Sonam Wangchuk Hunger Strike: दिल्ली का जंतर-मंतर इन दिनों शिक्षा सुधार और छात्रों के अधिकारों को लेकर चल रहे एक बड़े आंदोलन का गवाह बन रहा है। इस आंदोलन का चेहरा बने हैं देश के जाने-माने सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षाविद् सोनम वांगचुक (Sonam Wangchuk)।
आज (गुरुवार) उनके अनिश्चितकालीन अनशन को पूरे 19 दिन हो चुके हैं। बिना कुछ खाए-पिए लगातार 19 दिनों तक बैठे रहने से उनकी शारीरिक हालत काफी कमजोर हो गई है। लेकिन, शरीर भले ही कमजोर हो रहा हो, वांगचुक का हौसला आज भी चट्टान की तरह मजबूत है। उन्होंने अपने समर्थकों को साफ संदेश दे दिया है कि वे अनशन नहीं तोड़ेंगे, बल्कि 20 जुलाई को एक बड़ा मार्च निकालने जा रहे हैं। आइए, एक दोस्त की तरह बिल्कुल आसान भाषा में समझते हैं कि इस समय जंतर-मंतर पर क्या हालात हैं, वांगचुक की मेडिकल रिपोर्ट क्या कहती है और 20 जुलाई का उनका प्लान क्या है।
19 दिन बाद कैसी है सोनम वांगचुक की सेहत? (मेडिकल रिपोर्ट)
जब कोई 59 साल का व्यक्ति 19 दिनों तक सिर्फ पानी के सहारे रहे, तो शरीर पर इसका गहरा असर पड़ना लाजिमी है। जंतर-मंतर पर डॉक्टरों की एक टीम 24 घंटे उनकी निगरानी कर रही है।
ताजा मेडिकल बुलेटिन के अनुसार:
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वजन (Weight): अनशन शुरू होने से लेकर अब तक वांगचुक का वजन करीब 8.9 किलोग्राम (लगभग 9 किलो) कम हो चुका है। पिछले 24 घंटों में ही उनका वजन 400 ग्राम गिरा है। फिलहाल उनका वजन 57.15 किलो दर्ज किया गया है।
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ब्लड प्रेशर और शुगर: उनका ब्लड प्रेशर 105/76 mmHg और ब्लड शुगर 80 mg/dL पर आ गया है।
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ऑक्सीजन लेवल: राहत की बात यह है कि उनका ऑक्सीजन लेवल 97 प्रतिशत है, जो कि सामान्य है।
डॉक्टरों का कहना है कि शारीरिक रूप से वे काफी कमजोर हो गए हैं, लेकिन मानसिक रूप से वे अभी भी पूरी तरह अलर्ट और सचेत (Active) हैं।
वांगचुक का वीडियो संदेश: ‘अनशन तोड़ने को मत कहो, 20 जुलाई को संसद चलो’
अपनी बिगड़ती सेहत को लेकर चिंतित लोगों और समर्थकों के लिए सोनम वांगचुक ने बुधवार देर रात एक वीडियो संदेश जारी किया।
इस वीडियो में उन्होंने बहुत ही साफ शब्दों में कहा, “मैं पूरी तरह से ठीक तो नहीं हूं, लेकिन मेरी स्थिति इतनी भी खराब नहीं है।” उन्होंने अपने शुभचिंतकों से एक भावुक अपील करते हुए कहा कि लोग उनसे अनशन खत्म करने की गुजारिश न करें। वांगचुक ने कहा कि अगर लोग सच में उनके इस आंदोलन का समर्थन करना चाहते हैं, तो वे 20 जुलाई 2026 को होने वाले शांतिपूर्ण “चलो संसद” (Chalo Sansad) मार्च में शामिल होकर अपनी आवाज सरकार तक पहुंचाएं।
वांगचुक अकेले नहीं, छात्रों की भी बिगड़ रही है तबीयत
आपको बता दें कि जंतर-मंतर पर सोनम वांगचुक इस लड़ाई में अकेले नहीं हैं। देश की शिक्षा व्यवस्था में सुधार की इस मांग को लेकर ‘ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन’ (AISA) के कई छात्र नेता भी उनके साथ भूख हड़ताल पर बैठे हैं।
AISA के मंच पर नेहा, मनीष और आमीन जैसे छात्र लगातार अनशन कर रहे हैं। इतने दिनों से भूखे रहने के कारण इन छात्रों का वजन भी तेजी से गिर रहा है।
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नेहा का वजन लगभग 5.85 किलोग्राम कम हो गया है।
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मनीष और आमीन का वजन 8.2 और 8.3 किलोग्राम तक गिर चुका है।
इन सभी युवाओं का ब्लड शुगर लेवल भी सामान्य से नीचे चला गया है, जो एक चिंता का विषय है।
डॉक्टरों की सरकार से अपील: ‘देश के अनमोल रत्न को बचाएं’
सोनम वांगचुक का चेकअप कर रहे डॉ. अशोक लांबा ने उनकी सेहत पर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने सीधे तौर पर केंद्र सरकार से इस मामले में दखल देने की अपील की है।
डॉ. लांबा ने कहा, “सोनम वांगचुक हमारे देश के एक अनमोल रत्न (Precious gem) हैं। हम सरकार से विनती करते हैं कि वह इस अनशन को समाप्त कराने के लिए गंभीर प्रयास करे। सरकार को वांगचुक और छात्रों से बातचीत करके कोई सकारात्मक समाधान निकालना चाहिए।
सोनम वांगचुक और छात्रों का यह अनशन सिर्फ उनकी अपनी लड़ाई नहीं है, बल्कि यह देश के उन लाखों छात्रों के भविष्य की लड़ाई है जो एक पारदर्शी और साफ-सुथरी शिक्षा व्यवस्था (Education System) की उम्मीद करते हैं। अब सबकी निगाहें सरकार के रुख और 20 जुलाई को होने वाले ‘चलो संसद’ मार्च पर टिकी हैं। देखना यह होगा कि क्या सरकार इस शांतिपूर्ण आंदोलन की आवाज सुनकर कोई समाधान निकालती है या यह गतिरोध आगे भी जारी रहेगा।











