Personal Finance: जब भी हम अपनी गाढ़ी कमाई निवेश करने की सोचते हैं, तो सबसे पहला ख्याल शेयर बाजार या म्यूचुअल फंड (Mutual Fund) का ही आता है। हर निवेशक चाहता है कि उसे अपने पैसे पर सबसे अच्छा रिटर्न मिले। पिछले कुछ सालों में भारतीय शेयर बाजार ने निवेशकों को बहुत अच्छा पैसा बनाकर दिया है। लेकिन, अगर हम पिछले एक साल का रिकॉर्ड देखें, तो कहानी कुछ और ही नजर आती है।
इन दिनों भारतीय बाजारों के मुकाबले विदेशी शेयर बाजारों (Foreign Markets) ने निवेशकों की झोली ज्यादा भरी है। अमेरिका, जापान, ताइवान और दक्षिण कोरिया जैसे देशों के बाजारों में जबरदस्त उछाल देखने को मिल रहा है। इसी का नतीजा है कि ‘इंटरनेशनल म्यूचुअल फंड्स’ (International Mutual Funds) एक बार फिर से चर्चा के केंद्र में आ गए हैं।
आइए, एक दोस्त की तरह बिल्कुल आसान भाषा में समझते हैं कि विदेशी बाजारों में ऐसा क्या हो रहा है, वहां के फंड्स कितना रिटर्न दे रहे हैं और अगर आप वहां पैसा लगाना चाहते हैं, तो आपके सामने क्या दिक्कतें आ सकती हैं।
क्या है पूरा मामला? (विदेशी बाजारों में क्यों है बहार)
अगर हम पिछले एक साल के प्रदर्शन पर नजर डालें, तो भारतीय शेयर बाजार और ग्लोबल मार्केट के रिटर्न में एक बड़ा फासला (Gap) आ गया है।
जहां भारतीय सूचकांकों (Indices) ने पिछले कुछ समय में थोड़ा सुस्त या नकारात्मक (Negative) प्रदर्शन किया है, वहीं दुनिया के कई दूसरे बाजारों ने ‘डबल डिजिट’ (10% से ऊपर) में तगड़ा मुनाफा दिया है। विदेशी बाजारों की इस शानदार तेजी का सीधा फायदा उन भारतीय निवेशकों को मिल रहा है, जिन्होंने अपना पैसा उन म्यूचुअल फंड्स में लगाया है जो विदेशों में निवेश करते हैं।
रिटर्न में कौन मार रहा है बाजी? (आंकड़ों की जुबानी)
विदेशी बाजारों में सबसे ज्यादा धूम ‘टेक्नोलॉजी’ (Technology) से जुड़ी कंपनियों ने मचाई है।
-
अमेरिका का मशहूर टेक इंडेक्स ‘नैस्डैक’ (Nasdaq) पिछले एक साल में करीब 39 प्रतिशत तक बढ़ गया है।
-
इससे भी ज्यादा हैरानी की बात यह है कि ताइवान का बाजार सूचकांक पिछले एक साल में दोगुने से भी ज्यादा हो गया है।
इन देशों की कंपनियों में निवेश करने वाले भारतीय इंटरनेशनल फंड्स ने छप्परफाड़ रिटर्न दिए हैं। उदाहरण के लिए, एक सर्वे के मुताबिक पिछले एक साल में सबसे ज्यादा रिटर्न ‘एडलवाइस इमर्जिंग मार्केट्स अपॉर्चुनिटीज इक्विटी ऑफशोर फंड’ ने दिया है। इस फंड ने निवेशकों को 83.18 प्रतिशत का बंपर रिटर्न कमाकर दिया है।
निवेशकों के सामने क्या है असली समस्या? (लंपसम पर रोक, SIP चालू)
अब आप सोच रहे होंगे कि जब इतना अच्छा रिटर्न मिल रहा है, तो क्यों न मैं अपने 5 लाख रुपये एक साथ इन फंड्स में डाल दूं? दोस्तों, यहीं पर एक बहुत बड़ा पेंच फंसा हुआ है।
इस वक्त भारतीय निवेशकों के सामने एक असामान्य स्थिति पैदा हो गई है। जिन इंटरनेशनल फंड्स ने पिछले एक साल में सबसे बेहतरीन प्रदर्शन किया है, उनमें से ज्यादातर फंड ‘पूरी तरह से खुले’ नहीं हैं।
इसका मतलब यह है कि कई बेहतरीन रिटर्न देने वाली योजनाएं निवेशकों से ‘एकमुश्त बड़ी रकम’ (Lumpsum Investment) लेने से मना कर रही हैं। अगर आपको इन टॉप परफॉर्मिंग फंड्स में पैसा लगाना है, तो आपके पास सिर्फ एक ही रास्ता है— सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP)। आप हर महीने थोड़ी-थोड़ी रकम (SIP के जरिए) तो लगा सकते हैं, लेकिन एक साथ बड़ा पैसा नहीं डाल सकते।
बाजार के 3 सबसे बड़े ट्रेंड्स: कहां बन रहा है पैसा?
अगर हम मौजूदा आंकड़ों और बाजार की चाल को समझें, तो विदेशी निवेश को लेकर 3 बातें बिल्कुल शीशे की तरह साफ हो जाती हैं:
-
टेक्नोलॉजी का दबदबा (Tech is King): अमेरिका की टेक कंपनियों (जैसे एप्पल, गूगल, एनवीडिया) ने बाजार को अपने कंधों पर उठाया हुआ है। नैस्डैक (Nasdaq) से जुड़े फंड्स लगातार टॉप लिस्ट में अपनी जगह बनाए हुए हैं।
-
उभरते बाजारों (Emerging Markets) की वापसी: सिर्फ अमेरिका ही नहीं, बल्कि चीन और एशिया के अन्य उभरते बाजारों पर फोकस करने वाले फंड्स ने भी जबरदस्त वापसी की है। कई मामलों में तो इन्होंने अमेरिकी फंड्स से भी ज्यादा रिटर्न दिया है।
-
निवेश की सीमा (Limited Access): जैसा कि हमने ऊपर बताया, अच्छे रिटर्न के बावजूद लंपसम निवेश (Lumpsum) पर लगी रोक के कारण, निवेशक चाहकर भी एक साथ बड़ा पैसा इन मौकों पर नहीं लगा पा रहे हैं।












