Amritsar Travel Guide: जब भी बारिश या मानसून का मौसम आता है, तो हम पहाड़ों (उत्तराखंड या हिमाचल) पर जाने से कतराते हैं, क्योंकि वहां भूस्खलन (लैंडस्लाइड) का डर रहता है। ऐसे में घूमने के लिए राजस्थान, उत्तर प्रदेश या फिर पंजाब सबसे सुरक्षित और बेहतरीन विकल्प माने जाते हैं। अगर बात पंजाब की करें, तो ‘अमृतसर’ का नाम जुबान पर सबसे पहले आता है।
आमतौर पर लोगों को लगता है कि अमृतसर जाने का मतलब सिर्फ ‘गोल्डन टेंपल’ (स्वर्ण मंदिर) में मत्था टेकना है। लेकिन यह सच नहीं है! अमृतसर सिर्फ एक धार्मिक जगह नहीं है, बल्कि यहां की गलियों में इतिहास, देशभक्ति, पंजाब की असली संस्कृति और स्वाद का खजाना छिपा है। अगर आप भी अपने परिवार या दोस्तों के साथ 2 दिन के लिए अमृतसर जाने का प्लान बना रहे हैं, तो हम आपको एक दोस्त की तरह बताते हैं कि स्वर्ण मंदिर के अलावा आपको इस शहर में और क्या-क्या एक्सप्लोर करना चाहिए।
जलियांवाला बाग: जहां आज भी बोलता है इतिहास
गोल्डन टेंपल के दर्शन करने के बाद, वहां से बस कुछ ही कदमों की दूरी पर स्थित ‘जलियांवाला बाग’ जरूर जाएं।
यह भारत के इतिहास की वो जगह है जो आज भी हर भारतीय की आंखें नम कर देती है। साल 1919 में यहां जो दर्दनाक घटना घटी थी, उसके निशान आज भी यहां मौजूद हैं। इस बाग में बने स्मारक, दीवारों पर आज भी मौजूद गोलियों के निशान और यहां का म्यूजियम आपको उस समय की पूरी कहानी बयां करते हैं। अगर आप इतिहास को करीब से महसूस करना चाहते हैं, तो यहां कुछ वक्त जरूर बिताएं।
वाघा बॉर्डर: देशभक्ति का वो जज्बा जो रोंगटे खड़े कर दे
अगर आप अमृतसर गए और वाघा बॉर्डर (Wagah Border) नहीं गए, तो समझ लीजिए आपकी ट्रिप अधूरी है। भारत और पाकिस्तान के बॉर्डर पर हर शाम होने वाली ‘बीटिंग रिट्रीट सेरेमनी’ (Beating Retreat Ceremony) को देखना एक अलग ही अहसास है।
शाम ढलते ही यहां भारी संख्या में लोगों की भीड़ जुटती है। जवानों का जोश, दोनों तरफ से लगते नारे और देशभक्ति का माहौल आपके रोंगटे खड़े कर देगा। इस सेरेमनी का हिस्सा बनना आपके लिए एक यादगार अनुभव साबित होगा।
दुर्गियाना और राम तीर्थ मंदिर: आस्था के अद्भुत केंद्र
अमृतसर में स्वर्ण मंदिर के अलावा भी कई बेहद खूबसूरत और प्राचीन मंदिर हैं:
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दुर्गियाना मंदिर: 16वीं सदी में बना यह मंदिर देवी दुर्गा को समर्पित है। इसे ‘लक्ष्मी नारायण मंदिर’ भी कहा जाता है। इसकी बनावट काफी हद तक गोल्डन टेंपल जैसी ही लगती है। मंदिर के आसपास बना सरोवर शाम के समय बहुत ही खूबसूरत दिखता है। आप यहां सुबह 6 बजे से रात 10 बजे तक दर्शन कर सकते हैं।
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राम तीर्थ मंदिर: यह जगह रामायण काल से जुड़ी हुई है। मान्यता है कि यहीं महर्षि वाल्मीकि ने माता सीता को अपने आश्रम में जगह दी थी। इस मंदिर का सबसे बड़ा आकर्षण यहां रखी गई 800 किलोग्राम वजन की वाल्मीकि जी की मूर्ति है, जिस पर सोने की परत चढ़ी हुई है। यहां आप रात 9 बजे तक जा सकते हैं।
गोबिंदगढ़ किला और पार्टीशन म्यूजियम: अतीत की सच्चाई
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पार्टीशन म्यूजियम: साल 1947 में देश के बंटवारे का दर्द क्या था, यह आपको इस म्यूजियम में देखने को मिलेगा। यहां पुरानी तस्वीरों, दस्तावेजों और लोगों के निजी अनुभवों के जरिए बंटवारे की उस खौफनाक कहानी को दिखाया गया है, जिसने लाखों लोगों की जिंदगी बदल दी थी।
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गोबिंदगढ़ किला: अगर आपको पंजाब का गौरवशाली इतिहास देखना है, तो 17वीं शताब्दी में महाराजा गुज्जर सिंह भंगी द्वारा बनवाए गए इस किले में जरूर जाएं। शाम के समय यहां होने वाला ‘लाइट एंड साउंड शो’ और सांस्कृतिक कार्यक्रम आपको पंजाब के असली रंग दिखाएंगे।
हॉल बाजार की शॉपिंग और अमृतसर का लजीज खाना
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शॉपिंग: घूमने के बाद शॉपिंग करना तो बनता है! राम तीर्थ मंदिर के बिल्कुल पास स्थित ‘हॉल बाजार’ अमृतसर का सबसे फेमस मार्केट है। यहां से आप असली पंजाबी जुत्ती, फुलकारी वाले दुपट्टे, सूट और हाथ से बनी खूबसूरत चीजें खरीद सकते हैं।
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खाने का स्वाद: खाने-पीने के शौकीनों के लिए तो अमृतसर किसी जन्नत से कम नहीं है। पुरानी गलियों में मिलने वाला गरमा-गरम अमृतसरी कुलचा, तीखे छोले और मलाई मार के लस्सी का स्वाद आप जिंदगी भर नहीं भूलेंगे। सबसे अच्छी बात यह है कि अगर आप महंगे होटलों के बजाय लोकल दुकानों पर खाते हैं, तो यह बहुत ही सस्ता और स्वादिष्ट पड़ता है।
स्वर्ण मंदिर जाने से पहले ध्यान रखें ये बातें (Travel Tips)
हालांकि यह आर्टिकल गोल्डन टेंपल के अलावा बाकी जगहों के लिए है, लेकिन स्वर्ण मंदिर जाने वाले यात्रियों के लिए कुछ नियम जानने बहुत जरूरी हैं:
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गुरुद्वारे के अंदर हमेशा अपना सिर ढककर (रुमाल या कपड़े से) ही प्रवेश करें।
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परिसर के अंदर साफ-सफाई का पूरा ध्यान रखें, गंदगी बिल्कुल न फैलाएं।
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अगर हो सके तो सुबह बहुत जल्दी या देर रात के समय मंदिर जाएं, इस वक्त सरोवर के पास का नजारा और शांति आपके मन को मोह लेगी।
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पूरे शहर को अच्छे से घूमने और एक्सप्लोर करने के लिए कम से कम 2 दिन का समय लेकर ही आएं।













