International News: अंतरराष्ट्रीय राजनीति में कब हालात बिगड़ जाएं, इसका अंदाजा लगाना बहुत मुश्किल है। अभी कुछ ही दिनों पहले दुनिया ने राहत की सांस ली थी, जब अमेरिका और ईरान के बीच एक शांति समझौता होने की खबरें आ रही थीं। लेकिन अब हालात बिल्कुल पलट चुके हैं।
मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) में एक बार फिर युद्ध की आग भड़क उठी है। मंगलवार (14 जुलाई) को यह तनाव एक बेहद खतरनाक स्तर पर पहुंच गया, जब अमेरिका और ईरान ने एक-दूसरे के सैन्य ठिकानों पर ताबड़तोड़ हमले किए। इस जंग की गूंज सिर्फ आसमान में नहीं, बल्कि शेयर बाजार और कच्चे तेल की कीमतों में भी सुनाई दे रही है। आइए, एक दोस्त की तरह बिल्कुल आसान भाषा में समझते हैं कि अचानक यह शांति कैसे भंग हुई, दोनों देशों ने कहां-कहां हमले किए हैं और इस लड़ाई का दुनिया और हमारी जेब पर क्या असर पड़ने वाला है।
आखिर क्यों टूट गया शांति समझौता? (जंग की असली वजह)
शायद आप सोच रहे होंगे कि जब सब कुछ ठीक हो रहा था, तो अचानक बम क्यों गिरने लगे?
दरअसल, यह पूरा विवाद समुद्र के एक बेहद अहम रास्ते ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’ (Strait of Hormuz) से शुरू हुआ। शांति समझौते पर सहमति बनने के बावजूद, ईरान ने हॉर्मुज के इलाके में दो व्यापारिक जहाजों पर हमला कर दिया। अमेरिका ने इसे समझौते का खुला उल्लंघन माना। जहाजों पर हुए इसी हमले का जवाब देने के लिए अमेरिका ने एयरस्ट्राइक की, जिसके बाद दोनों देशों के बीच युद्ध की आग फिर से भड़क उठी।
अमेरिका का 5 घंटे का ऑपरेशन: कहां-कहां गिरे बम?
अमेरिकी सेना के ‘सेंट्रल कमांड’ (CENTCOM) ने आधिकारिक तौर पर बताया है कि उन्होंने 13 जुलाई की रात को ईरान के खिलाफ एक बहुत बड़ा सैन्य ऑपरेशन चलाया।
यह ऑपरेशन लगातार 5 घंटे तक चला। इस दौरान अमेरिकी सेना ने ईरान के 6 से ज्यादा प्रमुख शहरों और सैन्य ठिकानों पर सटीक हमले किए। अमेरिका के निशाने पर बुशेहर, चाबहार, जास्क, कोनारक, अबू मूसा और बंदर अब्बास जैसे इलाके थे। अमेरिका का साफ कहना है कि उसने ये हमले इसलिए किए हैं ताकि ईरान के डिफेंस सिस्टम, मिसाइल डिपो, नेवी और ड्रोन ठिकानों को पूरी तरह से तबाह किया जा सके। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में अपने 50,000 से ज्यादा सैनिकों को ‘हाई अलर्ट’ पर रखा हुआ है।
ईरान का पलटवार: बहरीन में अमेरिकी बेस पर किया हमला
ईरान भी इस मामले में पीछे हटने वाला नहीं था। अमेरिका के 5 घंटे चले इस ऑपरेशन के बाद ईरान ने भी करारा पलटवार किया।
ईरान की सबसे ताकतवर सैन्य टुकड़ी ‘इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स’ (IRGC) ने दावा किया है कि उन्होंने बहरीन में मौजूद अमेरिका के ‘अल-जुफैर बेस’ को अपना निशाना बनाया है। ईरान ने वहां अमेरिकी हथियारों के भंडार, सैटेलाइट कम्युनिकेशन सेंटर और अमेरिकी सैनिकों से जुड़ी एक बिल्डिंग पर धमाके किए। इतना ही नहीं, ईरान ने अमेरिका के एक बेहद एडवांस ‘MQ-1 ड्रोन’ को भी मार गिराने का दावा किया है।
आम आदमी की जेब पर असर: क्यों बढ़ रहे हैं कच्चे तेल के दाम?
