Gen Z Protest: जंतर-मंतर पर 37 दिनों तक चले जेन ज़ी छात्र आंदोलन के दौरान बीजेपी नेताओं के परिवारों से भी समर्थन सामने आया। मुरली मनोहर जोशी ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए, जबकि कई नेताओं की बेटियों ने सोशल मीडिया और प्रदर्शनों में आंदोलन का समर्थन किया।
- जंतर-मंतर पर 37 दिनों तक चला छात्र आंदोलन राष्ट्रीय चर्चा का विषय बना।
- मुरली मनोहर जोशी ने महिलाओं पर पुलिस कार्रवाई पर चिंता जताई।
- बीजेपी नेताओं की कुछ बेटियों ने आंदोलन के समर्थन में सार्वजनिक रूप से अपनी राय रखी।
- सोशल मीडिया पर आंदोलन को व्यापक समर्थन और चर्चा मिली।
- आंदोलन का मुख्य मुद्दा परीक्षा प्रणाली में सुधार और कथित पेपर लीक मामलों पर जवाबदेही था।
नई दिल्ली: दिल्ली के जंतर-मंतर पर 37 दिनों तक चले जेन ज़ी छात्र आंदोलन की चर्चा केवल विपक्ष तक सीमित नहीं रही। आंदोलन के दौरान भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के कुछ वरिष्ठ नेताओं और उनके परिवारों से भी अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आईं।
पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री मुरली मनोहर जोशी ने प्रदर्शनकारियों, विशेषकर महिलाओं पर पुलिस कार्रवाई को लेकर चिंता जताई। वहीं, कुछ बीजेपी नेताओं की बेटियों ने भी सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर आंदोलन के समर्थन में अपनी राय रखी।
मुरली मनोहर जोशी ने पुलिस कार्रवाई पर जताई चिंता
23 जुलाई को मुरली मनोहर जोशी ने छात्र आंदोलन के दौरान महिलाओं पर हुई कथित पुलिस कार्रवाई पर दुख व्यक्त किया।
उन्होंने कहा,
“मुझे यह देखकर अत्यंत पीड़ा हुई है कि महिलाओं पर निर्मम बल प्रयोग किया गया।”
उनके इस बयान की राजनीतिक हलकों में व्यापक चर्चा हुई।
बीजेपी नेताओं की बेटियों ने भी जताया समर्थन
आंदोलन के दौरान कई नेताओं के परिवारों से जुड़ी प्रतिक्रियाएं सामने आईं।
इनमें प्रमुख नाम शामिल हैं:
- असम सरकार में मंत्री केशव महंता की बेटी दिबीसा महंता
- ओडिशा से बीजेपी सांसद अपराजिता सारंगी की बेटी अर्चिता सचिन राहर
- उत्तर प्रदेश के पूर्व बीजेपी विधायक विक्रम सिंह की बेटी यशस्विनी राजे सिंह
इन तीनों ने अलग-अलग माध्यमों से आंदोलन के समर्थन या सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।
यशस्विनी राजे सिंह ने क्या कहा?
यशस्विनी राजे सिंह ने एक साक्षात्कार में कहा कि केवल किसी मंत्री के इस्तीफे को समाधान मानना पर्याप्त नहीं है।
उन्होंने कहा कि जवाबदेही केवल पद छोड़ने तक सीमित नहीं होनी चाहिए और छात्र आंदोलन ने बड़ी संख्या में गैर-राजनीतिक युवाओं को एक मंच पर लाने का काम किया।
यशस्विनी ने यह भी कहा कि सोशल मीडिया, विशेषकर इंस्टाग्राम, ने आंदोलन को व्यापक पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभाई।
दिबीसा महंता की मौजूदगी बनी चर्चा का विषय
असम के गुवाहाटी में आयोजित समर्थन प्रदर्शन में मंत्री केशव महंता की बेटी दिबीसा महंता भी शामिल हुईं।
प्रदर्शन के दौरान उन्होंने छात्र आंदोलन के समर्थन में अपनी बात रखी और कथित पुलिस कार्रवाई पर चिंता व्यक्त की।
इस मामले पर जब असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा से सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि वयस्क बच्चों की व्यक्तिगत राय के लिए माता-पिता को जिम्मेदार नहीं ठहराया जाना चाहिए।
अर्चिता राहर की सोशल मीडिया पोस्ट पर विवाद
भुवनेश्वर से बीजेपी सांसद अपराजिता सारंगी की बेटी अर्चिता राहर की एक इंस्टाग्राम स्टोरी भी चर्चा में रही।
स्टोरी में शिक्षा मंत्री के इस्तीफे का उल्लेख किया गया था, जिसके बाद पार्टी के कुछ नेताओं ने नाराजगी जताई।
बाद में अपराजिता सारंगी ने कहा कि यह पोस्ट अनजाने में साझा हुई थी और बाद में हटा दी गई।
क्या थी छात्र आंदोलन की मुख्य मांगें?
जंतर-मंतर पर चले आंदोलन में छात्रों ने कई मांगें उठाईं, जिनमें प्रमुख थीं:
- प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच।
- पेपर लीक मामलों में जवाबदेही तय करना।
- शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार।
- परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और विश्वसनीय बनाना।












