Datia By Election 2026: दतिया विधानसभा उपचुनाव में हार के बाद बीजेपी ने बड़ा संगठनात्मक फैसला लेते हुए दतिया जिले की पूरी इकाई भंग कर दी। जानिए हार की वजह, समीक्षा समिति की रिपोर्ट और आगे की रणनीति।
मध्य प्रदेश के दतिया विधानसभा उपचुनाव में हार के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने बड़ा संगठनात्मक फैसला लिया है। पार्टी ने दतिया जिले की पूरी संगठनात्मक इकाई को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया है। यह कार्रवाई उपचुनाव परिणामों की समीक्षा के लिए गठित दो सदस्यीय समिति की सिफारिश के बाद की गई है।
बीजेपी को दतिया में लगातार दूसरी बार चुनावी हार का सामना करना पड़ा है। उपचुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार कुंवर घनश्याम सिंह ने बीजेपी के आशुतोष तिवारी को 6,016 वोटों से हराया था।
हार के बाद संगठन पर गिरी गाज
प्रदेश कार्यालय मंत्री श्याम महाजन की ओर से जारी आदेश में कहा गया कि प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के निर्देश और समीक्षा समिति की अनुशंसा पर दतिया जिला संगठन की मौजूदा संरचना को भंग किया जाता है।
आदेश के अनुसार, निम्न सभी इकाइयों को तत्काल प्रभाव से पदमुक्त कर दिया गया है—
- जिला अध्यक्ष
- जिला पदाधिकारी
- जिला कार्यसमिति
- सभी मंडल इकाइयाँ
- मोर्चा संगठन
- प्रकोष्ठ
- प्रकल्प
- विभिन्न विभाग एवं संगठनात्मक इकाइयाँ
समीक्षा समिति ने की थी जांच
हार के कारणों की समीक्षा के लिए बीजेपी ने प्रदेश महामंत्री गौरव रणदीवे और वरिष्ठ नेता अम्बाराम कराड़ा की दो सदस्यीय समिति बनाई थी।
समिति को चुनावी तैयारियों, संगठन की भूमिका और नेताओं-कार्यकर्ताओं से चर्चा कर हार के कारणों का पता लगाने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। समिति की रिपोर्ट के आधार पर यह कार्रवाई की गई है।
आशुतोष तिवारी ने ‘गद्दार’ की बात कही थी
चुनाव परिणाम आने के बाद बीजेपी प्रत्याशी आशुतोष तिवारी ने पत्रकारों से बातचीत में भीतरघात की आशंका जताई थी।
उन्होंने कहा,
“पहले गद्दार को तलाशना होगा।”
इस बयान के बाद पार्टी के भीतर अनुशासन और संगठन को लेकर चर्चाएं तेज हो गई थीं।
क्या था पूरा मामला?
दतिया सीट पर उपचुनाव कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती की बैंक धोखाधड़ी मामले में दोषसिद्धि के बाद उनकी विधानसभा सदस्यता समाप्त होने के कारण कराया गया था।
हालांकि इस सीट से राज्य सरकार के बहुमत पर कोई असर नहीं पड़ना था, लेकिन इसे मुख्यमंत्री मोहन यादव के नेतृत्व में बीजेपी की पहली बड़ी चुनावी परीक्षा माना जा रहा था।
टिकट बदलने का फैसला भी बना चर्चा का विषय
बीजेपी ने इस चुनाव में छह बार के विधायक और पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटकर पहली बार चुनाव लड़ रहे आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाया था।
टिकट बदलने के बाद पार्टी के भीतर नाराजगी की खबरें सामने आईं। कुछ पदाधिकारियों ने इस्तीफा भी दिया, जबकि नामांकन के दौरान नरोत्तम मिश्रा के भावुक होने की चर्चा रही। हालांकि बाद में उन्होंने पार्टी उम्मीदवार के समर्थन में प्रचार किया।
कांग्रेस में भी था आंतरिक विवाद
चुनाव प्रचार के दौरान कांग्रेस में भी मतभेद सामने आए। कांग्रेस उम्मीदवार कुंवर घनश्याम सिंह और पूर्व विधायक राजेंद्र भारती के बीच सार्वजनिक आरोप-प्रत्यारोप हुए।
मतगणना से एक दिन पहले कांग्रेस ने राजेंद्र भारती को प्राथमिक सदस्यता से निलंबित कर दिया था। इसके बावजूद पार्टी दतिया सीट बचाने में सफल रही।
आगे क्या?
चुनाव परिणामों के बाद बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कहा था कि यदि समीक्षा में किसी स्तर पर अनुशासनहीनता या संगठनात्मक लापरवाही सामने आती है, तो सख्त कार्रवाई की जाएगी। अब दतिया की पूरी जिला इकाई को भंग किया जाना उसी प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है।











