पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) में एक बड़ा राजनीतिक संकट खड़ा हो गया है। पार्टी के 20 लोकसभा सांसद बगावत पर उतर आए हैं और संसद में अपना एक अलग गुट बनाने की तैयारी कर रहे हैं। इस बगावत के बीच दिल्ली में जबरदस्त राजनीतिक गतिविधियां देखने को मिल रही हैं, जहां टीएमसी के 14 बागी लोकसभा सांसदों ने पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात की है। यह मुलाकात बीजेपी के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के दिल्ली स्थित आवास पर हुई है।
पार्टी में टूट और नए गुट के गठन को लेकर दिल्ली में सरगर्मियां बेहद तेज हैं। बागी सांसद जल्द ही इस फैसले की जानकारी लोकसभा स्पीकर को सौंपने वाले हैं। हालांकि, लोकसभा स्पीकर इस समय दिल्ली में मौजूद नहीं हैं और वह चंडीगढ़ में हैं।
लोकसभा में तृणमूल कांग्रेस के पास कुल 28 सांसद हैं। दल-बदल विरोधी कानून या संवैधानिक रूप से विभाजन को मान्यता दिलाने के लिए कम से कम दो-तिहाई सांसदों का साथ होना जरूरी है। 28 सांसदों के हिसाब से यह जादुई आंकड़ा 19 सांसदों का होता है। बागी गुट का दावा है कि उनके साथ 20 सांसद मौजूद हैं, जो कानूनी तौर पर नया गुट बनाने के लिए पर्याप्त संख्या है।
अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व को चुनौती, काकोली घोष को नेता बनाने की मांग
इन बागी सांसदों ने पार्टी नेतृत्व के सामने एक बड़ी शर्त रख दी है। बागी सांसदों का कहना है कि वे लोकसभा में अपने नेता के रूप में अभिषेक बनर्जी को स्वीकार नहीं करना चाहते। इसके बजाय वे काकोली घोष को लोकसभा में अपना नेता बनाना चाहते हैं।
इस सिलसिले में सोमवार सुबह से ही केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के घर पर टीएमसी के पांच बागी सांसद मौजूद थे। इन सांसदों में:
शर्मिला सरकार (बर्दमान पूर्व से सांसद)
प्रसून बनर्जी (हावड़ा से सांसद)
जगदीश बसुनिया (कूचबिहार से सांसद)
कालिपद सोरेन (झारग्राम से सांसद)
अरूप चक्रवर्ती (बांकुरा से सांसद) शामिल हैं।
दोपहर 12:00 बजे के बाद पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी भी भूपेंद्र यादव के घर पहुंचे, जहां उन्होंने इन सांसदों से मुलाकात की। धीरे-धीरे मुलाकात करने वाले सांसदों की संख्या 14 तक पहुंच गई। इस बैठक में बीजेपी नेता और त्रिपुरा के पूर्व मुख्यमंत्री बिप्लब देब भी मौजूद रहे। दोपहर 2:00 बजे के बाद मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी वहां से रवाना हुए। इसके बाद बागी सांसदों ने शाम 6:30 बजे टीएमसी सांसद शताब्दी राय के घर पर एक और अहम बैठक बुलाई है।
राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर रॉय का इस्तीफा और दिल्ली में बैठकें
इस राजनीतिक उथल-पुथल की शुरुआत सोमवार को राज्यसभा के वरिष्ठ सांसद सुखेंदु शेखर रॉय के इस्तीफे के साथ हुई। उन्होंने राज्यसभा सदस्य और तृणमूल कांग्रेस पार्टी, दोनों ही पदों से अपना इस्तीफा सौंप दिया। सुखेंदु शेखर रॉय एक दशक से भी अधिक समय से राज्यसभा में पार्टी का प्रतिनिधित्व कर रहे थे।
