गुजरात के मोरबी जिले के जेटपार गांव में अडानी समूह की बिजली ट्रांसमिशन परियोजना के खिलाफ किसानों का अनिश्चितकालीन आमरण अनशन लगातार जारी है। राज्य की भूपेंद्र पटेल सरकार द्वारा मुआवजे की राशि में संशोधन कर उसे बढ़ाने की घोषणा के बावजूद प्रदर्शनकारी किसान अपनी मांगों से पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। आंदोलनकारी किसानों का स्पष्ट कहना है कि उन्हें केवल मौखिक आश्वासन नहीं बल्कि सरकार का लिखित प्रस्ताव चाहिए और वे अपनी जमीनों के बदले बाजार मूल्य का चार गुना मुआवजा देने की मांग पर अड़े हैं।
अडानी एनर्जी सॉल्यूशंस लिमिटेड के प्रोजेक्ट से प्रभावित हो रहे सैकड़ों किसान
अडानी एनर्जी सॉल्यूशंस लिमिटेड (एईएसएल) मोरबी जिले की कृषि भूमि पर हाई-टेंशन बिजली लाइनें और टावर लगाने का काम कर रही है। इस परियोजना के चलते मोरबी जिले की कम से कम छह तहसीलों के सैकड़ों किसान सीधे तौर पर प्रभावित होंगे। इसके साथ ही यह परियोजना कच्छ, जामनगर, देवभूमि द्वारका, सुरेंद्रनगर, पाटन और बनासकांठा जिलों के किसानों को भी प्रभावित करने वाली है।
आंदोलन कर रहे किसानों का कहना है कि खेतों में हाई-टेंशन टावर और बिजली लाइनें लगने के कारण उनकी बहुमूल्य कृषि भूमि खेती के लायक नहीं बचेगी। इसलिए वे मार्गाधिकार (राइट ऑफ वे) देने के बदले बाजार भाव का चार गुना मुआवजा चाहते हैं। इससे पहले सरकार ने किसानों को केवल सरकारी ‘जंत्री दर’ (सर्किल रेट) का दोगुना मुआवजा देने का प्रस्ताव दिया था, जो वास्तविक बाजार मूल्य से काफी कम था।
सरकार ने की संशोधित नीति की घोषणा
किसानों के लगातार विरोध प्रदर्शन और मोरबी के 11 किसानों के आमरण अनशन के बीच, शुक्रवार (3 जुलाई) को राज्य सरकार के मंत्रियों ने प्रेस वार्ता कर एक संशोधित नीति की घोषणा की थी। कृषि मंत्री जीतू वाघाणी, ऊर्जा मंत्री कनुभाई देसाई और ऊर्जा राज्य मंत्री मुकेश पटेल ने घोषणा की कि अब किसानों को जंत्री दर के बजाय बाजार मूल्य का दोगुना मुआवजा दिया जाएगा। मंत्रियों ने इसे ‘निष्पक्ष, पारदर्शी और बाजार आधारित’ नीति बताया।
इस नई नीति के तहत सरकार ने मुआवजे की गणना का तरीका भी बदला है, जिसमें टावर के आधार (फुटप्रिंट) के दोनों तरफ एक अतिरिक्त मीटर का क्षेत्र जोड़ा गया है। इसके अलावा मुआवजे की राशि किश्तों के बजाय एकमुश्त देने का भी वादा किया गया है। भूमि का बाजार मूल्य तय करने के लिए जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में एक समिति बनाने की भी घोषणा की गई है, जिसमें प्रभावित जमीन मालिकों के प्रतिनिधि, किसानों के मूल्यांकनकर्ता और कंपनी का एक प्रतिनिधि शामिल होगा।
किसानों का कहना- लिखित आदेश और चार गुना मुआवजा चाहिए
सरकार की इस घोषणा के बावजूद किसानों ने अपना अनशन खत्म करने से इनकार कर दिया। अनशन पर बैठे किसान नेता राकेश अमृतिया ने स्पष्ट किया कि उन्हें सरकार का लिखित आदेश चाहिए और संशोधित मुआवजे में और बढ़ोतरी की जानी चाहिए। किसानों का कहना है कि अडानी समूह की कंपनी बिना किसी सलाह-मशविरे के उनकी जमीनों में जबरन घुस आई है और उचित मुआवजा नहीं दे रही है।
सुरेंद्रनगर जिले के कोंध गांव के किसान अजीत चौहान ने पुलिस की मौजूदगी में कराए जा रहे काम पर नाराजगी जाहिर करते हुए इसे तानाशाही बताया। उन्होंने कहा कि उन्हें अब तक मुआवजे के रूप में एक पैसा भी नहीं मिला है और जब भी वे मजदूरों के खेत में घुसने पर आपत्ति जताते हैं, तो पुलिस उन्हें परेशान करती है।
अडानी समूह की कंपनी ने दी अपनी सफाई
दूसरी ओर, अडानी एनर्जी सॉल्यूशंस लिमिटेड (एईएसएल) ने पूर्व में जारी एक बयान में इन आरोपों को खारिज किया है। कंपनी का कहना है कि वे जमीन मालिकों के साथ बातचीत करने और कानून के तहत नागरिक प्रशासन द्वारा निर्धारित उचित मुआवजा देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। कंपनी ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ स्वार्थी तत्व भूमि मालिकों को भड़का रहे हैं।
कंपनी ने स्पष्ट किया कि कानूनी प्रक्रिया के तहत उन्हें जिला प्रशासन से आवश्यक निर्देश प्राप्त हुए हैं। सभी पक्षों के साथ कई दौर की सुनवाई के बाद प्रशासन ने मुआवजा निर्धारित किया और जरूरत पड़ने पर पुलिस सुरक्षा के साथ एईएसएल को काम जारी रखने की अनुमति दी है।
FAQ:
Q1: गुजरात के किसान अडानी एनर्जी सॉल्यूशंस लिमिटेड (AESL) के प्रोजेक्ट का विरोध क्यों कर रहे हैं?
A1: किसानों का कहना है कि खेतों में हाई-टेंशन बिजली लाइनें और टावर लगने के कारण उनकी कृषि भूमि खेती के लायक नहीं बचेगी। इसलिए वे मार्गाधिकार (राइट ऑफ वे) देने के बदले उचित मुआवजे की मांग कर रहे हैं।
Q2: गुजरात सरकार ने किसानों को मनाने के लिए मुआवजे की नीति में क्या बदलाव किए हैं?
A2: राज्य सरकार ने पूर्व में प्रस्तावित ‘जंत्री दर’ के दोगुने मुआवजे को बदलकर अब ‘बाजार मूल्य’ का दोगुना मुआवजा देने की घोषणा की है। साथ ही टावर के फुटप्रिंट के दोनों तरफ एक अतिरिक्त मीटर का क्षेत्र जोड़ने और मुआवजे की राशि एकमुश्त देने का प्रस्ताव रखा है।
Q3: किसान सरकार के नए मुआवजे के प्रस्ताव को क्यों स्वीकार नहीं कर रहे हैं?
A3: किसानों का कहना है कि उन्हें केवल मौखिक आश्वासन नहीं, बल्कि सरकार का लिखित प्रस्ताव/आदेश चाहिए। इसके अलावा वे अपनी जमीन के बदले बाजार मूल्य का दोगुना नहीं, बल्कि चार गुना मुआवजा देने की मांग पर अड़े हैं।












