UP Politics: उत्तर प्रदेश की राजनीति में राम मंदिर का मुद्दा हमेशा से केंद्र में रहा है। लेकिन जब से राम मंदिर के चढ़ावे और चंदे में कथित चोरी की बातें सामने आई हैं, तब से सियासत में एक नया भूचाल आ गया है। इस मुद्दे पर अब धर्मगुरु भी खुलकर अपनी बात रख रहे हैं।
इन दिनों गौ-रक्षा को लेकर पूरे प्रदेश की यात्रा कर रहे ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती गोंडा पहुंचे। वहां उन्होंने मीडिया से बातचीत में जो खुलासे किए और जिस तरह से सीधे तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर निशाना साधा, उसने सबको हैरान कर दिया है। आइए, एक दोस्त की तरह बिल्कुल आसान भाषा में समझते हैं कि शंकराचार्य ने चंपत राय के इस्तीफे, बाबा बागेश्वर की पर्ची और सीएम योगी को लेकर क्या-क्या बड़े दावे किए हैं।
‘चंपत राय का इस्तीफा सिर्फ एक झूठ है’: क्या है इसके पीछे का रहस्य?
राम मंदिर चंदा चोरी का मामला सामने आने के बाद से यह खबर सुर्खियों में थी कि ‘श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट’ के महासचिव चंपत राय ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।
लेकिन, शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने इस खबर को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने बहुत ही बेबाक अंदाज में कहा कि चंपत राय ने कोई इस्तीफा नहीं दिया है, यह सिर्फ जनता के बीच झूठ फैलाकर एक ‘माहौल’ बनाया जा रहा है।
शंकराचार्य ने सवाल उठाया कि अगर जांच रिपोर्ट पब्लिक डोमेन (जनता के सामने) में आ सकती है, तो फिर चंपत राय का इस्तीफा क्यों नहीं दिखाया जा रहा? उन्होंने आरोप लगाया कि चंपत राय आज भी वहीं बैठे हैं और अपना काम कर रहे हैं।
कौन बचा रहा है?
शंकराचार्य ने सीधा आरोप लगाते हुए कहा कि चंपत राय को कोई और नहीं, बल्कि खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बचा रहे हैं। उन्होंने तर्क दिया कि पीएम मोदी ने ही उन्हें उस पद पर बिठाया था। चंपत राय उनके लिए बहुत ‘उपयोगी’ हैं और वे उनके इशारे पर काम करते हैं। इसलिए, अपना फायदा लेने के लिए उन्हें बचाया जा रहा है।
बाबा बागेश्वर की ‘पर्ची’ और डर का माहौल
राम मंदिर चंदा चोरी के मामले में जब बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री (बाबा बागेश्वर) से पूछा गया था कि क्या वे इस पर कोई पर्ची निकालेंगे? तो उनका जवाब था कि अगर उन्होंने पर्ची निकाली, तो उनका भी वहां रह पाना मुश्किल हो जाएगा।
इस बात का जिक्र करते हुए शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि बाबा बागेश्वर का यह बयान बहुत ही ईमानदार और नपा-तुला था। उन्होंने एक ही लाइन में सिस्टम की पूरी सच्चाई बयां कर दी।
शंकराचार्य ने कहा कि जो व्यक्ति (बाबा बागेश्वर) खुद को मंच पर प्रधानमंत्री के ‘छोटे भाई’ की तरह पेश करता है, अगर उसके मन में भी इतना डर है कि सच बोलने पर उसका जीना मुश्किल हो जाएगा, तो फिर एक आम आदमी की क्या बिसात है? उन्होंने कहा कि यह ‘भय का शासन’ है, जो देश और समाज के लिए बहुत खराब है।
डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक के तंज का जवाब और सीएम योगी पर ‘कालनेमि’ वाला प्रहार
यह राजनीतिक खींचतान सिर्फ दिल्ली तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसमें यूपी सरकार की भी एंट्री हो गई। कुछ समय पहले यूपी के डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने शंकराचार्य पर तंज कसते हुए कहा था कि कुछ लोग ‘भगवा चोला पहनकर राजनीति’ कर रहे हैं।
गोंडा में जब पत्रकारों ने शंकराचार्य से इस पर सवाल पूछा, तो उन्होंने इसका करारा जवाब दिया। शंकराचार्य ने कहा कि ब्रजेश पाठक का यह बयान असल में मेरे लिए नहीं, बल्कि खुद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के लिए है।
अपनी बात को और तीखा करते हुए शंकराचार्य ने सीएम योगी की तुलना रामायण के ‘कालनेमि’ राक्षस से कर दी। (बता दें कि रामायण में कालनेमि वह मायावी राक्षस था जिसने हनुमान जी को रोकने के लिए साधु का रूप धरा था)। शंकराचार्य ने कहा, “कालनेमि वही होता है जो बाहर से कुछ और दिखता है और अंदर से कुछ और होता है।”
गौ-रक्षा और चंदे का खेल: क्या है असली हकीकत?
शंकराचार्य अपनी गौ-रक्षा यात्रा के जरिए सड़कों पर उतरे हुए हैं। उन्होंने गौ हत्या के मुद्दे पर भी सरकार को आड़े हाथों लिया।
उन्होंने सीधा आरोप लगाया कि प्रदेश में गौ हत्याएं वही लोग करवा रहे हैं जो बड़े-बड़े स्लाटर हाउस (कत्लखानों) से चंदा वसूलते हैं। उनका इशारा चुनावी चंदे की तरफ था। उन्होंने साफ कहा कि कोई भी सच्चा संन्यासी या गेरुआ वस्त्र धारण करने वाला व्यक्ति ऐसा काम नहीं कर सकता।
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के ये बयान इस बात का साफ इशारा हैं कि राम मंदिर के चंदे को लेकर उठा विवाद अभी आसानी से शांत होने वाला नहीं है। जब देश के बड़े साधु-संत सीधे तौर पर पीएम और सीएम पर ‘सिस्टम को बचाने’ और ‘डर का माहौल’ बनाने का आरोप लगाने लगें, तो आम जनता के मन में भी सवाल उठना लाजमी है। अब देखना यह है कि बीजेपी और ट्रस्ट के लोग इन गंभीर आरोपों का क्या और कैसे जवाब देते हैं।











