रहे
डीएमके की पहली मांग है कि मौजूदा लोकसभा सीटों की संख्या में अगले 25 वर्षों तक कोई बदलाव न किया जाए।
पार्टी का तर्क है कि जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन करने वाले राज्यों को सीटों की संख्या घटने या राजनीतिक प्रतिनिधित्व कम होने का नुकसान नहीं होना चाहिए।
2. सभी राज्यों में 50% सीटों की समान बढ़ोतरी
डीएमके चाहती है कि संविधान में संशोधन कर देश के सभी राज्यों की लोकसभा सीटों में समान रूप से 50 प्रतिशत की वृद्धि की जाए।
पार्टी का कहना है कि इससे किसी एक क्षेत्र को नुकसान या अनुचित लाभ नहीं मिलेगा और राज्यों के बीच संतुलन बना रहेगा।
3. विधेयक में राज्यवार सीटों की सूची शामिल हो
डीएमके की तीसरी मांग है कि प्रस्तावित विधेयक में हर राज्य को मिलने वाली लोकसभा सीटों की स्पष्ट सूची शामिल की जाए।
पार्टी का मानना है कि इससे सभी राज्यों के सामने पूरी तस्वीर स्पष्ट होगी और भविष्य में किसी तरह का भ्रम नहीं रहेगा।
क्यों हो रहा है परिसीमन पर विवाद?
फिलहाल लोकसभा सीटों का निर्धारण 1971 की जनगणना के आधार पर लागू व्यवस्था के तहत है। यह व्यवस्था 2027 की जनगणना के बाद समाप्त होने वाली है।
दक्षिण भारत के कई राज्यों को आशंका है कि यदि नई जनसंख्या के आधार पर सीटों का पुनर्निर्धारण हुआ, तो उनकी लोकसभा में हिस्सेदारी कम हो सकती है। इन राज्यों का तर्क है कि उन्होंने जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन किया है, इसलिए उन्हें राजनीतिक प्रतिनिधित्व में नुकसान नहीं होना चाहिए।
अप्रैल में पेश हुआ था विधेयक
केंद्र सरकार ने अप्रैल में परिसीमन से संबंधित संविधान संशोधन विधेयक पेश करने की कोशिश की थी, लेकिन उसे पारित नहीं कराया जा सका।
उस दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने संसद में सभी राज्यों की सीटों में समान वृद्धि का आश्वासन दिया था। हालांकि, डीएमके अब चाहती है कि यह आश्वासन केवल मौखिक न रहे, बल्कि विधेयक का औपचारिक हिस्सा बनाया जाए।
अंतिम फैसला अभी बाकी
डीएमके ने स्पष्ट किया है कि वह विधेयक का अंतिम मसौदा देखने के बाद ही समर्थन पर अंतिम निर्णय लेगी। ऐसे में परिसीमन विधेयक को लेकर केंद्र और विपक्ष के बीच आगे और राजनीतिक बातचीत होने की संभावना है।











