Monsoon Travel Guide: बारिश के मौसम में प्रकृति अपने सबसे अच्छे रूप में होती है, लेकिन इसी समय पहाड़ों पर मिट्टी खिसकने (लैंडस्लाइड), नदियों में अचानक बाढ़ आने और रास्ते बंद होने की घटनाएं सबसे ज्यादा होती हैं। इसलिए यह जानना बहुत जरूरी है कि किन जगहों पर खतरा ज्यादा रहता है, ताकि आप अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित कर सकें।
उत्तराखंड: जहां सबसे ज्यादा रहता है लैंडस्लाइड का डर
दिल्ली और यूपी के लोगों के लिए उत्तराखंड सबसे पास पड़ता है। लोग वीकेंड पर मसूरी, नैनीताल या चार धाम यात्रा (केदारनाथ, बद्रीनाथ) के लिए निकल पड़ते हैं।
लेकिन बारिश के मौसम में उत्तराखंड के पहाड़ों पर जाना एक बड़ी चुनौती बन सकता है। लगातार बारिश से पहाड़ कमजोर हो जाते हैं, जिससे लैंडस्लाइड का खतरा काफी बढ़ जाता है। अचानक पहाड़ों से पत्थर और मिट्टी गिरकर सड़कों पर आ जाती है, जिससे घंटों तक ट्रैफिक जाम रहता है या रास्ते पूरी तरह बंद हो जाते हैं। इसके अलावा, बादल फटने की घटनाएं भी इसी मौसम में सबसे ज्यादा होती हैं। इसलिए फिलहाल यहां जाने का प्लान थोड़ा टाल देना ही समझदारी है।
कुल्लू-मनाली (हिमाचल प्रदेश): उफनती नदियां और टूटते पहाड़
हिमाचल प्रदेश का कुल्लू-मनाली हमेशा से पर्यटकों की पहली पसंद रहा है। लेकिन अगर आप पिछले कुछ सालों की खबरें देखेंगे, तो बारिश के मौसम में यहां के हालात काफी डराने वाले रहे हैं।
भारी बारिश के कारण ब्यास और अन्य नदियां उफान पर आ जाती हैं। कई बार तो पानी का बहाव इतना तेज होता है कि गाड़ियां और सड़कें तक बह जाती हैं। पहाड़ों से मलबा सीधे रास्तों पर आ गिरता है। ऐसे में अगर आप मनाली जाने की सोच रहे हैं, तो अभी रुकना ही बेहतर है, क्योंकि यहां बारिश के दौरान जान का खतरा भी बना रहता है।
दार्जिलिंग (पश्चिम बंगाल): तीस्ता नदी का बढ़ता जलस्तर
जब बात खूबसूरत वादियों और चाय के बागानों की आती है, तो दार्जिलिंग का नाम जरूर आता है। बारिश में धुंध से ढके चाय के बागान बहुत सुंदर लगते हैं, लेकिन इसके साथ ही यहां के खतरे भी बढ़ जाते हैं।
मॉनसून के दौरान यहां बहने वाली तीस्ता नदी का वाटर लेवल अचानक बहुत ज्यादा बढ़ जाता है। लगातार बारिश की वजह से दार्जिलिंग और सिक्किम को जोड़ने वाले रास्तों पर लैंडस्लाइड होना आम बात है। कई बार टूरिस्ट बीच रास्ते में ही फंस जाते हैं। इसलिए इस मौसम में दार्जिलिंग की यात्रा बहुत सोच-समझकर ही करनी चाहिए।
नॉर्थ-ईस्ट और समुद्री किनारे: असम से लेकर मुंबई-गोवा तक का हाल
सिर्फ ऊंचे पहाड़ ही नहीं, बल्कि नॉर्थ-ईस्ट (पूर्वोत्तर भारत) के कई राज्यों में भी मॉनसून के दौरान बाढ़ आ जाती है। असम और अरुणाचल प्रदेश में ब्रह्मपुत्र और अन्य नदियां खतरे के निशान से ऊपर बहने लगती हैं, जिससे वहां का जनजीवन पूरी तरह प्रभावित हो जाता है।
वहीं, अगर आप बारिश का मजा लेने के लिए मुंबई या गोवा के समुद्री किनारों (Beaches) पर जाने का सोच रहे हैं, तो सावधान हो जाएं। इन दिनों मुंबई में भारी बारिश के कारण जगह-जगह जलभराव की समस्या रहती है। गोवा में भी समंदर का मिजाज बहुत आक्रामक होता है और ऊंची लहरों के कारण बीच पर जाना सुरक्षित नहीं होता।
ट्रिप प्लान करते समय कैसे रखें खुद को सुरक्षित? (जरूरी टिप्स)
अगर आपका घूमने जाना बहुत जरूरी है या आप किसी सेफ जगह का प्लान बना रहे हैं, तो इन बातों का ध्यान जरूर रखें:
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मौसम का अपडेट लें: घर से निकलने से पहले आईएमडी (IMD) की वेबसाइट या न्यूज़ पर उस जगह के मौसम का हाल जरूर चेक कर लें।
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लोकल जानकारी जुटाएं: जिस होटल या होमस्टे में आप रुकने वाले हैं, वहां फोन करके रास्तों की असली हालत (जमीनी हकीकत) के बारे में पूछ लें।
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अलर्ट को सीरियस लें: अगर मौसम विभाग ने कहीं के लिए भारी बारिश का ‘रेड’ या ‘ऑरेंज’ अलर्ट जारी किया है, तो अपना ट्रिप तुरंत कैंसिल कर दें।
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बैकअप रखें: अपने साथ कुछ एक्स्ट्रा कैश, पावर बैंक और जरूरी दवाइयां हमेशा रखें, ताकि रास्ते में फंसने पर कोई दिक्कत न हो।
घूमना-फिरना हमारी जिंदगी को तरोताजा कर देता है, लेकिन कोई भी ट्रिप हमारी जान और सुरक्षा से बढ़कर नहीं हो सकता। मॉनसून में पहाड़ दूर से जितने सुंदर दिखते हैं, करीब से उतने ही खतरनाक हो सकते हैं। इसलिए थोड़ा सब्र रखें। बारिश का मौसम खत्म होने के बाद, सितंबर या अक्टूबर में जब मौसम साफ हो जाए, तब अपने सफर का मजा लें। सुरक्षित रहें और समझदारी से अपनी छुट्टियां प्लान करें!












