US-Iran War: अंतरराष्ट्रीय राजनीति और युद्ध के मैदान से एक बहुत ही बड़ी और चिंताजनक खबर सामने आ रही है। अमेरिका और ईरान के बीच जो तनाव पिछले कुछ समय से चल रहा था, वह अब एक फुल-टाइम युद्ध का रूप ले चुका है। दोनों देश अब छिपकर नहीं, बल्कि सीधे तौर पर एक-दूसरे के सैन्य ठिकानों पर बम बरसा रहे हैं।
सोमवार (13 जुलाई) को ईरान ने एक बहुत बड़ा कदम उठाते हुए मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) में मौजूद अमेरिका के कई अहम ठिकानों पर एक साथ मिसाइल और ड्रोन से हमला कर दिया है। यह ईरान की तरफ से अमेरिका को दिया गया एक सीधा और कड़ा जवाब है। आइए, एक दोस्त की तरह बिल्कुल आसान भाषा में समझते हैं कि अचानक यह जंग इतनी तेज कैसे हो गई, ईरान ने किन देशों में अमेरिकी अड्डों पर हमला किया है और इस पूरी घटना के बाद अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को क्या चेतावनी दी गई है।
कैसे शुरू हुआ यह नया विवाद? (अमेरिका का 5 राज्यों पर हमला)
इस ताज़ा हमले को समझने के लिए हमें थोड़ा पीछे जाना होगा। दरअसल, ईरान का यह हमला कोई एकतरफा कदम नहीं है, बल्कि यह एक ‘पलटवार’ यानी जवाबी कार्रवाई है।
कुछ ही समय पहले, अमेरिका ने ईरान को भारी नुकसान पहुंचाने के इरादे से उसके पांच अलग-अलग राज्यों (प्रांतों) पर एक साथ जोरदार हमला कर दिया था। अमेरिका के इस बड़े अटैक के बाद से ही यह तय माना जा रहा था कि ईरान इसका जवाब जरूर देगा। ईरान ने भी साफ कर दिया था कि वह अपने ऊपर हुए इस हमले को यूं ही नहीं भूलेगा।
ईरान ने कैसे लिया अपना बदला? (3 देशों में एक साथ अटैक)
अमेरिका के हमले के बाद, सोमवार (13 जुलाई) को ईरान ने अपना बदला पूरा किया। ईरान की सबसे ताकतवर सैन्य टुकड़ी ‘इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स’ (IRGC) ने आधिकारिक तौर पर सामने आकर इस बात का दावा किया है कि उन्होंने मिडिल ईस्ट में अमेरिका के तीन अलग-अलग ठिकानों पर एक साथ हमला किया है।
ईरान ने अमेरिका को नुकसान पहुंचाने के लिए कुवैत, बहरीन और जॉर्डन को अपना निशाना बनाया। इन तीनों ही देशों में अमेरिका के बड़े सैन्य अड्डे (Military Bases) मौजूद हैं। ईरान ने इन अड्डों पर अपने घातक ड्रोन और मिसाइलों से ताबड़तोड़ हमले किए हैं।
किन अमेरिकी ठिकानों को बनाया गया निशाना?
ईरान ने सिर्फ हवाई फायर नहीं किए हैं, बल्कि उसने अमेरिका की उन जगहों पर हमला किया है, जहां से उसे सबसे ज्यादा दर्द महसूस हो। आईआरजीसी (IRGC) की रिपोर्ट के मुताबिक:
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जॉर्डन का प्रिंस हसन एयरबेस: जॉर्डन में मौजूद अमेरिका के ‘प्रिंस हसन एयरबेस’ पर ईरान ने सटीक मिसाइलें दागी हैं। यहां ईरान का मुख्य निशाना इस एयरबेस के फ्यूल टैंक (जहां हवाई जहाजों का ईंधन रखा जाता है) और मिसाइल डिपो (हथियारों का गोदाम) थे।
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बहरीन में ड्रोन कमांड सेंटर: बहरीन में अमेरिका का एक बहुत अहम ‘ड्रोन कमांड सेंटर’ है, जहां से अमेरिका पूरे इलाके में अपने ड्रोन्स को कंट्रोल करता है। ईरान ने दावा किया है कि उसने इस कमांड सेंटर पर जोरदार धमाका किया है।
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कुवैत: इसके अलावा कुवैत में भी अमेरिकी सेना के ठिकानों पर हमले किए गए हैं, ताकि वहां मौजूद अमेरिकी सेना पर दबाव बनाया जा सके।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को ईरान की खुली चेतावनी
इन हमलों के बाद ईरान सिर्फ यहीं नहीं रुका है। उसने अमेरिका और सीधे तौर पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को एक बहुत ही सख्त चेतावनी दे डाली है।
ईरान ने कहा है कि यह हमला तो सिर्फ एक शुरुआत और उनके (अमेरिका के) किए गए हमलों का जवाब है। ईरान ने साफ शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर अपने हमले तुरंत नहीं रोके, तो आने वाले समय में ईरान मिडिल ईस्ट में मौजूद अमेरिका के बाकी ठिकानों को भी पूरी तरह से तबाह कर देगा। यह बयान दिखाता है कि ईरान इस बार पीछे हटने के मूड में बिल्कुल नहीं है।
आगे क्या हो सकता है?
कुल मिलाकर हालात यह हैं कि मिडिल ईस्ट एक बार फिर से बारूद के ढेर पर बैठ गया है। अमेरिका का 5 राज्यों पर हमला और फिर ईरान का कुवैत, बहरीन और जॉर्डन में पलटवार— यह बताता है कि बात अब कूटनीति (बातचीत) से बहुत आगे निकल चुकी है। अब पूरी दुनिया की नजरें अमेरिका और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के अगले कदम पर टिकी हैं। अगर अमेरिका ने इसका फिर से कोई सैन्य जवाब दिया, तो यह युद्ध और भी खतरनाक हो सकता है, जिसका सीधा असर दुनिया भर के व्यापार और कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ेगा।













