Chandrashekhar Azad on Mohan Bhagwat: आज़ाद समाज पार्टी प्रमुख चंद्रशेखर आज़ाद ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के आरक्षण संबंधी बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए जातीय जनगणना के आंकड़े सार्वजनिक करने की मांग की। पढ़ें पूरा बयान।
आज़ाद समाज पार्टी (कांशीराम) के संस्थापक और सांसद चंद्रशेखर आज़ाद ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत के आरक्षण संबंधी बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि अगर यह तय करना है कि किन लोगों का सामाजिक उत्थान हो चुका है और कौन अब आरक्षण का लाभ न ले, तो पहले जातीय जनगणना कराई जाए और उसके आंकड़े सार्वजनिक किए जाएं।
“सरकार को सलाह दें, देश को नहीं”
चंद्रशेखर आज़ाद ने कहा कि आरएसएस प्रमुख को यह बात देश या विपक्ष से कहने के बजाय अपनी सरकार से कहनी चाहिए।
उन्होंने कहा,
“आरएसएस प्रमुख सरकार को कहें कि जल्द से जल्द जातीय जनगणना कराए और उसके आंकड़े सार्वजनिक करे। तभी पता चलेगा कि किनका उत्थान हुआ है, कौन-सा समाज आगे बढ़ा है और किसकी हिस्सेदारी पूरी हुई है।”
युवाओं को लेकर भी साधा निशाना
चंद्रशेखर आज़ाद ने आरएसएस पर युवाओं को लेकर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि उन्हें लगता है कि संगठन के मन में युवाओं के प्रति विरोध की भावना है।
उन्होंने कहा,
“नौजवानों ने 2014 में उन्हें कंधों पर बैठाकर सत्ता तक पहुंचाया था, लेकिन अब वही नौजवान उन्हें राज्यों और देशभर में सत्ता से दूर कर देंगे।”
मोहन भागवत ने क्या कहा था?
गुरुवार को एक कार्यक्रम में मोहन भागवत ने कहा था कि आरक्षण सामाजिक भेदभाव के कारण दिया गया है और जब तक सामाजिक भेदभाव रहेगा, तब तक आरक्षण भी जारी रहना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा था कि जिन लोगों का सामाजिक उत्थान हो चुका है, उन्हें “बड़ा दिल दिखाते हुए” आरक्षण का लाभ छोड़ने पर विचार करना चाहिए, ताकि जिनकी स्थिति अभी भी कमजोर है उन्हें इसका फायदा मिल सके।
मंडल आयोग का भी किया जिक्र
चंद्रशेखर आज़ाद ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी निशाना साधते हुए कहा कि 7 अगस्त सिर्फ राष्ट्रीय हथकरघा दिवस ही नहीं, बल्कि मंडल आयोग की सिफारिशों को लागू करने की घोषणा का भी ऐतिहासिक दिन है।
उन्होंने कहा,
“प्रधानमंत्री को ‘हैंडलूम दिवस’ की शुभकामनाएं देने के साथ ‘मंडल दिवस’ की भी याद करनी चाहिए थी।”
आजाद ने कहा कि वी.पी. सिंह सरकार ने 7 अगस्त 1990 को मंडल आयोग की सिफारिशों को लागू करने की घोषणा की थी, लेकिन आयोग की 40 सिफारिशों में से केवल 2 ही लागू हुईं।
आरक्षण और जातीय जनगणना पर फिर तेज हुई बहस
मोहन भागवत के बयान और उस पर चंद्रशेखर आज़ाद की प्रतिक्रिया के बाद एक बार फिर आरक्षण, जातीय जनगणना और सामाजिक न्याय का मुद्दा राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है। आने वाले समय में यह विषय राष्ट्रीय राजनीति में महत्वपूर्ण चुनावी मुद्दा बन सकता है।