उनके इस्तीफे के तुरंत बाद टीएमसी के पांच सांसद (शर्मिला सरकार, प्रसून बनर्जी, जगदीश बसुनिया, कालिपद सोरेन और अरूप चक्रवर्ती) दिल्ली में उनसे मिलने पहुंचे थे। इस मुलाकात ने पार्टी के भीतर चल रही बगावत की अटकलों को और हवा दे दी थी।
पार्टी के बिखरने की यह प्रक्रिया केवल लोकसभा तक सीमित नहीं है। राज्यसभा में भी पार्टी की स्थिति कमजोर हो रही है, जहां टीएमसी के 13 सांसद थे, जिनमें से सुखेंदु शेखर रॉय ने इस्तीफा दे दिया है। इसके साथ ही, बांग्ला फिल्मों की लोकप्रिय अभिनेत्री कोयल मल्लिक के भी पार्टी छोड़ने की अफवाहें और अटकलें काफी तेज हो चुकी हैं।
बंगाल से लेकर दिल्ली तक सियासी सरगर्मी तेज
इस बड़ी बगावत के वक्त तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी दिल्ली में ही मौजूद हैं। ममता बनर्जी विपक्षी दलों के ‘इंडिया’ (INDIA) ब्लॉक की बैठक में हिस्सा लेने दिल्ली आई हैं। दिल्ली में सोनिया गांधी और ममता बनर्जी के बीच बेहद गर्मजोशी भरी मुलाकात भी हुई है, लेकिन दूसरी तरफ दिल्ली में ही उनकी पार्टी के सांसद बगावत की पटकथा लिख रहे हैं।
पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में भी हलचल देखी जा रही है। ममता बनर्जी के बेहद करीबी माने जाने वाले और कोलकाता के पूर्व मेयर फिरहाद हकीम ने विधानसभा में बागी विधायकों के नेता और नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत बनर्जी से मुलाकात की। हालांकि, फिरहाद हकीम ने इस मुलाकात को केवल एक शिष्टाचार भेंट करार दिया है। फिरहाद हकीम ने कुछ ही दिन पहले कोलकाता के मेयर पद से इस्तीफा दिया है।
इस पूरे सियासी संकट पर प्रतिक्रिया देते हुए नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत बनर्जी ने कहा है कि उन्होंने कई विधायकों से बात की है और वह सुखेंदु शेखर रॉय की बातों से सहमत हैं। ऋतब्रत बनर्जी ने कहा, “यह सिर्फ सुखेंदु की बात नहीं है। संसद कोई क्विज शो की जगह नहीं है। सुखेंदु जो बता रहे हैं, उसका अनुभव मैंने खुद किया है। उनके जैसे बड़े कद के सांसद को पिछली कतार में धकेल दिया जाना बेहद निराशाजनक था। आज सुखेंदु ने आवाज उठाई है, कल दूसरे भी ऐसा ही करेंगे।”
FAQ:
प्रश्न 1: तृणमूल कांग्रेस (TMC) में संवैधानिक रूप से नया गुट या विभाजन करने के लिए कितने सांसदों की जरूरत है?
उत्तर: लोकसभा में टीएमसी के कुल 28 सांसद हैं। दल-बदल कानून के तहत पार्टी में विभाजन को मान्यता दिलाने के लिए कम से कम दो-तिहाई (यानी 19 सांसदों) का एक साथ आना जरूरी है। बागी गुट का दावा है कि उनके साथ वर्तमान में 20 सांसद हैं।
प्रश्न 2: बागी सांसद लोकसभा में किसके नेतृत्व का विरोध कर रहे हैं और किसे अपना नया नेता चाहते हैं?
उत्तर: बागी सांसद लोकसभा में अभिषेक बनर्जी के बजाय काकोली घोष को अपना नया संसदीय दल का नेता बनाना चाहते हैं।
प्रश्न 3: राज्यसभा से किस वरिष्ठ सांसद ने इस्तीफा दिया है और उनके इस्तीफे के बाद क्या हुआ?
उत्तर: टीएमसी के सबसे पुराने राज्यसभा सांसदों में से एक, सुखेंदु शेखर रॉय ने सांसद और पार्टी दोनों पदों से इस्तीफा दे दिया है। उनके इस्तीफे के तुरंत बाद टीएमसी के 5 सांसदों ने दिल्ली में उनसे मुलाकात की।










