Pilibhit Murder Case: आज के समय में हर माता-पिता अपने बच्चों को एक अच्छे भविष्य की उम्मीद के साथ घर से बाहर पढ़ने भेजते हैं। लेकिन जब किसी कॉलेज या अस्पताल जैसी सुरक्षित मानी जाने वाली जगह से कोई दुखद खबर आती है, तो हर किसी का दिल सहम जाता है।
उत्तर प्रदेश के पीलीभीत से एक ऐसा ही परेशान करने वाला मामला सामने आया है। यहां जिला अस्पताल के सीटी स्कैन रूम में एक 20 साल की होनहार पैरामेडिकल छात्रा, कशिश पटेल की उसी के क्लासमेट (सहपाठी) ने चाकू मारकर हत्या कर दी। इस घटना ने एक तरफ जहां ‘एकतरफा प्यार’ के खतरनाक अंजाम को दिखाया है, वहीं दूसरी तरफ कॉलेज प्रशासन की लापरवाही पर भी बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। आइए, एक दोस्त की तरह बिल्कुल आसान भाषा में समझते हैं कि मंगलवार की सुबह अस्पताल में क्या हुआ था और पुलिस की जांच में अब तक क्या-क्या खुलासे हुए हैं।
क्या है पूरा मामला? (अस्पताल के सीटी स्कैन रूम की घटना)
यह घटना मंगलवार सुबह की है। बरेली के भुता क्षेत्र (गांव केसरपुर) की रहने वाली 20 वर्षीय कशिश पटेल पीलीभीत मेडिकल कॉलेज में सीटी स्कैन कोर्स के प्रथम वर्ष की छात्रा थी। रोज की तरह वह मंगलवार सुबह जिला अस्पताल के सीटी स्कैन रूम में अपनी ट्रेनिंग के लिए आई थी।
तभी वहां कानपुर का रहने वाला उसका क्लासमेट सागर सिंह आ गया। उसने अपने बैग से चाकू निकाला और कशिश पर ताबड़तोड़ हमला कर दिया। कशिश की चीख सुनकर अस्पताल की एक नर्स, निधि, उसे बचाने दौड़ीं। लेकिन सिरफिरे सागर ने निधि पर भी हमला कर दिया, जिससे उनके हाथ में चोट आ गई। हमले के तुरंत बाद अस्पताल के सुरक्षाकर्मियों ने सागर को पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया। बुरी तरह घायल कशिश को तुरंत बरेली के एक प्राइवेट अस्पताल ले जाया गया, लेकिन बदकिस्मती से डॉक्टर उसकी जान नहीं बचा सके।
कैसे और क्यों रची गई हत्या की साजिश?
जब पुलिस ने आरोपी सागर सिंह से पूछताछ की, तो उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया। उसके बयान से जो कहानी सामने आई, वह बताती है कि कैसे एकतरफा जुनून किसी की जान ले सकता है।
सागर ने पुलिस को बताया कि वह कशिश से प्यार करता था। लेकिन, पिछले करीब दो महीने से कशिश ने उससे बातचीत बिल्कुल बंद कर दी थी। वह लगातार सागर को नजरअंदाज (Ignore) कर रही थी। कशिश की इसी खामोशी से सागर के अंदर इतना ज्यादा गुस्सा भर गया कि उसने उसे मारने का फैसला कर लिया। पुलिस के मुताबिक, सागर ने सोमवार को बाजार से 12 इंच लंबा एक चाकू खरीदा। मंगलवार की सुबह वह उसी चाकू को अपने बैग में छिपाकर अस्पताल पहुंचा था और बातचीत के बहाने उसने इस खौफनाक वारदात को अंजाम दिया।
कॉलेज प्रशासन पर परिवार ने उठाए गंभीर सवाल
इस घटना के बाद कशिश का परिवार पूरी तरह टूट चुका है। बुधवार को कशिश के चाचा विकास पटेल और अन्य रिश्तेदार पीलीभीत के डीएम (DM) ज्ञानेंद्र सिंह और एसपी सुकीर्ति माधव से मिलने कलेक्ट्रेट पहुंचे।
परिजनों ने एक बहुत ही गंभीर बात बताई है। उनका आरोप है कि सागर सिंह काफी समय से कशिश को परेशान कर रहा था। कशिश ने उसकी इन हरकतों से तंग आकर कॉलेज की प्रिंसिपल (प्राचार्य) को एक लिखित शिकायत भी दी थी। परिवार का कहना है कि कॉलेज प्रशासन ने इस शिकायत को दबा दिया और कोई सख्त कदम नहीं उठाया। अगर समय रहते सागर पर कार्रवाई की गई होती, तो शायद उसके हौसले इतने नहीं बढ़ते और आज कशिश जिंदा होती। परिवार ने मांग की है कि इस मामले को फास्ट ट्रैक कोर्ट (Fast Track Court) में चलाकर आरोपी को फांसी की सजा दी जाए।
पुलिस की अब तक की कार्रवाई
पीलीभीत पुलिस ने इस मामले में तुरंत एक्शन लिया है। कशिश के पिता रोहिताश कुमार की शिकायत पर हत्या की एफआईआर (FIR) दर्ज कर ली गई है।
सीओ सिटी अमरनाथ वर्मा ने बताया कि पुलिस ने हत्या में इस्तेमाल किया गया 12 इंच का चाकू, आरोपी का बैग और घटनास्थल से खून के सैंपल सील कर लिए हैं। बुधवार को कड़ी सुरक्षा के बीच आरोपी सागर सिंह का मेडिकल कराया गया और उसे कोर्ट में पेश करके जेल (न्यायिक हिरासत) भेज दिया गया है। पुलिस अब वहां लगे सीसीटीवी (CCTV) फुटेज और गवाहों के बयानों के आधार पर अपनी चार्जशीट तैयार कर रही है ताकि कोर्ट में मजबूत सबूत पेश किए जा सकें।
ऐसी घटनाओं से कैसे बचें? (युवाओं और परिजनों के लिए सलाह)
यह घटना समाज और युवाओं के लिए एक बहुत बड़ा सबक है। अगर आप स्कूल, कॉलेज या ऑफिस में हैं और कोई आपको परेशान (Stalk) कर रहा है, तो:
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चुप न रहें: सबसे पहले अपने माता-पिता या किसी भरोसेमंद दोस्त को इसके बारे में जरूर बताएं।
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शिकायत दर्ज कराएं: कॉलेज प्रशासन या पुलिस (जैसे महिला हेल्पलाइन 1090) की मदद लेने में संकोच न करें।
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प्रशासन की जिम्मेदारी: स्कूल और कॉलेजों को भी चाहिए कि वे छात्रों की किसी भी शिकायत (खासकर छेड़छाड़ या उत्पीड़न) को हल्के में न लें और तुरंत एक्शन लें।
कशिश पटेल एक होनहार छात्रा थी, जो अपने भविष्य के सपने लेकर पीलीभीत आई थी, लेकिन एक सिरफिरे के गुस्से ने सब कुछ खत्म कर दिया। अब प्रशासन की जिम्मेदारी है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच हो, कॉलेज की कथित लापरवाही का सच सामने आए और पीड़ित परिवार को जल्द से जल्द न्याय मिले।











