NEET-UG की दोबारा परीक्षा की OMR शीट में गड़बड़ी का आरोप लगाने वाले 6 छात्रों को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिली। कोर्ट ने दिल्ली हाई कोर्ट जाने को कहा।
NEET-UG की दोबारा आयोजित परीक्षा की OMR शीट में कथित गड़बड़ी का आरोप लगाने वाले छह छात्रों को सुप्रीम कोर्ट से तत्काल राहत नहीं मिली है। बुशरा नईम समेत छह अभ्यर्थियों की याचिका पर सीधे सुनवाई करने से सुप्रीम कोर्ट ने इनकार कर दिया और उन्हें दिल्ली हाई कोर्ट जाने की अनुमति दी।
छात्रों ने आरोप लगाया था कि परीक्षा के दौरान उन्होंने OMR शीट में जिन विकल्पों को चुना था, NTA पोर्टल पर उपलब्ध कराई गई OMR की कॉपी में अलग जवाब दर्ज दिखाई दे रहे हैं। छात्रों का दावा है कि अगर उनकी ओर से चुने गए उत्तर सही तरीके से दर्ज किए गए होते तो उनके अंक 600 या 650 से अधिक हो सकते थे।
सुप्रीम कोर्ट ने क्यों नहीं सुनी याचिका?
जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट पहले से ही NEET से जुड़े व्यापक मुद्दों पर सुनवाई कर रहा है। इसमें नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) में सुधार जैसे मुद्दे भी शामिल हैं।
पीठ के मुताबिक, मौजूदा याचिका में छात्रों की व्यक्तिगत शिकायतों को उठाया गया है। ऐसे मामलों की सीधे सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई करना उचित नहीं होगा।
अदालत ने यह भी ध्यान दिलाया कि कुछ हाई कोर्ट पहले से ही OMR से संबंधित शिकायतों पर सुनवाई कर रहे हैं। ऐसे में प्रभावित छात्रों के लिए संबंधित हाई कोर्ट का रुख करना उचित होगा।
छात्रों को दिल्ली हाई कोर्ट जाने की अनुमति
छात्रों की ओर से पेश वकील संजीव मल्होत्रा ने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता अलग-अलग राज्यों से हैं। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने सभी छात्रों को दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दाखिल करने की अनुमति दे दी।
वकील ने अदालत से यह भी अनुरोध किया कि चूंकि NEET की काउंसलिंग शुरू हो चुकी है, इसलिए हाई कोर्ट को मामले की जल्द सुनवाई के लिए निर्देश दिया जाए।
इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पहले हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की जाए। अदालत ने उम्मीद जताई कि हाई कोर्ट मामले को यथासंभव शीघ्र सुनेगा।
छात्रों की क्या है मांग?
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि NTA पोर्टल पर उपलब्ध OMR शीट की कॉपी में दर्ज उत्तर उनके द्वारा परीक्षा हॉल में चुने गए विकल्पों से मेल नहीं खाते।
छात्र चाहते हैं कि:
- उनकी वास्तविक OMR शीट उपलब्ध कराई जाए।
- OMR में दर्ज उत्तरों की स्वतंत्र रूप से जांच हो।
- कथित गड़बड़ी सामने आने पर उनके अंकों का दोबारा मूल्यांकन किया जाए।
- काउंसलिंग प्रक्रिया के बीच मामले का जल्द निपटारा किया जाए।
काउंसलिंग शुरू होने से बढ़ी चिंता
छात्रों के लिए सबसे बड़ी चिंता यह है कि NEET-UG की काउंसलिंग प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। ऐसे में यदि OMR और अंकों से जुड़ी शिकायतों का समाधान समय पर नहीं होता है तो इसका असर उनकी सीट और कॉलेज चयन की प्रक्रिया पर पड़ सकता है।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने छात्रों की शिकायत को खारिज नहीं किया है। अदालत ने सिर्फ इतना कहा है कि इस तरह की व्यक्तिगत शिकायतों की सुनवाई के लिए पहले हाई कोर्ट का रास्ता अपनाया जाना चाहिए।
अब इन छह छात्रों की अगली कानूनी लड़ाई दिल्ली हाई कोर्ट में होगी, जहां वे अपनी OMR शीट और अंकों से जुड़ी शिकायतों पर राहत मांग सकते हैं।










