Delhi Protest News: देश की राजधानी दिल्ली में इस वक्त सियासी पारा अपने चरम पर है। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का खेल कोई नई बात नहीं है, लेकिन बुधवार (22 जुलाई 2026) को जो कुछ हुआ, उसने राजनीति में एक नई और तीखी बहस छेड़ दी है।
प्रधानमंत्री आवास के पास कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं द्वारा किए गए प्रदर्शन ने एक बड़े विवाद का रूप ले लिया है। इस प्रदर्शन के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) और विपक्ष (खासकर कांग्रेस और आरजेडी) के नेता आमने-सामने आ गए हैं। जहां एक तरफ केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर सीधे ‘देशद्रोह’ का मुकदमा दर्ज करने की मांग कर दी है, वहीं दूसरी तरफ कन्हैया कुमार और रोहिणी आचार्य ने भी पुलिसिया कार्रवाई को लेकर मोदी सरकार पर जोरदार पलटवार किया है। आइए, बिल्कुल आसान भाषा में समझते हैं कि इस पूरी राजनीतिक हलचल में किसने क्या कहा है और इसके मायने क्या हैं।
पीएम आवास के पास प्रदर्शन: क्यों भड़की बीजेपी?
दरअसल, यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब कांग्रेस के नेता और कार्यकर्ता देश के युवाओं, छात्रों और रोजगार जैसे मुद्दों को लेकर प्रधानमंत्री आवास के पास विरोध प्रदर्शन करने पहुंचे थे। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच काफी खींचतान और धक्का-मुक्की हुई।
चूंकि प्रधानमंत्री आवास एक ‘हाई-सिक्योरिटी जोन’ (अति-सुरक्षित क्षेत्र) होता है, इसलिए वहां इस तरह के प्रदर्शन को लेकर बीजेपी नेताओं ने कड़ी आपत्ति जताई है। उनका मानना है कि विपक्ष के नेता राजनीतिक विरोध के नाम पर सुरक्षा और कानून-व्यवस्था के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं।
‘राहुल गांधी पर चले देशद्रोह का मुकदमा’- गिरिराज सिंह का बड़ा बयान
इस घटना के बाद बीजेपी के कद्दावर नेता और केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कांग्रेस और विशेष रूप से राहुल गांधी पर बहुत ही तीखा हमला बोला।
गिरिराज सिंह ने कहा कि विपक्ष का नेता होने का यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि आप सारे कानूनों को ताक पर रख दें और उन्हें अपने हाथ में ले लें। उन्होंने राहुल गांधी पर संविधान की गरिमा को ठेस पहुंचाने का आरोप लगाया।
अपने बयान में उन्होंने एक बहुत बड़ी बात कही। उन्होंने आशंका जताते हुए कहा, “वो (राहुल गांधी) दूसरे देशों की नकल करके हमारे यहां उपद्रव कराना चाहते हैं। अगर प्रधानमंत्री आवास के पास कोई भी अनहोनी या दुर्घटना हो जाती, तो आज पूरी दुनिया हमारे लोकतंत्र पर हंसती।”
गिरिराज सिंह ने साफ शब्दों में मांग की है कि जिस तरह की घटना को अंजाम देने की कोशिश की गई, उसे देखते हुए राहुल गांधी पर ‘देशद्रोह’ (Treason) का मुकदमा चलना चाहिए।
कन्हैया कुमार का पलटवार: ‘लाठी नहीं नौकरी चाहिए’
जब बीजेपी की तरफ से इतने कड़े बयान आए, तो कांग्रेस कैसे पीछे रहती? कांग्रेस के युवा नेता कन्हैया कुमार ने सोशल मीडिया के जरिए मोदी सरकार पर सीधा और तीखा वार किया।
कन्हैया कुमार ने ‘एक्स’ (X) पर पोस्ट करते हुए इस प्रदर्शन का मुख्य कारण बताया। उन्होंने कहा कि आज देश के छात्रों और युवाओं के साथ बहुत अन्याय हो रहा है। सरकार उनका भविष्य छीन रही है और जब युवा अपने हक के लिए न्याय मांगते हैं, तो उन्हें जवाब में सिर्फ ‘लाठी और आंसू गैस के गोले’ मिलते हैं।
उन्होंने लिखा कि दिल्ली में हुई इस पुलिसिया बर्बरता के बाद अब पूरा देश ही ‘जंतर-मंतर’ (विरोध की जगह) बन चुका है। कन्हैया ने सरकार को घेरते हुए अपना नारा दिया— “युवाओं को लाठी नहीं नौकरी चाहिए, और जुमला नहीं बल्कि जवाबदेही चाहिए।”
रोहिणी आचार्य ने पुलिसिया कार्रवाई को बताया ‘शर्मनाक’
इस सियासी घमासान में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) प्रमुख लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने भी अपनी बात मजबूती से रखी है। उन्होंने पीएम आवास के बाहर हुए प्रदर्शन के दौरान राहुल गांधी और विपक्ष के अन्य सांसदों के साथ दिल्ली पुलिस द्वारा किए गए बर्ताव को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताया।
रोहिणी ने अपने बयान में कहा कि मोदी सरकार के इशारे पर दिल्ली पुलिस बर्बरता और बेशर्मी की सारी हदें पार कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब विपक्ष के सांसद और नेता शांतिपूर्ण तरीके से अपना विरोध दर्ज करा रहे थे, तब उनके साथ जो सलूक किया गया, वह शर्मनाक है। रोहिणी के अनुसार, यह घटना इस बात का सबूत है कि आज देश में लोकतंत्र खतरे में है।
कुल मिलाकर देखा जाए तो, 22 जुलाई का यह दिन दिल्ली की राजनीति के लिए काफी उथल-पुथल भरा रहा। एक तरफ सरकार का तर्क है कि पीएम आवास जैसे संवेदनशील इलाके में प्रदर्शन करना सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा और कानून का उल्लंघन है। वहीं, विपक्ष का कहना है कि सरकार पुलिस का इस्तेमाल करके युवाओं और विपक्ष की आवाज को दबाने की कोशिश कर रही है। अब देखना यह है कि बयानों की यह आंधी यहीं शांत हो जाती है या आने वाले दिनों में संसद से लेकर सड़क तक कोई नया राजनीतिक बवाल खड़ा करती है।












