Ram Mandir Chanda Chori: अयोध्या का राम मंदिर सिर्फ एक इमारत नहीं है; यह करोड़ों हिंदुओं की आस्था, विश्वास और दशकों के लंबे संघर्ष का प्रतीक है। जब एक आम इंसान भगवान राम के लिए 10 रुपये से लेकर लाखों रुपये तक का दान करता है, तो उसके पीछे एक गहरा भरोसा होता है। लेकिन, जरा सोचिए कि जब उसी रामलला के खजाने में से कुछ लोग रोज लाखों रुपये चुराने लगें, तो क्या होगा?
आजकल अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे और चंदे की चोरी का मामला देश भर में छाया हुआ है। इस मामले में एसआईटी (SIT) की जांच चल रही है और 8 लोग गिरफ्तार भी हो चुके हैं। लेकिन इस पूरी घटना ने सिर्फ उन 8 चोरों को ही नहीं, बल्कि ‘श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट’, वीएचपी (VHP) और आरएसएस (RSS) के बड़े पदाधिकारियों को भी सवालों के घेरे में ला खड़ा किया है। आइए, एक दोस्त की तरह बिल्कुल आसान भाषा में समझते हैं कि यह चोरी कैसे हो रही थी, इसकी शुरुआत कब हुई और इसके पीछे कौन सा बड़ा ‘पावर गेम’ (Power Game) चल रहा है।
कैसे रची गई करोड़ों की चोरी की साजिश? (महिपाल सिंह का खुलासा)
इस पूरे मामले की पोल खोलने वाले मुख्य व्यक्ति का नाम है महिपाल सिंह। वे जनवरी 2021 से लेकर मई 2022 तक राम मंदिर ट्रस्ट के ‘लेखा प्रभारी’ (Account In-charge) थे।
पत्रकार अभिषेक उपाध्याय को दिए एक इंटरव्यू में महिपाल सिंह ने बताया कि उनकी ड्यूटी पुलिस चौकी के पास बने ‘काउंटिंग सेंटर’ में थी, जहां चढ़ावे का पैसा गिना जाता था।
चोरी का तरीका: बैंक के दो अधिकारी और 14 लड़के नोटों की गड्डियां अलग करते थे। महिपाल ने बताया कि लड़के रोज ज्यादा नोट पैक करके ले जाते थे, लेकिन जो वाउचर (कागज) भरा जाता था, उसमें गड्डियों की संख्या कम लिखी जाती थी।
शुरुआत में उन्हें इस बात का पता नहीं चला, लेकिन जब दिसंबर 2021 में उन्हें शक हुआ और उन्होंने एक बॉक्स खुलवाया, तो पता चला कि ये लोग 5 लाख रुपये ज्यादा ले जा रहे थे।
शिकायत करने पर मिली ‘सजा’, 8 महीने की CCTV फुटेज गायब!
महिपाल सिंह ने इस गंभीर चोरी की शिकायत ट्रस्ट के बड़े पदाधिकारियों— गोपाल राव और महासचिव चंपत राय से की।
लेकिन, इसका नतीजा क्या हुआ? महिपाल को इनाम मिलने के बजाय ‘सजा’ मिली। ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने महिपाल को ही उनके पद से हटाकर किसी और को बिठा दिया।
महिपाल ने एक और चौंकाने वाला खुलासा किया कि चंपत राय का ड्राइवर ‘टिन्नू यादव’ ही वाउचर पर साइन करता था और सारी हेराफेरी उसी की देखरेख में होती थी। चंपत राय को टिन्नू पर इतना भरोसा था कि वह उसके खिलाफ कोई शिकायत सुनना ही नहीं चाहते थे। और तो और, चोरी के सबूत मिटाने के लिए काउंटिंग सेंटर के 8 महीने के सीसीटीवी (CCTV) फुटेज भी डिलीट कर दिए गए!
राम मंदिर ट्रस्ट और चंपत राय पर क्यों उठ रहे हैं गंभीर सवाल?
जब बात इतनी आगे बढ़ गई और मीडिया में बवाल मचा, तो राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा (जिन्होंने 2024 में प्राण-प्रतिष्ठा का पूरा अनुष्ठान कराया था) को इस्तीफा देना पड़ा।
सवाल यह उठ रहा है कि क्या चंपत राय को जानबूझकर बचाया जा रहा है? उनके खिलाफ अब तक एफआईआर (FIR) क्यों दर्ज नहीं हुई? चंपत राय और अनिल मिश्रा दोनों का बैकग्राउंड आरएसएस (RSS) और विश्व हिंदू परिषद (VHP) का है।
वीएचपी के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने इस चोरी को ‘दुर्भाग्यपूर्ण’ बताया है और कहा है कि जो भी दोषी हो, उसे बख्शा नहीं जाना चाहिए और फास्ट ट्रैक कोर्ट में सजा मिलनी चाहिए। हालांकि, उन्होंने चंपत राय का सीधा बचाव करने से परहेज किया।
क्या योगी आदित्यनाथ और चंपत राय के बीच ‘अहंकार’ की लड़ाई है?
इस पूरे मामले का एक राजनीतिक और प्रशासनिक पहलू भी है। राम मंदिर ट्रस्ट में उत्तर प्रदेश सरकार के प्रतिनिधि और अयोध्या के डीएम (DM) भी शामिल हैं। तो क्या सीएम योगी आदित्यनाथ को 2021 से हो रही इस चोरी की भनक नहीं थी?
वरिष्ठ पत्रकार शरत प्रधान का मानना है कि ऐसा हो ही नहीं सकता कि सीएम योगी को इसकी जानकारी न हो।
असल में, सीएम योगी और चंपत राय के बीच रिश्ते कभी अच्छे नहीं रहे। योगी आदित्यनाथ चाहते थे कि ट्रस्ट के फैसलों में उनका दखल हो (चूंकि वे गोरखनाथ पीठ से जुड़े हैं, जिसका राम मंदिर आंदोलन में बड़ा रोल रहा है)। लेकिन चंपत राय ने उन्हें ट्रस्ट से बाहर रखा।
कहा जा रहा है कि अब योगी चाहते हैं कि इस मामले में चंपत राय पर कड़ी कार्रवाई हो, जबकि केंद्र सरकार और कुछ बड़े संगठन इस मामले को सावधानी से हैंडल करने की कोशिश कर रहे हैं। यह एक तरह से दो कद्दावर लोगों के ‘अहंकार’ (Ego) की भी लड़ाई बन चुकी है।
बैकफुट पर RSS और VHP: अब आगे क्या होगा?
राम जन्मभूमि आंदोलन ने ही बीजेपी को सत्ता तक पहुंचाया और आरएसएस (RSS) की विचारधारा को मुख्यधारा में ला खड़ा किया। आरएसएस और वीएचपी हमेशा ‘ईमानदारी और सादगी’ का दावा करते हैं। लेकिन मंदिर के चंदे में हुई इस करोड़ों की चोरी ने इन संगठनों की साख और ईमानदारी (Credibility) पर बहुत गहरा बट्टा लगाया है।
विपक्ष लगातार हमलावर है। समाजवादी पार्टी के नेता पवन पांडे का आरोप है कि एसआईटी (SIT) असली अपराधियों को पकड़ने के लिए नहीं, बल्कि बड़े लोगों को बचाने के लिए बनाई गई है।











