पश्चिम बंगाल की राजनीति से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई के ठीक एक दिन बाद, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के सबसे पुराने और करीबी सहयोगियों में से एक मदन मित्रा (Madan Mitra) सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) के विद्रोही धड़े में शामिल हो गए हैं। ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में जारी राजनीतिक उथल-पुथल के बीच मदन मित्रा के इस फैसले से बंगाल की राजनीति में हलचल तेज हो गई है।
ईडी की कार्रवाई के अगले ही दिन मदन मित्रा का बड़ा फैसला
अभिषेक चक्रवर्ती और रविक भट्टाचार्य की रिपोर्ट के अनुसार, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा मदन मित्रा से जुड़े किसी मामले या उन पर की गई कार्रवाई के ठीक 24 घंटे बाद यह घटनाक्रम सामने आया है। मदन मित्रा, जो लंबे समय से ममता बनर्जी के वफादार रहे हैं और टीएमसी के वरिष्ठ नेताओं में गिने जाते हैं, ने अचानक पार्टी के विद्रोही गुट का दामन थाम लिया है। उनके इस कदम को ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है।
ममता बनर्जी के सबसे पुराने सहयोगियों में से हैं मदन मित्रा
मदन मित्रा तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के बेहद अनुभवी और ममता बनर्जी के शुरुआती सहयोगियों में से एक माने जाते हैं। वर्षों से पार्टी और शीर्ष नेतृत्व के साथ खड़े रहे इस वरिष्ठ नेता का अचानक विद्रोही गुट में जाना काफी महत्वपूर्ण है। पश्चिम बंगाल और कोलकाता की राजनीति में मदन मित्रा की मजबूत पकड़ रही है, और उनका यह फैसला तृणमूल कांग्रेस के भीतर मचे आंतरिक घमासान का सीधा परिणाम है।
विद्रोही धड़े में शामिल होने से गरमाई बंगाल की राजनीति
मदन मित्रा द्वारा विद्रोही तृणमूल धड़े में शामिल होने के फैसले से पश्चिम बंगाल की राजनीति पूरी तरह से गरमा गई है। ईडी की कार्रवाई के तुरंत बाद लिए गए इस फैसले ने राजनीतिक गलियारों में कई तरह के सवालों को जन्म दे दिया है। मदन मित्रा के इस कदम पर अभी तक तृणमूल कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व या मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। विद्रोही धड़े की सक्रियता बढ़ने से पार्टी के भीतर आंतरिक कलह और गहराने की चर्चा तेज हो गई है।










