NEET Protest: दिल्ली मेट्रो को राजधानी की ‘लाइफलाइन’ कहा जाता है। ज़रा सोचिए, अगर किसी दिन अचानक दिल्ली के 16 प्रमुख मेट्रो स्टेशनों के दरवाजे आम जनता के लिए बंद कर दिए जाएं, तो क्या होगा? जाहिर सी बात है, पूरे शहर में अफरा-तफरी मच जाएगी। इन दिनों दिल्ली में बिल्कुल ऐसा ही हो रहा है।
नीट (NEET-UG) पेपर लीक मामले को लेकर देश के युवाओं का गुस्सा अब थामे नहीं थम रहा है। पिछले एक महीने से ज्यादा समय से दिल्ली के जंतर-मंतर पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के नेतृत्व में एक विशाल छात्र आंदोलन चल रहा है। भीड़ को जंतर-मंतर पहुंचने से रोकने के लिए पुलिस और प्रशासन ने मेट्रो स्टेशनों को बंद करने का सहारा लिया है। लेकिन सरकार के इस कदम ने आग में घी डालने का काम किया है। आइए, एक दोस्त की तरह बिल्कुल आसान भाषा में समझते हैं कि इस मेट्रो बंदी पर सीजेपी ने क्या कड़ा एतराज जताया है, उनकी मुख्य मांग क्या है और जंतर-मंतर पर इस वक्त जमीनी हालात कैसे हैं।
दिल्ली में अचानक क्यों बंद हुए 16 मेट्रो स्टेशन?
किसी भी बड़े आंदोलन में जब भीड़ बढ़ने लगती है, तो पुलिस सबसे पहले उन रास्तों को ब्लॉक करती है जहां से लोग धरना स्थल तक पहुंच सकते हैं।
जंतर-मंतर पर देश भर से युवा और छात्र लगातार पहुंच रहे हैं। इसी भीड़ को कंट्रोल करने और दिल्ली की कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन ने एक बड़ा कदम उठाते हुए 16 मेट्रो स्टेशनों को बंद कर दिया। इसका मकसद यह था कि जब मेट्रो ही नहीं चलेगी, तो प्रदर्शनकारी छात्र आसानी से धरना स्थल (जंतर-मंतर) तक नहीं पहुंच पाएंगे और भीड़ खुद-ब-खुद कम हो जाएगी।
CJP का पीएम मोदी पर सीधा वार: ‘रोज-रोज का ड्रामा बंद करें’
प्रशासन का यह ‘मेट्रो बंद करने वाला प्लान’ कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) को बिल्कुल रास नहीं आया। सीजेपी ने इस कदम को सरकार की घबराहट बताया और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर अपनी तीखी प्रतिक्रिया दी।
सीजेपी ने अपने पोस्ट में सीधे तौर पर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संबोधित करते हुए लिखा, “इसका क्या मतलब है? मेट्रो स्टेशनों को बंद करने का ये रोज-रोज का ड्रामा क्यों किया जा रहा है?”
पार्टी ने सरकार को खुली चुनौती देते हुए साफ कर दिया कि पुलिस और प्रशासन चाहे जितने भी रास्ते बंद कर ले या जो भी तरकीब अपना ले, “लोग (छात्र) जंतर-मंतर पर आकर ही रहेंगे।” उनका यह बयान दिखाता है कि युवाओं का हौसला पुलिस की इस नाकेबंदी से टूटने वाला नहीं है।
एक ही मांग पर अड़े हैं छात्र: ‘धर्मेंद्र प्रधान को हटाइए’
आखिर ये हजारों युवा एक महीने से सड़क पर क्यों बैठे हैं? इनकी मांग बहुत ही सीधी और स्पष्ट है। नीट पेपर लीक जैसी बड़ी धांधली ने लाखों होनहार छात्रों के भविष्य पर सवालिया निशान लगा दिया है।
सीजेपी और प्रदर्शन कर रहे छात्रों का कहना है कि जब तक इस पूरे सिस्टम की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को उनके पद से नहीं हटाया जाता, तब तक यह आंदोलन खत्म नहीं होगा। अपने ‘एक्स’ पोस्ट में भी सीजेपी ने पीएम मोदी से यही अपील की है— “मोदी जी, सीधे धर्मेंद्र प्रधान को हटाइए और मामले को यहीं खत्म करिए।” छात्रों का तर्क है कि जब तक शीर्ष पद पर बैठे लोगों की जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक शिक्षा व्यवस्था में सुधार नहीं आ सकता।
जंतर-मंतर पर तनाव: पुलिस और युवाओं के बीच क्यों हो रहा है टकराव?
यह आंदोलन अब सिर्फ शांतिपूर्ण धरने तक सीमित नहीं रह गया है। पिछले तीन-चार दिनों से जंतर-मंतर और उसके आस-पास के इलाकों का माहौल काफी तनावपूर्ण बना हुआ है।
हजारों की संख्या में पहुंच रहे युवाओं को रोकने के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। जगह-जगह लोहे के बड़े-बड़े बैरिकेड्स लगा दिए गए हैं। जब छात्रों ने आगे बढ़ने की कोशिश की, तो पुलिस और युवाओं के बीच तीखी झड़प और टकराव देखने को मिला। कई बार हालात बेकाबू होते नजर आए। पुलिस का काम कानून-व्यवस्था बनाए रखना है, लेकिन छात्रों का गुस्सा इस बात पर है कि सरकार उनकी बात सुनने के बजाय उन्हें डंडों और बैरिकेड्स के जोर पर दबाने की कोशिश कर रही है।
आम जनता पर क्या पड़ रहा है असर?
इस पूरे सियासी और छात्र आंदोलन का एक बड़ा खामियाजा दिल्ली की आम जनता को भी भुगतना पड़ रहा है। 16 मेट्रो स्टेशनों के अचानक बंद हो जाने से ऑफिस जाने वाले लोगों, मरीजों और आम यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जो सफर मिनटों में तय होता था, उसके लिए अब लोगों को जाम से जूझते हुए घंटों बसों और कैब में धक्के खाने पड़ रहे हैं।











