NEET Controversy: देश में इन दिनों अगर कोई सबसे बड़ा और गरमाया हुआ मुद्दा है, तो वह है ‘नीट (NEET-UG)’ परीक्षा और छात्रों के भविष्य का सवाल। जब कोई युवा दिन-रात एक करके किसी परीक्षा की तैयारी करता है और फिर उसमें धांधली की खबर आती है, तो दर्द सिर्फ उस छात्र को नहीं, बल्कि उसके पूरे परिवार को होता है।
यही दर्द और गुस्सा आजकल सड़क से लेकर संसद (Parliament) तक गूंज रहा है। इसी मुद्दे पर लोकसभा में चर्चा के दौरान समाजवादी पार्टी (SP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव का एक अलग ही रौद्र रूप देखने को मिला। वे सदन की कार्यवाही के दौरान स्पीकर और सरकार पर बुरी तरह भड़क गए। आइए, एक दोस्त की तरह बिल्कुल आसान भाषा में समझते हैं कि आखिर लोकसभा के अंदर ऐसा क्या हुआ जिसने अखिलेश यादव को इतना नाराज कर दिया और उन्होंने सरकार से क्या तीखे सवाल पूछे हैं।
लोकसभा में क्यों भड़के अखिलेश यादव? (सिर्फ कांग्रेस को समय मिलने पर ऐतराज)
संसद में जब किसी अहम मुद्दे पर बहस होती है, तो हर पार्टी चाहती है कि वह अपनी जनता और वोटरों की बात मजबूती से रखे।
लोकसभा में जब नीट और छात्रों के मुद्दे पर चर्चा हो रही थी, तो स्पीकर की तरफ से सिर्फ कांग्रेस पार्टी और सत्ता पक्ष के संसदीय कार्य मंत्री को ही बोलने का मौका दिया गया। इसी बात पर अखिलेश यादव नाराज हो गए। उन्हें लगा कि इतनी बड़ी समस्या पर सिर्फ दो पार्टियों को सुनकर मामले को रफा-दफा किया जा रहा है।
अखिलेश यादव ने अपनी सीट से खड़े होकर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा, “यह कोई कांग्रेस, समाजवादी पार्टी या बीजेपी की निजी लड़ाई नहीं है। यह पूरे देश के छात्रों और नौजवानों के भविष्य का मुद्दा है। आपने उन्हें (कांग्रेस को) बुला लिया, मंत्री जी से बात कर ली… तो क्या आपस में ही कोई समझौता हो गया है?” उनका सीधा सा मतलब था कि इस मुद्दे पर सदन में मौजूद हर उस नेता को बोलने का हक है, जो युवाओं की आवाज उठाना चाहता है।
‘क्या बेटियों के कपड़े फाड़ेंगे?’ – पुलिस कार्रवाई पर फूटा गुस्सा
हम सभी जानते हैं कि पिछले कई दिनों से नीट परीक्षा को लेकर छात्र दिल्ली की सड़कों और जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। कई बार पुलिस और छात्रों के बीच भारी धक्का-मुक्की और लाठीचार्ज की खबरें भी आई हैं।
इस पुलिसिया कार्रवाई पर भी अखिलेश यादव ने अपना कड़ा रुख अख्तियार किया। उन्होंने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग रख रहे छात्रों की आवाज सदन में नहीं सुनी जाएगी, तो विपक्ष भी उनके साथ सड़क पर उतरने को मजबूर हो जाएगा।
पुलिस के सख्त रवैये पर सवाल उठाते हुए अखिलेश ने बहुत ही तीखे शब्दों में पूछा, “छात्रों के साथ सड़क पर जिस तरह का हिंसक और बुरा व्यवहार हो रहा है, वह निंदनीय है। क्या आप प्रदर्शन कर रही बेटियों के कपड़े फाड़ेंगे?” उनका यह बयान दिखाता है कि पुलिस द्वारा छात्रों को खदेड़ने के तरीके से विपक्ष कितना नाराज है।
पीएम आवास के बाहर प्रदर्शन की क्या थी असली वजह?
हाल ही में विपक्ष के कई नेताओं और छात्रों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आवास के बाहर भी एक बड़ा विरोध प्रदर्शन किया था, जिसे लेकर काफी सियासी बवाल हुआ था। सत्ता पक्ष ने इसे ‘उपद्रव’ बताया था।
संसद में अखिलेश यादव ने इस प्रदर्शन की वजह भी साफ कर दी। उन्होंने कहा कि विपक्ष को कोई शौक नहीं है कि वह सड़क पर जाकर प्रदर्शन करे। उन्होंने स्पष्ट किया, “हम मजबूरी में प्रधानमंत्री आवास तक गए थे। अगर प्रधानमंत्री जी खुद संसद में आकर इस इतने बड़े मुद्दे पर अपना बयान दे देते और छात्रों को भरोसा दिलाते, तो हमें वहां जाने की जरूरत ही नहीं पड़ती।” उन्होंने यह सीधा सवाल पूछा कि आखिर पीएम सदन के अंदर नीट के मुद्दे पर खामोश क्यों हैं?
आम छात्रों और युवाओं के लिए इस लड़ाई के क्या हैं मायने?
राजनीति अपनी जगह है, लेकिन अगर हम एक आम छात्र के नजरिए से देखें, तो यह बहस बहुत जरूरी है। जब संसद में युवाओं के हक की बात होती है, तो सिस्टम पर दबाव बनता है। लाखों बच्चे डॉक्टर या इंजीनियर बनने का सपना लेकर कोटा, दिल्ली या प्रयागराज में सालों तैयारी करते हैं। ऐसे में जब संसद में अखिलेश यादव या कोई भी नेता यह कहता है कि “छात्र हम सभी के हैं”, तो इससे युवाओं को एक उम्मीद मिलती है कि उनकी मेहनत को यूं ही बर्बाद नहीं होने दिया जाएगा और परीक्षा प्रणाली (Exam System) में सुधार के लिए कड़े नियम बनाए जाएंगे।