अब आप सोचेंगे कि अमेरिका और ईरान लड़ रहे हैं, तो इसमें हमारा क्या नुकसान है? दोस्तों, इस युद्ध का सीधा असर हमारी और आपकी जेब पर पड़ने वाला है।
जिस इलाके (हॉर्मुज) में यह तनाव चल रहा है, वहां से दुनिया भर का तेल गुजरता है। युद्ध के इस खतरे को देखते हुए वैश्विक बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में अचानक 2 प्रतिशत का बड़ा उछाल आ गया है।
-
ब्रेंट क्रूड (Brent Crude): इसकी कीमत बढ़कर लगभग 85 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है।
-
डब्ल्यूटीआई क्रूड (WTI Crude): यह करीब 80 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया है।
अगर कच्चे तेल की कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं, तो आने वाले दिनों में हमारे देश में भी पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ सकते हैं। जब फ्यूल महंगा होता है, तो ट्रांसपोर्टेशन महंगा होता है, जिससे रोजमर्रा की चीजों (राशन, सब्जियां आदि) की कीमतों में भी महंगाई आ जाती है।
इस पूरे युद्ध की 10 सबसे बड़ी और अहम बातें
अगर आप इस पूरे घटनाक्रम को शॉर्ट में समझना चाहते हैं, तो ये 10 पॉइंट्स आपके काम आएंगे:
-
अमेरिका ने ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर लगातार 5 घंटे तक बमबारी की।
-
अमेरिका के निशाने पर बुशेहर, चाबहार, जास्क, कोनारक, अबू मूसा और बंदर अब्बास जैसे अहम इलाके रहे।
-
अमेरिका का मुख्य लक्ष्य ईरान की मिसाइल, ड्रोन और नेवी ताकत को खत्म करना था।
-
मिडिल ईस्ट में अमेरिका के 50 हजार से ज्यादा जवान इस वक्त हाई अलर्ट पर हैं।
-
ईरान (IRGC) ने पलटवार करते हुए बहरीन के ‘अल-जुफैर बेस’ पर अमेरिकी ठिकानों पर हमला किया।
-
ईरान ने अमेरिका के दो सुपर ऑयल टैंकरों पर भी हमला करने का दावा किया है।
-
यूएई (UAE) ने आरोप लगाया है कि हॉर्मुज क्षेत्र में उसके दो तेल टैंकरों को भी निशाना बनाया गया है।
-
संयुक्त राष्ट्र (UN) में ईरान ने अमेरिका पर शांति समझौते को कमजोर करने का आरोप लगाया है।
-
इस युद्ध के कारण दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमतों में 2% की तेजी आई है।
-
जहाजों पर हमलों के कारण समुद्री व्यापार और फ्यूल की सप्लाई चेन पर बहुत बड़ा संकट खड़ा हो गया है।
कुल मिलाकर हालात यह हैं कि मिडिल ईस्ट एक बार फिर से बारूद के ढेर पर बैठ गया है। शांति समझौते का टूटना और सीधे तौर पर सैन्य ठिकानों को निशाना बनाना एक बहुत बड़े युद्ध की आहट दे रहा है। अगर यह तनाव जल्द शांत नहीं हुआ, तो दुनिया को न सिर्फ एक सुरक्षा संकट का सामना करना पड़ेगा, बल्कि महंगाई और तेल संकट जैसी बड़ी आर्थिक चुनौतियों से भी जूझना पड़ेगा। अब देखना यह है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस युद्ध को रोकने के लिए क्या कदम उठाता है।













