Kashi Vishwanath Temple: उत्तर प्रदेश की धार्मिक नगरी वाराणसी (Varanasi) का नाम सुनते ही हमारे दिमाग में घाटों की शांति, मंत्रों की गूंज और श्री काशी विश्वनाथ मंदिर (Kashi Vishwanath Temple) की भव्यता आ जाती है। रोज सुबह यहां हजारों श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन के लिए लाइन में लगते हैं। लेकिन आज यानी शनिवार की सुबह यहां का माहौल अचानक तब बदल गया, जब मंदिर के बाहर अचानक गोली चलने की आवाज आई।
गोली की आवाज सुनते ही श्रद्धालुओं और दुकानदारों के बीच भारी अफरा-तफरी मच गई। हालांकि, घबराने की कोई बात नहीं है, यह कोई आतंकी हमला या जानबूझकर की गई फायरिंग नहीं थी, बल्कि एक बहुत ही चौंकाने वाला ‘हादसा’ था। आइए, एक दोस्त की तरह बिल्कुल आसान भाषा में समझते हैं कि काशी विश्वनाथ मंदिर के बाहर आज सुबह असल में क्या हुआ, गोली कैसे चली और जिन लोगों को चोट लगी है, उनकी हालत अब कैसी है।
क्या है पूरा मामला? (शनिवार सुबह की घटना)
यह पूरी घटना शनिवार की सुबह-सुबह की है। हम सब जानते हैं कि काशी विश्वनाथ मंदिर और उसके आस-पास हमेशा बहुत कड़ी सुरक्षा (High Security) रहती है। चप्पे-चप्पे पर यूपी पुलिस और पीएसी (PAC – प्रांतीय सशस्त्र पीएसी) के जवान तैनात रहते हैं।
जानकारी के मुताबिक, मंदिर के ‘गेट नंबर-4B’ (जो कि नंदू फारिया गेट से सटा हुआ है) पर पीएसी के एक सिपाही की ड्यूटी लगी हुई थी। वह सिपाही अपनी सरकारी ‘कार्बाइन’ (एक प्रकार की ऑटोमैटिक बंदूक) के साथ वहां मुस्तैद था। तभी अचानक किसी चूक या असावधानी के कारण सिपाही के हाथ से उसकी भरी हुई सरकारी कार्बाइन छूटकर नीचे पक्की सड़क पर गिर गई।
कैसे हुआ यह हादसा? (गोली नहीं, गिट्टी से हुए घायल)
जैसे ही भारी कार्बाइन सड़क पर गिरी, ट्रिगर दबने के कारण उसमें से अचानक फायर हो गया (गोली चल गई)।
अब यहां सबसे बड़ी राहत की बात यह है कि यह गोली सीधी जाकर किसी इंसान को नहीं लगी। जब बंदूक गिरी, तो गोली सीधे नीचे सड़क (जमीन) पर जाकर टकराई। लेकिन, गोली की रफ्तार इतनी तेज होती है कि जब वह पक्की सड़क पर टकराई, तो वहां की गिट्टियां (कंकड़) और गोली के छर्रे तेजी से उछलकर आस-पास खड़े लोगों को जा लगे।
शुरुआती जानकारी के अनुसार, इस हादसे में कुल तीन लोग मामूली रूप से घायल हुए हैं, जिनमें से दो स्थानीय दुकानदार बताए जा रहे हैं। उछलकर आई गिट्टियों और छर्रों की वजह से इन लोगों के हाथ और पेट पर हल्की चोटें आई हैं।
घटना के तुरंत बाद क्या हुआ? (पुलिस का एक्शन)
एक अति-सुरक्षित इलाके में गोली चलने की आवाज से जाहिर सी बात है कि लोगों में दहशत फैल गई। यात्री घबरा गए और इधर-उधर देखने लगे।
लेकिन, वहां ड्यूटी पर मौजूद बाकी पुलिस अधिकारियों ने तुरंत सूझबूझ दिखाई और स्थिति को अपने कंट्रोल (नियंत्रण) में ले लिया। उन्होंने सबसे पहले भीड़ को शांत किया और यह सुनिश्चित किया कि कोई भगदड़ न मचे। इसके तुरंत बाद, जिन तीन लोगों को गिट्टी और छर्रे लगे थे, उन्हें बिना कोई देरी किए इलाज के लिए नजदीकी अस्पताल भेज दिया गया।
गनीमत रही कि टल गया एक बहुत बड़ा हादसा
इस पूरी घटना को देखने के बाद हर कोई बस यही कह रहा है कि ‘भगवान भोलेनाथ की कृपा से एक बहुत बड़ा हादसा टल गया।’
जरा सोचिए, काशी विश्वनाथ मंदिर के गेट नंबर 4 के आस-पास कितनी भीड़ होती है। वहां हर वक्त श्रद्धालु, बच्चे, बुजुर्ग और दुकानदार मौजूद रहते हैं। अगर सिपाही के हाथ से बंदूक गिरते समय उसका मुंह सड़क की तरफ न होकर सीधे भीड़ की तरफ होता, तो यह गोली सीधे किसी इंसान की जान ले सकती थी। लेकिन गनीमत रही कि गोली सिर्फ जमीन पर लगी और लोगों को केवल मामूली खरोंचें ही आईं।
फिलहाल पुलिस के बड़े अधिकारियों ने इस पूरे मामले की जांच (Investigation) शुरू कर दी है। यह पता लगाया जा रहा है कि एक प्रशिक्षित (Trained) पीएसी जवान से इतनी बड़ी चूक कैसे हो गई कि उसके हाथ से उसका हथियार ही गिर गया।











