BAT-BMS App: सोचिए आप किसी ई-रिक्शा (E-rickshaw) में बैठकर अपने ऑफिस या बाजार जा रहे हैं। अचानक से सड़क के किनारे खड़ा एक लड़का अपने मोबाइल में कुछ दबाता है और आपका रिक्शा झटके से बीच सड़क पर बंद हो जाता है। ड्राइवर परेशान कि आखिर हुआ क्या और आप भी घबरा जाते हैं।
आजकल सोशल मीडिया पर ऐसे ही कई वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं। इन वीडियो में लोग एक मोबाइल ऐप के जरिए चलते हुए ई-रिक्शे को मजे-मजे में बंद कर देते हैं। इस घटना ने उन लोगों की टेंशन बढ़ा दी है जिनके पास इलेक्ट्रिक स्कूटर (E-Scooter) या लाखों की इलेक्ट्रिक कार (EV) है। सबके मन में एक ही सवाल है— जब एक ऐप से ई-रिक्शा रुक सकता है, तो क्या मेरी इलेक्ट्रिक कार या स्कूटर भी हैक करके रोका जा सकता है? आइए, एक दोस्त की तरह बिल्कुल आसान भाषा में समझते हैं कि इस चीनी ऐप का खेल क्या है और आपकी गाड़ी कितनी सुरक्षित है।
कैसे काम करता है यह पूरा खेल? (BAT-BMS ऐप का सच)
वायरल वीडियो में लोग जिस ऐप का इस्तेमाल कर रहे हैं, उसका नाम है BAT-BMS। यह चीन में बनाया गया एक ऐप है।
अब सबसे मजेदार बात यह है कि इस ऐप को किसी का ई-रिक्शा रोकने या हैक करने के लिए नहीं बनाया गया था। इसका असली काम है बैटरी की सेहत (Health) चेक करना और उसकी मेंटेनेंस को आसान बनाना। लेकिन, हमारे यहां कुछ खुराफाती लोगों ने इस काम के ऐप का गलत इस्तेमाल करना शुरू कर दिया और वीडियो बनाकर वायरल कर दिए।
बिना तार जुड़े बीच सड़क पर कैसे रुक जाता है ई-रिक्शा?
यह सवाल आपके मन में जरूर आ रहा होगा कि फोन से रिक्शे की बैटरी कैसे कनेक्ट हो जाती है? इसका जवाब है— ब्लूटूथ (Bluetooth) और BMS।
ज्यादातर सस्ते ई-रिक्शों में लिथियम-आयन (Lithium-ion) बैटरी लगी होती है। इन बैटरियों के अंदर एक छोटा सा इलेक्ट्रॉनिक दिमाग होता है, जिसे ‘बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम’ (BMS) कहते हैं। यह सिस्टम देखता है कि बैटरी में कितना चार्ज बचा है या बैटरी कहीं गर्म तो नहीं हो रही।
सस्ती चीनी बैटरियों में इस BMS के साथ ब्लूटूथ लगा होता है। अगर इस ब्लूटूथ में कोई पासवर्ड (Password) या पिन (PIN) नहीं लगा है, तो यह बिल्कुल उस खुले वाई-फाई (Wi-Fi) की तरह हो जाता है जिससे कोई भी जुड़ सकता है।
जब कोई शख्स BAT-BMS ऐप खोलकर 10-15 मीटर के दायरे में खड़ा होता है, तो ऐप उस खुली बैटरी को ढूंढ लेता है और एक क्लिक में कनेक्ट हो जाता है। ऐप के अंदर एक ‘डिस्चार्ज स्विच’ (पावर कंट्रोल) होता है। जैसे ही वह शख्स अपने फोन से इसे ‘ऑफ’ करता है, बैटरी से मोटर तक करंट जाना बंद हो जाता है और रिक्शा अचानक रुक जाता है।
रिक्शा की बैटरी में पासवर्ड या लॉक क्यों नहीं होता?
आप सोचेंगे कि जब इतनी बड़ी खामी है, तो इसमें पासवर्ड क्यों नहीं लगाते?
दरअसल, ई-रिक्शा चलाने वाले ज्यादातर लोग गरीब और दिहाड़ी मजदूर होते हैं, जिन्हें भारी-भरकम तकनीक की समझ नहीं होती। कई लोग तो रिक्शा किराए पर लेकर चलाते हैं। ऐसे में बैटरी का चार्ज या हेल्थ चेक करने में मैकेनिक या ड्राइवर को कोई दिक्कत न हो, इसलिए कंपनियां इनमें पासवर्ड या पिन नहीं लगाती हैं। कंपनियों ने उनकी सुविधा के लिए इसे खुला छोड़ा था, लेकिन किसी ने सोचा नहीं था कि लोग इसका ऐसा गलत इस्तेमाल करेंगे।
(ध्यान दें: जो पुराने ई-रिक्शा लेड-एसिड (Lead-Acid) वाली भारी बैटरियों से चलते हैं, उनमें यह ऐप काम नहीं करता क्योंकि उनमें ऐसा सिस्टम ही नहीं होता।)
क्या आपकी इलेक्ट्रिक कार या ई-स्कूटर को भी ऐसे बंद किया जा सकता है?
अब आते हैं सबसे बड़े और जरूरी सवाल पर। क्या इसी ऐप से कोई आपकी 15 लाख की नेक्सॉन ईवी या 1 लाख के ओला/एथर स्कूटर को रोक सकता है?
इसका सीधा जवाब है— बिल्कुल नहीं! आपको पैनिक करने या घबराने की कोई जरूरत नहीं है।
इलेक्ट्रिक कारों (Electric Cars) और अच्छी कंपनियों के ई-स्कूटर में बहुत एडवांस्ड और सुरक्षित सिस्टम लगा होता है। उनकी बैटरी के BMS में तगड़ी सुरक्षा होती है। उनमें पासवर्ड लगा होता है और वे सीधे इंटरनेट या क्लाउड (Cloud Connection) से जुड़े होते हैं। कारों में तो अपना एक कंप्यूटर होता है जो पूरी गाड़ी को कंट्रोल करता है। इसलिए कोई राह चलता इंसान अपने फोन का ब्लूटूथ खोलकर आपकी कार या अच्छे स्कूटर की बैटरी बंद नहीं कर सकता।
हां, अगर किसी ने अपने स्कूटर में बाजार से कोई सस्ती चीनी लिथियम बैटरी अलग से लगवाई है और उसका ब्लूटूथ खुला है, तो उसमें यह खतरा हो सकता है।
इस खुराफात से कैसे बचें?
अगर आप ई-रिक्शा या सस्ता ई-स्कूटर चलाते हैं, तो यह जरूर चेक कर लें कि आपकी बैटरी का ब्लूटूथ ‘बिना पासवर्ड’ के खुला तो नहीं है। अगर उसमें पिन या पासवर्ड सेट करने का ऑप्शन है, तो उसे तुरंत सेट कर लें। एक बार पासवर्ड लग गया, तो कोई भी ऐप बिना पिन के आपकी बैटरी से कनेक्ट नहीं हो पाएगा।












