Delhi Police Vs Akhilesh Yadav: राजनीति में विरोध प्रदर्शन होना कोई नई बात नहीं है। जब भी कोई बड़ा मुद्दा होता है, तो विपक्ष का काम ही है सड़क पर उतरकर अपनी आवाज उठाना। लेकिन जब देश के सबसे बड़े विपक्षी नेताओं के साथ सड़क पर पुलिस धक्का-मुक्की करने लगे और उनके कपड़े फाड़ने की नौबत आ जाए, तो सवाल उठना लाजमी है।
हाल ही में दिल्ली में कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला, जिसने राजनीतिक गलियारों में एक नई बहस छेड़ दी है। छात्रों के मुद्दे पर प्रधानमंत्री आवास के बाहर प्रदर्शन कर रहे विपक्षी नेताओं को दिल्ली पुलिस ने जबरन हिरासत में लिया। इस दौरान समाजवादी पार्टी (सपा) के मुखिया अखिलेश यादव भी वहां मौजूद थे। बुधवार को संसद भवन के बाहर पत्रकारों से बात करते हुए अखिलेश यादव ने दिल्ली पुलिस पर बहुत ही गंभीर और हैरान करने वाले आरोप लगाए हैं।
आइए, एक दोस्त की तरह बिल्कुल आसान भाषा में समझते हैं कि मंगलवार को असल में क्या हुआ था, अखिलेश यादव के कुर्ते वाला बयान क्या है और उन्होंने पुलिस की ट्रेनिंग पर क्यों सवाल उठाए हैं।
क्या है पूरा मामला? (छात्रों के लिए सड़क पर उतरा विपक्ष)
इस पूरे विवाद की शुरुआत छात्रों के आंदोलन से जुड़ी है। देश में चल रहे शिक्षा व्यवस्था के मुद्दों और पुलिसिया कार्रवाई के विरोध में विपक्ष ने एकजुट होकर सरकार को घेरने का प्लान बनाया था।
मंगलवार को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस के तमाम सांसद और कार्यकर्ता प्रधानमंत्री आवास के बाहर धरना प्रदर्शन करने पहुंचे थे। राहुल गांधी के बुलावे पर थोड़ी ही देर में अखिलेश यादव भी अपने समर्थकों के साथ वहां पहुंच गए। जैसे ही इन बड़े नेताओं का जमावड़ा वहां लगा, दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा का हवाला देते हुए प्रदर्शनकारियों को वहां से हटाने की कोशिश शुरू कर दी। इसी दौरान पुलिस और नेताओं के बीच भारी धक्का-मुक्की हुई और पुलिस राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और अखिलेश यादव को जबरन उठाकर ले गई (हिरासत में लिया)।
‘गांधी आश्रम का कुर्ता था, इसलिए बच गया’: अखिलेश यादव
बुधवार को जब अखिलेश यादव ने मीडिया से इस घटना का जिक्र किया, तो उनका गुस्सा साफ नजर आ रहा था। उन्होंने बताया कि हिरासत में लेते समय पुलिस का रवैया बेहद खराब था।
अखिलेश यादव ने अपनी चिर-परिचित शैली में कहा, “मेरे कपड़े पकड़ रहे थे पुलिस वाले। मैंने उसे खुद देखा और टोकते हुए कहा कि भाई तू कुर्ता क्यों फाड़ रहा है पुलिस वाले?”
उन्होंने मुस्कुराते हुए लेकिन तंज कसते हुए आगे कहा, “मेरा कुर्ता मजबूत था, गांधी आश्रम का बना था, इसलिए वो फटा नहीं। मेरी सदरी (जैकेट) भी मजबूत थी, वो भी बच गई। अगर कपड़े थोड़े भी कमजोर होते, तो दिल्ली पुलिस ने मेरा कुर्ता फाड़ ही दिया था।”
उनका यह ‘गांधी आश्रम’ वाला बयान सोशल मीडिया पर काफी चर्चा बटोर रहा है, जो सीधे तौर पर पुलिस की जोर-जबरदस्ती की पोल खोलता है।
पुलिस की ट्रेनिंग पर उठे तीखे सवाल
अखिलेश यादव सिर्फ यहीं नहीं रुके। उन्होंने पुलिसकर्मियों की कार्यप्रणाली और उनकी ट्रेनिंग पर सीधा सवाल खड़ा कर दिया।
उन्होंने पूछा कि आखिर पुलिस की ट्रेनिंग में यह कहां से आ गया कि आप प्रदर्शनकारियों के कपड़े फाड़ने लगेंगे? उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि वह उस पुलिस वाले की शक्ल अच्छे से पहचान गए हैं जिसने उनका कुर्ता पकड़ा था। अखिलेश ने कहा, “मैंने जैसे ही उसका हाथ पकड़ा, तो वो वहां से भाग गया। अगर आज उस पुलिस वाले को मेरे सामने खड़ा कर दिया जाए, तो मैं उसे तुरंत पहचान लूंगा कि किसने मेरे कपड़े पकड़े थे।” उन्होंने यह भी कहा कि इस पूरी घटना की तस्वीरें और वीडियो मौजूद हैं, जो पुलिस की सच्चाई बताते हैं।
राहुल गांधी को चोट और सांसदों से बदसलूकी
इस धक्का-मुक्की में सिर्फ अखिलेश यादव ही परेशान नहीं हुए। उन्होंने बताया कि पुलिस की इस ‘जबरदस्ती’ के दौरान राहुल गांधी को भी चोट लग गई।
अखिलेश यादव ने सवाल उठाया कि देश के इतने बड़े नेताओं (जैसे नेता प्रतिपक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री) के साथ जब ऐसा व्यवहार हो रहा है, तो आम जनता का क्या हाल होता होगा? उन्होंने यह भी कहा कि समाजवादी पार्टी के अन्य सांसदों के साथ भी पुलिस ने बहुत बुरा बर्ताव किया। विपक्षी दलों का कहना है कि पुलिस का यह रवैया लोकतंत्र में विरोध करने के अधिकार को दबाने जैसा है।









