उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UP-TET) 2026 के दौरान राज्यभर के परीक्षा केंद्रों पर एक बेहद अनोखा और भावुक कर देने वाला नजारा देखने को मिला है। इस परीक्षा में इस बार दो पीढ़ियां एक साथ परीक्षा हॉल में परीक्षा देती नजर आईं। जहाँ एक तरफ नई और युवा पीढ़ी सरकारी स्कूलों में सहायक अध्यापक (सहायक शिक्षक) की नौकरी पाने के लिए परीक्षा दे रही है, वहीं दूसरी तरफ अधेड़ उम्र के शिक्षामित्र अपनी बरसों पुरानी नौकरी को बचाने के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं।
प्रयागराज (Prayagraj) सहित राज्य के विभिन्न जिलों में बने परीक्षा केंद्रों पर 45 से 50 वर्ष की उम्र के शिक्षामित्र अपने बच्चों की उम्र के युवाओं के साथ एक ही कतार में बैठकर पर्चा हल करते दिखाई दिए।
एक तरफ नौकरी पाने का सपना, दूसरी तरफ अस्तित्व बचाने की जंग
परीक्षा केंद्रों के बाहर और भीतर का माहौल इस बार बेहद अलग था। 20 से 22 वर्ष के युवा अभ्यर्थी जहाँ अपनी पहली सरकारी नौकरी पाने का सपना लेकर परीक्षा हॉल में दाखिल हुए, वहीं उनके बगल में बैठे 40 से 50 वर्ष के शिक्षामित्रों के चेहरे पर अपनी वर्तमान नौकरी और परिवार के भविष्य को बचाने की गंभीर चिंता साफ दिखाई दे रही थी।
शिक्षामित्रों का कहना है कि वे पिछले 15 से 20 वर्षों से प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूलों में बच्चों को पढ़ा रहे हैं। उनके पास पढ़ाने का लंबा व्यावहारिक अनुभव है, लेकिन आज उन्हें अपनी नौकरी पर बने रहने के लिए इस लिखित परीक्षा को पास करना अनिवार्य हो गया है। कई केंद्रों पर तो ऐसा भी देखा गया कि माता-पिता और बच्चे एक ही दिन, अलग-अलग कमरों में या एक ही केंद्र पर परीक्षा देने पहुंचे थे।
क्यों शिक्षामित्रों के लिए जरूरी हुई यह परीक्षा?
शिक्षामित्रों के लिए इस उम्र में यूपी-टीईटी परीक्षा देना उनकी मर्जी नहीं बल्कि मजबूरी है। सुप्रीम कोर्ट और सरकार के कड़े दिशा-निर्देशों के अनुसार, प्राथमिक विद्यालयों में सहायक अध्यापक के पद पर नियमित होने या अपने पद को सुरक्षित रखने के लिए सभी कार्यरत शिक्षामित्रों के लिए टीईटी (शिक्षक पात्रता परीक्षा) पास करना अनिवार्य कर दिया गया है।
इस नियम के कारण जो शिक्षामित्र बरसों से पढ़ा रहे हैं लेकिन तकनीकी रूप से टीईटी उत्तीर्ण नहीं हैं, वे अब इस परीक्षा को पास करने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं। उनके लिए यह परीक्षा केवल एक योग्यता परीक्षा नहीं है, बल्कि उनके पूरे जीवन की कमाई, पेंशन और नौकरी के अस्तित्व की लड़ाई बन चुकी है।
उम्र के इस पड़ाव पर पढ़ाई और परीक्षा की दोहरी चुनौती
अधेड़ उम्र के इन शिक्षामित्रों के लिए इस परीक्षा में बैठना और उसे पास करना एक बड़ी चुनौती है। उम्र के इस पड़ाव पर, जब वे पारिवारिक जिम्मेदारियों और बच्चों की शादियों व पढ़ाई के खर्चों से घिरे हैं, उनके लिए दोबारा किताबों की ओर लौटना और प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करना आसान नहीं है।
प्रयागराज के परीक्षा केंद्रों पर मौजूद कई शिक्षामित्रों ने अपनी आपबीती साझा करते हुए बताया कि दिनभर स्कूल में पढ़ाने और घर के काम निपटाने के बाद वे रात-रात भर जागकर टीईटी की तैयारी करते हैं। उनके लिए इस कठिन पाठ्यक्रम को याद करना और युवाओं की गति के साथ परीक्षा हॉल में ओएमआर (OMR) शीट भरना एक दोहरी चुनौती है, लेकिन अपनी नौकरी को बचाने के लिए वे हर संभव प्रयास कर रहे हैं।
FAQ:
प्रश्न 1: यूपी टीईटी (UP-TET) 2026 की परीक्षा में इस बार कौन सा अनोखा नजारा देखने को मिला?
उत्तर: इस बार परीक्षा केंद्रों पर दो अलग-अलग पीढ़ियां एक साथ परीक्षा देती नजर आईं। जहाँ नए युवा उम्मीदवार सहायक अध्यापक की नौकरी पाने के लिए परीक्षा दे रहे थे, वहीं 45 से 50 वर्ष के शिक्षामित्र अपनी बरसों पुरानी नौकरी बचाने के लिए उनके साथ परीक्षा हॉल में बैठे थे।
प्रश्न 2: शिक्षामित्रों के लिए इस उम्र में यूपी टीईटी (UP-TET) परीक्षा उत्तीर्ण करना क्यों अनिवार्य हो गया है?
उत्तर: सुप्रीम कोर्ट और सरकार के कड़े दिशा-निर्देशों के अनुसार, प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में सहायक अध्यापक के पद पर बने रहने या नियमित होने के लिए सभी कार्यरत शिक्षामित्रों के लिए टीईटी (शिक्षक पात्रता परीक्षा) पास करना कानूनी रूप से अनिवार्य कर दिया गया है।
प्रश्न 3: उम्र के इस पड़ाव पर शिक्षामित्रों को इस परीक्षा की तैयारी में किन मुख्य चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है?
उत्तर: इन शिक्षामित्रों के लिए पारिवारिक जिम्मेदारियों, बच्चों की पढ़ाई के खर्चों और दिनभर स्कूल में पढ़ाने के बाद दोबारा कठिन पाठ्यक्रम की तैयारी करना एक बड़ी चुनौती है। उन्हें उम्र के इस पड़ाव पर दोबारा किताबों की ओर लौटकर युवाओं की गति के साथ परीक्षा देना पड़ रहा है।












