US-Iran War: अंतरराष्ट्रीय राजनीति में कब हालात बिगड़ जाएं, इसका अंदाजा लगाना बहुत मुश्किल है। कुछ ही दिनों पहले दुनिया को लगा था कि अमेरिका (USA) और ईरान (Iran) के बीच शांति समझौता हो गया है, लेकिन अब हालात बिल्कुल उलट गए हैं। दोनों देशों के बीच युद्ध की आग एक बार फिर से भड़क उठी है और इस बार हमले बहुत सीधे और आमने-सामने हो रहे हैं।
आज गुरुवार (9 जुलाई) को दोनों देशों के बीच तनाव एक ऐसे मुकाम पर पहुंच गया है, जहां से पीछे लौटना मुश्किल लग रहा है। अमेरिका ने ईरान के एक बहुत ही अहम शहर को निशाना बनाया है, जिसके जवाब में ईरान ने भी अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले किए हैं। आइए, एक दोस्त की तरह बिल्कुल आसान भाषा में समझते हैं कि अचानक ये हमले क्यों शुरू हुए, ईरान के सर्वोच्च नेता के जनाजे से इसका क्या कनेक्शन है और इस जंग में अब तक अमेरिका को कितना भारी नुकसान हुआ है।
मशहद में क्या हुआ? (जनाजे से ठीक पहले उड़ाए गए दो पुल)
इस पूरी ताज़ा लड़ाई का केंद्र इस वक्त ईरान का ‘मशहद’ (Mashhad) शहर बना हुआ है। यह शहर ईरान के लिए कोई आम शहर नहीं है, बल्कि यह ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला सैयद अली खामेनेई का होमटाउन (गृह नगर) है।
आज (9 जुलाई को) अयातुल्ला खामेनेई का जनाजा इसी शहर में पहुंचना है और उन्हें यहीं दफनाया जाएगा। लेकिन इस जनाजे के पहुंचने से ठीक पहले, अमेरिका ने एक बड़ी एयरस्ट्राइक करते हुए मशहद शहर के दो अहम पुलों को उड़ा दिया है। ईरान के लिए यह एक बहुत बड़ा सैन्य और भावनात्मक झटका है।
ईरान की सरकार ने इस हमले के बाद खुलकर कहा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जानबूझकर इस तरह के हमले करवा रहे हैं, ताकि खामेनेई के जनाजे की प्रक्रिया में बाधा डाली जा सके और लोगों को डराया जा सके।
‘हम ट्रंप को मार देंगे…’: ईरान की सड़कों पर भारी गुस्सा
अपने सर्वोच्च नेता के शहर पर हुए इस हमले के बाद ईरान की आम जनता में अमेरिका और खासकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ भारी गुस्सा है।
जमीनी हालात ऐसे हैं कि मशहद शहर के एक बड़े होटल के बाहर एक बहुत बड़ा बैनर लगा दिया गया है। इस बैनर पर अंग्रेजी में साफ-साफ लिखा है— ‘We will kill Trump’ (हम ट्रंप को मार देंगे)। यह एक बैनर दिखाता है कि ईरान के लोगों के अंदर अमेरिका के प्रति नफरत किस हद तक भर चुकी है। वहां के नागरिक अब सीधे तौर पर बदले की मांग कर रहे हैं।
ईरान का पलटवार और अमेरिका की कड़ी चेतावनी
ईरान ने सिर्फ बैनर लगाकर अपना गुस्सा जाहिर नहीं किया है, बल्कि उसने सैन्य स्तर पर भी अमेरिका को जवाब देना शुरू कर दिया है।
ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने अमेरिका के नौसेना मुख्यालय (Naval Headquarters) के पास हमला कर दिया है। इसके अलावा भी कई अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया गया है।
इस जवाबी कार्रवाई के बाद अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस (JD Vance) सामने आए और उन्होंने एक बहुत ही कड़ा बयान दिया। वेंस ने ईरान पर आरोप लगाया है कि उसने कमर्शियल (व्यापारिक) जहाजों पर दोबारा हमले शुरू कर दिए हैं, जो कि दोनों देशों के बीच हुए हालिया शांति समझौते का खुला उल्लंघन है।
क्या है ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’ का विवाद?
उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने अपने बयान में एक खास जगह का जिक्र किया है— ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’ (Strait of Hormuz)। यह समुद्र का वह पतला सा रास्ता है जहां से दुनिया भर के तेल के जहाज गुजरते हैं।
वेंस ने ईरान को सीधी चेतावनी दी है कि अगर ईरान ने इस रास्ते पर किसी भी व्यापारिक जहाज को रोकने या नुकसान पहुंचाने की कोशिश की, तो अमेरिका इसका बहुत ही करारा और सख्त जवाब देगा। अमेरिका का साफ कहना है कि वह इस समुद्री रास्ते पर किसी भी तरह की रुकावट बर्दाश्त नहीं करेगा।
अमेरिका को कितना नुकसान हुआ? (आंकड़ों में समझें)
जब दो बड़े देश लड़ते हैं, तो नुकसान दोनों तरफ होता है। भले ही अमेरिका दुनिया का सबसे ताकतवर देश हो, लेकिन इस युद्ध में उसे भी भारी आर्थिक और सैन्य नुकसान उठाना पड़ रहा है।
अमेरिकी न्यूज़ चैनल ‘एबीसी न्यूज़’ (ABC News) की एक रिपोर्ट के हवाले से एक अमेरिकी अधिकारी ने बताया है कि जब से ईरान के साथ यह युद्ध शुरू हुआ है, तब से लेकर अब तक अमेरिकी वायुसेना के 30 ‘MQ-9 रीपर ड्रोन’ (MQ-9 Reaper Drones) मार गिराए गए हैं।
आपको बता दें कि यह कोई साधारण ड्रोन नहीं है। एक MQ-9 रीपर ड्रोन की कीमत लगभग 3 करोड़ डॉलर (30 मिलियन डॉलर) होती है। अगर आप 30 ड्रोन्स का हिसाब लगाएं, तो आप समझ सकते हैं कि अमेरिका को इस युद्ध में कितने अरबों रुपयों का फटका लग चुका है।












