Political Update: देश की राजनीति में इन दिनों एक खास ‘नंबर गेम’ की बहुत चर्चा हो रही है। जब भी केंद्र सरकार को देश में कोई बहुत बड़ा बदलाव करना होता है— जैसे कोई नया और अहम संवैधानिक संशोधन (Constitutional Amendment) बिल पास कराना, तो इसके लिए संसद के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) में आम बहुमत नहीं, बल्कि ‘दो-तिहाई’ (Two-Thirds) बहुमत की जरूरत पड़ती है।
मौजूदा समय में, भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाला राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) इसी दो-तिहाई के जादुई आंकड़े को हासिल करने की पूरी कोशिश में जुटा है। ताजा राजनीतिक हलचलों और पश्चिम बंगाल की तृणमूल कांग्रेस (TMC) में मची बगावत के बाद, समीकरण काफी तेजी से बदल रहे हैं। आइए, एक दोस्त की तरह बिल्कुल आसान भाषा में समझते हैं कि राज्यसभा और लोकसभा में एनडीए के पास अभी कितने सांसद हैं और यह जादुई आंकड़ा छूने के लिए उन्हें और कितने नंबर चाहिए।
संविधान संशोधन के लिए क्यों चाहिए दो-तिहाई बहुमत?
किसी भी साधारण बिल को पास कराने के लिए आधे से एक ज्यादा वोट चाहिए होता है, लेकिन जब बात देश के संविधान में बदलाव करने की आती है, तो नियम सख्त हो जाते हैं। इसके लिए दोनों सदनों में उपस्थित सदस्यों का दो-तिहाई समर्थन अनिवार्य होता है। यही वजह है कि एनडीए सरकार अपने सांसदों की संख्या बढ़ाने के लिए हर राजनीतिक दांव खेल रही है।
राज्यसभा का गणित: कैसे जादुई आंकड़े के करीब पहुंच रहा है NDA?
अगर हम उच्च सदन यानी राज्यसभा की बात करें, तो यहाँ एनडीए की स्थिति काफी मजबूत होती दिख रही है।
मौजूदा स्थिति: फिलहाल राज्यसभा में एनडीए के पास 148 सांसद हैं।
कैसे बढ़ेंगे नंबर: सूत्रों की मानें तो झारखंड और मिजोरम में जो राज्यसभा चुनाव हो रहे हैं, वहां से निर्दलीय उम्मीदवारों के जीतने की उम्मीद है, जो एनडीए के खाते में 3 सीटें और जोड़ सकते हैं।
टीएमसी की बगावत का फायदा: पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के तीन राज्यसभा सांसदों ने हाल ही में इस्तीफा दे दिया है। जब इन सीटों पर उपचुनाव (Bypolls) होंगे, तो पूरी उम्मीद है कि ये तीनों सीटें एनडीए जीत लेगी। ऐसा होने पर एनडीए का आंकड़ा 154 पहुंच जाएगा।
जादुई आंकड़ा: राज्यसभा में दो-तिहाई बहुमत के लिए 163 सांसदों की जरूरत है। अगर टीएमसी के कुछ और सांसद इस्तीफा देते हैं, तो एनडीए आसानी से 163 का आंकड़ा छू सकता है।
नवंबर का ‘ब्रेकर’: अखिलेश यादव कैसे बढ़ा सकते हैं टेंशन?
भले ही एनडीए अभी राज्यसभा में मजबूत दिख रहा हो, लेकिन इसी साल नवंबर में उनके सामने एक छोटी सी रुकावट आ सकती है।
नवंबर में उत्तर प्रदेश से राज्यसभा के 10 सांसदों का कार्यकाल (Term) खत्म हो रहा है। हम सभी जानते हैं कि यूपी विधानसभा में अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी (SP) के पास अब पहले से कहीं ज्यादा विधायक हैं। विधायकों की संख्या अच्छी होने के कारण, समाजवादी पार्टी यूपी से राज्यसभा की कुछ सीटें आसानी से जीत सकती है। इससे उच्च सदन में एनडीए के नंबरों पर थोड़ा असर पड़ सकता है।
विपक्ष (INDIA) का क्या हाल है? (BJD और YSRCP की भूमिका)
अब एक नजर विपक्ष पर भी डाल लेते हैं। विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया ब्लॉक’ (INDIA Bloc) की हालत राज्यसभा में थोड़ी कमजोर हो गई है। उनके पास अब सिर्फ 64 सांसद ही बचे हैं।
इसका कारण यह है कि एमके स्टालिन की पार्टी द्रमुक (DMK) के 8 सांसद और अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी (AAP) के 3 सांसदों ने इस गठबंधन से थोड़ी दूरी बना ली है।
इसके अलावा, नवीन पटनायक की पार्टी ‘बीजद’ (BJD) के पास 6 सीटें और जगन मोहन रेड्डी की ‘वाईएसआर कांग्रेस’ (YSRCP) के पास 7 सीटें हैं। ये दोनों पार्टियां किसी भी गठबंधन में नहीं हैं। जब भी कोई बड़ा बिल आता है, तो ये अपने फायदे के हिसाब से किसी भी तरफ (सत्ता या विपक्ष) वोट कर सकती हैं।
लोकसभा में असली पेंच: 363 के आंकड़े से अभी भी बहुत दूर
एनडीए राज्यसभा में तो अपने लक्ष्य के करीब है, लेकिन निचला सदन यानी लोकसभा (Lok Sabha) की कहानी बिल्कुल अलग है।
संविधान संशोधन बिल पास कराने के लिए लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत यानी 363 सांसदों की जरूरत होती है।
हाल ही में खबर आई थी कि तृणमूल कांग्रेस (TMC) के करीब 20 बागी सांसद एक अलग गुट बनाकर एनडीए को अपना समर्थन दे सकते हैं। लेकिन अगर हम गणित लगाएं, तो इन 20 सांसदों के समर्थन के बावजूद लोकसभा में एनडीए का कुल आंकड़ा 312 तक ही पहुंचेगा। जो कि 363 के जादुई आंकड़े से अभी भी 51 कदम पीछे है।
कुल मिलाकर देश की राजनीति में ‘नंबर्स’ ही सब कुछ तय करते हैं। राज्यसभा में एनडीए अपने राजनीतिक कौशल और टीएमसी की बगावत के सहारे दो-तिहाई बहुमत हासिल करने के बिल्कुल दरवाजे पर खड़ा है। लेकिन लोकसभा में यह रास्ता अभी भी काफी लंबा और मुश्किल है। अब देखना यह दिलचस्प होगा कि क्या सरकार आने वाले समय में कुछ और विपक्षी सांसदों को अपने पाले में लाने में कामयाब हो पाती है या नहीं।













