दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार (7 जुलाई) को सोशल मीडिया कैम्पेन ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (सीजेपी) के एक्स (पूर्व में ट्विटर) अकाउंट को बहाल करने का आदेश दिया है। जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की एकल पीठ ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा जताई गई चिंता अब प्रासंगिक नहीं रह गई है, क्योंकि नीट-यूजी (NEET-UG) की पुनर्परीक्षा संपन्न हो चुकी है। यह अकाउंट पिछले मई में नीट परीक्षा के दौरान छात्रों और अभिभावकों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा होने की आशंका और कथित सुरक्षा कारणों से ब्लॉक कर दिया गया था।
नीट पुनर्परीक्षा खत्म होने के बाद हाईकोर्ट ने दी राहत
जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की एकल पीठ ने कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दिपके की याचिका को स्वीकार करते हुए एक्स अकाउंट बहाल करने का निर्देश दिया। सुनवाई के दौरान भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि केंद्र सरकार की मुख्य चिंता यह थी कि इस सोशल मीडिया अकाउंट के पोस्ट नीट (NEET-UG) परीक्षा के दौरान छात्रों और अभिभावकों के बीच भ्रम और अफरातफरी पैदा कर सकते थे। अब जबकि नीट-यूजी की पुनर्परीक्षा समाप्त हो चुकी है, अदालत ने माना कि यह चिंता अब प्रासंगिक नहीं रह गई है और अकाउंट को अनब्लॉक किया जाना चाहिए।
राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देकर ब्लॉक किया गया था एक्स अकाउंट
कॉकरोच जनता पार्टी का एक्स अकाउंट इसी साल 21 मई को सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) अधिनियम, 2000 की धारा 69(ए) के तहत ब्लॉक कर दिया गया था। यह कार्रवाई तब हुई जब इंस्टाग्राम पर सीजेपी के 88 लाख (8.8 मिलियन) फॉलोअर्स हो गए थे और उसने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के 87 लाख (8.7 मिलियन) फॉलोअर्स को पीछे छोड़ दिया था।
इंटेलेंस ब्यूरो (आईबी) द्वारा इसे ‘राष्ट्रीय सुरक्षा संबंधी चिंता’ बताने के बाद केंद्र सरकार ने एक्स (ट्विटर) को इस अकाउंट को ब्लॉक करने का निर्देश दिया था। आईटी अधिनियम की धारा 69(ए) सरकार को राष्ट्रीय सुरक्षा, सार्वजनिक व्यवस्था और संप्रभुता के आधार पर ऑनलाइन सामग्री को ब्लॉक करने का अधिकार देती है।
जंतर-मंतर पर सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल और प्रधानमंत्री को खुला पत्र
अकाउंट ब्लॉक होने के बावजूद कॉकरोच जनता पार्टी का आंदोलन जमीन पर लगातार जारी है। सीजेपी पिछले 18 दिनों से नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रही है। सीजेपी के प्रमुख सदस्यों में शामिल प्रसिद्ध जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक पिछले 10 दिनों से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं।
शनिवार (4 जुलाई) को सीजेपी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक खुला पत्र भी लिखा था, जिसमें उनकी चुप्पी पर सवाल खड़े किए गए थे। पत्र में कहा गया था कि प्रधानमंत्री की चुप्पी इस बात की मौन स्वीकृति है कि वे देश के युवाओं को ‘कीट-पतंगों’ (pests) से अधिक कुछ नहीं समझते, जिन्हें आसानी से नजरअंदाज़ किया जा सकता है। पत्र में आगे कहा गया कि वे परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक होने से रोकने में सरकार की विफलता के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं, जिससे करोड़ों युवाओं का भविष्य प्रभावित हुआ है।
सीजेआई की ‘कॉकरोच’ टिप्पणी से शुरू हुआ था अभियान
इस सोशल मीडिया कैंपेन की शुरुआत 15 मई को सुप्रीम कोर्ट के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) जस्टिस सूर्यकांत की एक टिप्पणी के बाद हुई थी। सीजेआई सूर्यकांत ने वरिष्ठ वकील का दर्जा दिए जाने से जुड़ी एक याचिका पर सुनवाई के दौरान कुछ बेरोजगार युवाओं को ‘कॉकरोच’ और ‘परजीवी’ बताया था जो व्यवस्था पर हमला करते हैं। उन्होंने कहा था कि जब इन्हें रोजगार नहीं मिलता, तो वे मीडिया, सोशल मीडिया या आरटीआई कार्यकर्ता बन जाते हैं और हर किसी पर हमला शुरू कर देते हैं।
इस टिप्पणी की चौतरफा आलोचना होने के बाद, सीजेआई ने 16 मई को सफाई जारी करते हुए कहा था कि मीडिया के एक वर्ग ने उनकी बातों को गलत तरीके से पेश किया था। इसी टिप्पणी के विरोध में देश के युवाओं ने ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ नाम से सोशल मीडिया कैंपेन शुरू किया था।
FAQ:
Q1: दिल्ली हाईकोर्ट ने कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) का एक्स अकाउंट बहाल करने का आदेश क्यों दिया?
A1: अदालत ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा नीट परीक्षा के दौरान भ्रम और अफरातफरी फैलने की जो चिंता जताई गई थी, वह अब प्रासंगिक नहीं रह गई है क्योंकि नीट-यूजी की पुनर्परीक्षा समाप्त हो चुकी है।
Q2: कॉकरोच जनता पार्टी का एक्स अकाउंट पहले किस आधार पर ब्लॉक किया गया था?
A2: यह अकाउंट 21 मई को सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) अधिनियम, 2000 की धारा 69(ए) के तहत ब्लॉक किया गया था। इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) द्वारा राष्ट्रीय सुरक्षा संबंधी चिंताओं का हवाला दिए जाने के बाद केंद्र सरकार ने इसे ब्लॉक करने का निर्देश दिया था।
Q3: ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ अभियान की शुरुआत किस घटना के बाद हुई थी?
A3: इस अभियान की शुरुआत 15 मई को सुप्रीम कोर्ट के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत की एक टिप्पणी के विरोध में हुई थी, जिसमें उन्होंने बेरोजगार युवाओं को ‘कॉकरोच’ और ‘परजीवी’ बताया था जो व्यवस्था पर सवाल उठाते हैं।












