Ram Mandir Donation Case: अयोध्या का भव्य राम मंदिर पूरे देश और दुनिया के करोड़ों हिंदुओं की आस्था का सबसे बड़ा केंद्र है। एक आम भक्त अपनी मेहनत की कमाई में से भगवान राम के लिए खुशी-खुशी दान देता है। लेकिन पिछले कुछ दिनों से राम मंदिर के ‘दानपात्र’ (Donation Boxes) से चढ़ावे और पैसों की चोरी के जो आरोप सामने आ रहे हैं, उसने हर रामभक्त को दुखी और हैरान कर दिया है।
अब यह मामला पुलिस और एसआईटी (SIT) की जांच से आगे बढ़कर अदालत की दहलीज तक पहुंच गया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ (Lucknow Bench) में इस पूरे मामले की सीबीआई (CBI) जांच कराने के लिए एक जनहित याचिका (Public Interest Litigation – PIL) दाखिल की गई है। आइए, एक दोस्त की तरह बिल्कुल आसान भाषा में समझते हैं कि इस याचिका में क्या-क्या मांगें की गई हैं, कोर्ट में सुनवाई कब होगी और याचिकाकर्ता ने किसे-किसे पक्षकार बनाया है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका: CBI जांच और CAG ऑडिट की मांग
राम मंदिर में दान चोरी के मामले की निष्पक्ष जांच के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ में एक जनहित याचिका दाखिल की गई है। इस याचिका की दो सबसे बड़ी और मुख्य मांगें हैं:
सीबीआई (CBI) जांच: याचिकाकर्ता का कहना है कि यह मामला बहुत बड़ा और संवेदनशील है, इसलिए इस पूरे कथित गबन (चोरी) की जांच और केस दर्ज करने का जिम्मा ‘सीबीआई’ को सौंपा जाना चाहिए।
कैग (CAG) से ऑडिट: राम मंदिर के दानपात्रों में जो भी नकद पैसा (Cash), सोने-चांदी के आभूषण या अन्य कीमती चीजें आती हैं, उन सभी का पूरा हिसाब-किताब (ऑडिट) ‘नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक’ (CAG – Comptroller and Auditor General of India) से कराया जाना चाहिए। इससे दान के पैसों में पूरी पारदर्शिता (Transparency) आएगी।
12 जून को दाखिल हुई थी याचिका, अब 6 जुलाई को होगी सुनवाई
आपको बता दें कि यह जनहित याचिका (PIL) अचानक नहीं आई है। इसे पिछले महीने 12 जून 2026 को ही हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ में दाखिल कर दिया गया था।
उस समय अदालतों में ‘ग्रीष्मकालीन अवकाश’ (Summer Vacations) चल रहा था और समय की कमी के कारण इस अहम मुद्दे पर सुनवाई नहीं हो सकी थी। लेकिन अब जब अदालतें दोबारा खुल गई हैं, तो इस याचिका को सोमवार, 6 जुलाई 2026 की ‘वाद सूची’ (Cause List) में सूचीबद्ध (List) कर लिया गया है। इस जनहित याचिका पर न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ल की खंडपीठ (Bench) सुनवाई करेगी।
कौन हैं याचिकाकर्ता और उन्होंने कोर्ट से क्या-क्या मांगा है?
इस जनहित याचिका को एक स्थानीय अधिवक्ता (वकील) मोहित अशोक ने व्यक्तिगत रूप से (In-person) दाखिल किया है।
सीबीआई जांच और कैग ऑडिट के अलावा, अधिवक्ता मोहित अशोक ने अपनी याचिका में राज्य सरकार से एक और अहम मांग की है। उन्होंने कोर्ट से आग्रह किया है कि वह यूपी सरकार को निर्देश दे कि इस मामले की जांच किसी ‘पुलिस अधीक्षक’ (SP – Superintendent of Police) स्तर के वरिष्ठ अधिकारी की देखरेख में ही कराई जाए, ताकि किसी भी तरह की लीपापोती न हो सके।
किसे बनाया गया है पक्षकार?
इस याचिका में कई बड़े संस्थानों को पक्षकार (Respondents) बनाया गया है, जिनमें शामिल हैं:
केंद्र सरकार
राज्य सरकार के सतर्कता विभाग (Vigilance Department) के प्रमुख सचिव
सीबीआई (CBI) के निदेशक
कैग (CAG)
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट (इसके चेयरपर्सन के माध्यम से)
करोड़ों हिंदुओं की आस्था से जुड़ा है मामला
याचिकाकर्ता मोहित अशोक ने कोर्ट के सामने तर्क रखा है कि भगवान राम का मंदिर करोड़ों हिंदुओं की आस्था और विश्वास का प्रतीक है। पिछले कई दिनों से अखबारों और न्यूज़ चैनलों में दानपात्र से चढ़ावे की चोरी और गबन की खबरें छप रही हैं। इन खबरों ने देश-दुनिया में फैले रामभक्तों की भावनाओं को गहरी ठेस पहुंचाई है। लोगों का यह शक दूर करने के लिए इस मामले की एक बेहद निष्पक्ष जांच और पैसों का सख्त ऑडिट होना बहुत जरूरी है।
सोमवार यानी 6 जुलाई का दिन इस मामले के लिए बहुत अहम होने वाला है। अब सबकी नजरें इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ पर टिकी हैं कि क्या वह इस मामले की सीबीआई जांच और कैग से ऑडिट कराने की अनुमति देती है या नहीं। अगर कोर्ट यह आदेश दे देती है, तो राम मंदिर ट्रस्ट और दान की चोरी में शामिल लोगों के लिए मुश्किलें काफी बढ़ सकती हैं। हम इस सुनवाई से जुड़े हर अपडेट को आप तक आसान भाषा में पहुंचाते रहेंगे।









