Political Update: लद्दाख की मांगों को लेकर मशहूर पर्यावरणविद् और शिक्षाविद् सोनम वांगचुक पिछले 19 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे हैं। अगर आपने ‘थ्री इडियट्स’ फिल्म देखी है, तो आपको ‘फुंसुख वांगड़ू’ का किरदार जरूर याद होगा, जो असल जिंदगी में सोनम वांगचुक से ही प्रेरित था। एक ऐसा इंसान जिसने देश को इतना कुछ दिया, वह आज अपनी मांगों के लिए सड़क पर बिना कुछ खाए-पिए बैठा है।
अब इस मामले में उत्तर प्रदेश की सियासत भी गरमा गई है। समाजवादी पार्टी (SP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सोनम वांगचुक को एक बहुत ही भावुक और सीधी सलाह दी है। अखिलेश यादव ने वांगचुक से अपनी भूख हड़ताल तुरंत खत्म करने की अपील की है। आइए, एक दोस्त की तरह बिल्कुल आसान भाषा में समझते हैं कि अखिलेश यादव ने ऐसा क्यों कहा, उन्होंने अपने बयान में जीडी अग्रवाल का जिक्र क्यों किया और इस पूरी बात के राजनीतिक मायने क्या हैं।
अखिलेश यादव ने क्यों की अनशन खत्म करने की अपील?
जब कोई व्यक्ति 19 दिनों तक भूखा रहता है, तो उसके शरीर की हालत बहुत नाजुक हो जाती है। सोनम वांगचुक का वजन भी काफी कम हो गया है और उनकी तबीयत को लेकर पूरे देश में चिंता है।
इसी बीच, बुधवार देर रात अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर एक पोस्ट लिखा। उन्होंने सीधे तौर पर केंद्र की सत्ताधारी पार्टी (बीजेपी) पर निशाना साधते हुए कहा कि आंदोलन करने वालों को इस सरकार से किसी भी तरह की ‘सहानुभूति’ (हमदर्दी) की उम्मीद नहीं रखनी चाहिए। उनका सीधा सा मतलब था कि यह सरकार अनशन और भूख हड़ताल जैसी चीजों से पिघलने वाली नहीं है, इसलिए वांगचुक को अपना कीमती जीवन दांव पर नहीं लगाना चाहिए।
स्वामी ज्ञान स्वरूप सानंद (जीडी अग्रवाल) का जिक्र क्यों?
अपनी बात को सही साबित करने के लिए अखिलेश यादव ने एक बहुत ही दर्दनाक पुरानी घटना की याद दिलाई। उन्होंने पर्यावरणविद् ‘जीडी अग्रवाल’ (जिन्हें स्वामी ज्ञान स्वरूप सानंद के नाम से भी जाना जाता था) का जिक्र किया।
अगर आपको याद हो, तो कुछ साल पहले जीडी अग्रवाल जी ‘मां गंगा’ को साफ करने और उसे बचाने की मांगों को लेकर एक बहुत लंबे अनशन पर बैठे थे। अखिलेश यादव ने याद दिलाया कि जीडी अग्रवाल जी ने लगातार अपनी मांगें बीजेपी सरकार के सामने रखी थीं, लेकिन सरकार ने उनकी एक नहीं सुनी। नतीजा यह हुआ कि 111 दिनों के अनशन के बाद उन्होंने अपनी जान गंवा दी। अखिलेश का कहना है कि जब सरकार ने तब किसी की नहीं सुनी, तो अब भी वे किसी की परवाह नहीं करेंगे।
केन-बेतवा लिंक परियोजना: एक और बड़ा मुद्दा
अखिलेश यादव ने अपने इस पोस्ट में सिर्फ लद्दाख और सोनम वांगचुक की ही बात नहीं की, बल्कि उन्होंने बुंदेलखंड के एक बड़े मुद्दे को भी इसमें जोड़ लिया।
उन्होंने ‘केन-बेतवा लिंक परियोजना’ का विरोध कर रहे आदिवासी और किसानों का भी जिक्र किया। दरअसल, मध्य प्रदेश के पन्ना और छतरपुर जिलों (जो बुंदेलखंड इलाके में आते हैं) में इस नदी जोड़ो प्रोजेक्ट को लेकर काफी विरोध हो रहा है। यहां के आदिवासी और किसान अपनी जमीन और विस्थापन (घर छिनने) के डर से आंदोलन और अनशन कर रहे हैं। अखिलेश ने इन किसानों से भी अपील की है कि वे सरकार से किसी दया की उम्मीद न रखें और अपनी जान खतरे में न डालें।
‘जान मत गंवाइए, बीजेपी को हराने के लिए साथ आइए’
इस पूरी अपील के पीछे एक बड़ा राजनीतिक संदेश (Political Message) भी छिपा हुआ है। अखिलेश यादव ने आंदोलनकारियों से कहा है कि उनका संकल्प और संघर्ष बहुत मजबूत है।
उन्होंने सलाह दी कि अपनी जान गंवाने के बजाय, अपनी इस ताकत को राजनीतिक लड़ाई में लगाइए। अखिलेश ने लिखा कि जब आप जैसे लोगों की ताकत बीजेपी को सत्ता से हटाने वाले हमारे आंदोलन के साथ जुड़ेगी, तो बीजेपी को आसानी से हराया जा सकेगा और यह पार्टी हमेशा के लिए सत्ता से हट जाएगी। यानी अखिलेश यादव चाहते हैं कि ये सभी आंदोलनकारी विपक्ष के साथ मिलकर चुनाव के मैदान में सरकार को जवाब दें।










