अल नीनो (El Niño) के प्रभाव के कारण मौसम में हो रहे अप्रत्याशित बदलावों से निपटने के लिए केंद्रीय विद्युत मंत्रालय जल्द ही बिजली क्षेत्र के सभी हितधारकों के लिए एक विस्तृत एडवाइजरी (दिशानिर्देश) जारी कर सकता है। मंत्रालय ने गुरुवार (9 जुलाई) को आयोजित एक समीक्षा बैठक में उन आपातकालीन कदमों पर चर्चा की, जो जलविद्युत (हाइड्रोपावर) और पवन ऊर्जा (विंड जेनरेशन) उत्पादन प्रभावित होने की स्थिति में उठाए जाने जरूरी हैं। इस एडवाइजरी का मुख्य उद्देश्य बिजली संकट को रोकना और कोयला आधारित ताप विद्युत गृहों (थर्मल पावर प्लांट) में ईंधन व पानी की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करना है।
पीएमओ के निर्देश के बाद विद्युत मंत्रालय की हाई-लेवल बैठक
गुरुवार को आयोजित इस उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय विद्युत सचिव ने की। इसमें केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) के अध्यक्ष, राज्य लोड डिस्पैच सेंटरों (SLDCs) के प्रतिनिधि, राज्य सरकारों के अधिकारी और ट्रांसमिशन क्षेत्र के हितधारक शामिल हुए।
यह बैठक ऐसे समय में बुलाई गई जब मंगलवार (7 जुलाई) को ही प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने विभिन्न क्षेत्रों पर अल नीनो के संभावित प्रभावों की समीक्षा की थी। पीएमओ ने अधिकारियों को निर्देश दिया था कि वे अल नीनो और कमजोर मानसून के प्रभाव की लगातार निगरानी करें तथा राज्य सरकारों के साथ मिलकर संवेदनशील जिलों का आकलन कर समय रहते सुधारात्मक कदम उठाएं। इसी पृष्ठभूमि में विद्युत मंत्रालय ने ग्रिड को किसी भी संकट से बचाने के लिए यह आपातकालीन ब्लूप्रिंट तैयार किया है।
थर्मल पावर प्लांटों में कोयला और पानी का स्टॉक दुरुस्त रखने पर जोर
मंत्रालयों की आगामी एडवाइजरी का मुख्य फोकस ताप विद्युत संयंत्रों (थर्मल प्लांट्स) के लिए पर्याप्त ईंधन और पानी की व्यवस्था सुनिश्चित करने पर होगा। बैठक में यह चिंता जताई गई कि यदि कमजोर मानसून के कारण बारिश कम होती है, तो जलविद्युत और पवन ऊर्जा उत्पादन में भारी गिरावट आ सकती है। ऐसी परिस्थिति में बिजली की कमी को पूरा करने के लिए ग्रिड को पूरी तरह से कोयला आधारित बिजली घरों (थर्मल जेनरेशन) पर निर्भर रहना पड़ेगा।
इसे ध्यान में रखते हुए थर्मल पावर स्टेशनों को कोयले का पर्याप्त स्टॉक बनाए रखने के निर्देश दिए जाएंगे। इसके साथ ही, बिजली घरों के संचालन के लिए पानी की कमी न हो, इसके लिए राज्य सरकारों से जलापूर्ति सुनिश्चित करने में सहयोग देने को कहा जाएगा। एडवाइजरी में थर्मल पावर स्टेशनों को समय से पहले ‘प्रिवेंटिव मेंटेनेंस’ (निवारक रखरखाव) करने की हिदायत दी जाएगी ताकि मांग के चरम स्तर (पीक डिमांड) के दौरान अचानक होने वाले पावर कट या तकनीकी खराबी (आउटेज) से बचा जा सके।
ट्रांसमिशन नेटवर्क की सुरक्षा और एग्रीकल्चर लोड को सोलर ऑवर्स में शिफ्ट करने की तैयारी
ग्रिड की सुरक्षा के लिए बिजली उत्पादन कंपनियों और ट्रांसमिशन उपयोगिताओं को उन क्रिटिकल ट्रांसमिशन लाइनों, ट्रांसफार्मरों और नेटवर्क एलिमेंट्स की पहचान करने के लिए कहा जाएगा, जिन पर भारी लोड या ओवरलोडिंग का खतरा सबसे अधिक है। ऐसा करने से समय रहते ग्रिड फेल्योर या तकनीकी फाल्ट से बचा जा सकेगा।
इसके साथ ही, विद्युत मंत्रालय राज्यों को इस बात के लिए प्रोत्साहित करेगा कि वे कृषि क्षेत्र (एग्रीकल्चर) की बिजली मांग को रात के बजाय दिन के समय यानी ‘सोलर ऑवर्स’ (धूप के घंटों) में शिफ्ट करें। कृषि लोड को दिन में शिफ्ट करने से देश में दिन के समय प्रचुर मात्रा में उपलब्ध होने वाली सौर ऊर्जा का बेहतर और अधिकतम उपयोग किया जा सकेगा, जिससे रात के समय कोयला आधारित बिजली ग्रिड पर दबाव काफी कम हो जाएगा।
FAQ:
Q1: अल नीनो (El Niño) के कारण देश के बिजली क्षेत्र के सामने क्या मुख्य खतरा पैदा हो गया है?
A1: अल नीनो के कारण मानसून कमजोर रहने या कम बारिश होने की आशंका है, जिससे देश में जलविद्युत (हाइड्रोपावर) और पवन ऊर्जा (विंड जेनरेशन) के उत्पादन में भारी गिरावट आ सकती है।
Q2: इस स्थिति से निपटने के लिए पीएमओ और विद्युत मंत्रालय ने क्या कदम उठाए हैं?
A2: पीएमओ ने स्थिति की लगातार निगरानी और संवेदनशील जिलों का आकलन करने के निर्देश दिए हैं। वहीं विद्युत मंत्रालय ने एक उच्च स्तरीय बैठक कर थर्मल प्लांटों में कोयले और पानी का स्टॉक सुनिश्चित करने व ग्रिड की सुरक्षा के लिए एडवाइजरी तैयार की है।
Q3: एडवाइजरी में राज्यों से कृषि क्षेत्र के बिजली उपयोग में क्या बदलाव करने की सिफारिश की जाएगी?
A3: राज्यों को प्रोत्साहित किया जाएगा कि वे कृषि क्षेत्र की बिजली मांग को रात के बजाय दिन के समय यानी ‘सोलर ऑवर्स’ में शिफ्ट करें, ताकि प्रचुर मात्रा में उपलब्ध सौर ऊर्जा का अधिकतम उपयोग किया जा सके और कोयला ग्रिड पर दबाव कम हो।











