महाराष्ट्र विधानसभा ने शुक्रवार (10 जुलाई) को नागपुर के ऐतिहासिक रामटेक मंदिर ट्रस्ट के पुनर्गठन से जुड़े एक विधेयक को मंजूरी दे दी है। इस विधेयक के तहत अब मंदिर ट्रस्ट के सदस्यों (ट्रस्टी) के लिए यह घोषणा करना कानूनी रूप से अनिवार्य होगा कि वे ‘रामटेक के श्री राम’ के भक्त हैं। अयोध्या के श्री राम जन्मभूमि ट्रस्ट द्वारा मंदिर के पहले मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) के लिए ‘राम के प्रति श्रद्धा का भाव’ अनिवार्य करने की खबरों के बीच, महाराष्ट्र की भाजपा नीत सरकार ने इस धार्मिक आस्था को वैधानिक रूप दे दिया है। इस प्रावधान पर विपक्षी दलों ने तीखी आपत्ति जताते हुए इसे असंवैधानिक करार दिया है।
ट्रस्टी बनने के लिए श्री राम का भक्त होने की घोषणा करना अनिवार्य
विधेयक के प्रावधानों के अनुसार, नागपुर जिले के रामटेक में भोसला देवस्थान (Bhosala Devasthan) राम मंदिर का संचालन करने वाली नई प्रबंधन समिति के किसी भी सदस्य के रूप में नियुक्त होने वाले व्यक्ति को निर्धारित प्रारूप में एक लिखित हलफनामा (घोषणा पत्र) देना होगा। इस घोषणा पत्र में स्पष्ट रूप से लिखना होगा कि वह व्यक्ति ‘रामटेक के श्री राम’ का भक्त है।
यह वैधानिक प्रावधान ऐसे समय में आया है जब अयोध्या के राम जन्मभूमि ट्रस्ट ने मंदिर के पहले मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) की नियुक्ति के लिए तीन सदस्यीय सर्च कमेटी बनाई है। इस कमेटी के सदस्य सुरेश हावरे ने हाल ही में स्पष्ट किया था कि सीईओ पद के लिए सबसे प्रमुख योग्यता ‘राम के प्रति श्रद्धा का भाव’ होना है। हालांकि, महाराष्ट्र सरकार ने अयोध्या ट्रस्ट की इस नीति से एक कदम आगे बढ़कर इसे रामटेक मंदिर के ट्रस्टियों के लिए एक वैधानिक यानी कानूनी रूप से अनिवार्य योग्यता बना दिया है।
विपक्ष ने उठाए गंभीर सवाल, प्रावधान को बताया असंवैधानिक
इस प्रावधान पर महाराष्ट्र विधानसभा में विपक्षी दलों ने कड़ी आपत्ति जताई। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के विधायक जयंत पाटिल ने इस बिल को असंवैधानिक बताते हुए सवाल किया, “कोई किसी विशेष क्षेत्र के भगवान राम का भक्त कैसे हो सकता है? क्या आप भगवान के भक्तों को भी क्षेत्रों में विभाजित कर रहे हैं?”
शिवसेना (यूबीटी) के विधायक वरुण सरदेसाई ने इस हलफनामे के सत्यापन (वेरिफिकेशन) पर सवाल उठाते हुए पूछा कि सरकार के पास इस बात की जांच करने का क्या तंत्र है कि किसी व्यक्ति द्वारा दिया गया शपथ पत्र वास्तविक है या नकली? वहीं, कांग्रेस विधायक दल के नेता विजय वडेट्टीवार ने अयोध्या मंदिर ट्रस्ट से जुड़े विवादों का संदर्भ देते हुए कहा, “अयोध्या में कथित तौर पर करोड़ों रुपये की चोरी की खबरें आ रही हैं। अब महाराष्ट्र में राम मंदिर के ट्रस्टों पर राजनीतिक नेताओं को बैठाया जा रहा है। इन नेताओं को शामिल करने की क्या जरूरत है और भगवान राम की सेवा के लिए ट्रस्टियों को प्रबंधन कोष से मानदेय व भत्ते क्यों दिए जाने चाहिए?”
इसके साथ ही, राकांपा (सपा) के विधायक जितेंद्र आव्हाड ने हितों के टकराव (कॉन्फ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट) का मुद्दा उठाया। उन्होंने पूछा कि राज्य मंत्री आशीष जायसवाल खुद इस विधेयक को पेश कर रहे हैं, जिसके कानून बनने के बाद वे (स्थानीय विधायक होने के नाते) स्वतः ही इस ट्रस्ट के पदेन सदस्य बन जाएंगे।
रामटेक मंदिर का ऐतिहासिक महत्व और नई प्रबंधन समिति
नागपुर से लगभग 50 किलोमीटर दूर स्थित रामटेक महाराष्ट्र के सबसे प्रमुख और प्राचीन राम मंदिरों में से एक है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, भगवान राम अपने 14 वर्षों के वनवास के दौरान इस स्थान पर रुके थे, जिससे इसका धार्मिक महत्व अत्यंत बढ़ जाता है। हर साल रामनवमी और कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर यहाँ लाखों की संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं।
अदालती आदेशों के कारण वर्तमान में इस प्राचीन मंदिर का प्रबंधन उप-विभागीय अधिकारी (एसडीओ) द्वारा संभाला जा रहा है। नया कानून बनने के बाद इस मंदिर का संचालन सरकार द्वारा नियुक्त पदाधिकारियों की एक समिति करेगी। इसमें स्थानीय विधायक और रामटेक नगर परिषद के अध्यक्ष पदेन सदस्य होंगे। समिति के सदस्यों को प्रबंधन कोष से मानदेय, यात्रा भत्ता और दैनिक भत्ता पाने का अधिकार होगा।
विधेयक को पेश करने वाले रामटेक विधानसभा क्षेत्र के राज्य मंत्री आशीष जायसवाल ने सरकार के फैसले का बचाव करते हुए कहा कि मंदिर की बढ़ती गतिविधियों, वित्तीय लेनदेन और भारी संपत्तियों के पारदर्शी व कुशल संचालन को सुनिश्चित करने के लिए यह पुनर्गठन आवश्यक था।
OPTIONAL FAQ:
Q1: महाराष्ट्र सरकार ने रामटेक राम मंदिर के ट्रस्टियों की नियुक्ति के लिए क्या नई कानूनी शर्त रखी है?
A1: नए विधेयक के अनुसार, रामटेक मंदिर की प्रबंधन समिति में नियुक्त होने वाले प्रत्येक सदस्य को एक लिखित घोषणा पत्र (हलफनामा) देना होगा कि वह ‘रामटेक के श्री राम’ का भक्त है।
Q2: इस नए विधेयक पर विपक्षी दलों ने क्या मुख्य आपत्तियां दर्ज कराई हैं?
A2: विपक्ष ने इस प्रावधान को असंवैधानिक बताते हुए कहा कि भक्तों को क्षेत्रों में नहीं विभाजित किया जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने पूछा कि सरकार के पास इस हलफनामे की सत्यता जांचने का क्या तंत्र है और राजनेताओं को ट्रस्ट में रखकर मानदेय व भत्ते देने की क्या आवश्यकता है।
Q3: नागपुर के रामटेक राम मंदिर का क्या ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व है?
A3: रामटेक नागपुर से लगभग 50 किमी दूर स्थित महाराष्ट्र का अत्यंत प्रमुख मंदिर है। मान्यता है कि भगवान राम अपने 14 वर्षों के वनवास के दौरान इस स्थान पर रुके थे। यहाँ रामनवमी और कार्तिक पूर्णिमा पर लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं।












