MP Politics: मध्य प्रदेश की राजनीति में जब भी कोई चुनाव आता है, तो कुछ न कुछ बड़ा जरूर होता है। लेकिन इस बार दतिया विधानसभा उपचुनाव (Datia Bypoll) से पहले जो राजनीतिक ड्रामा देखने को मिल रहा है, उसने सबको हैरान कर दिया है।
भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने यहां से अपने कद्दावर नेता और पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटकर एक युवा चेहरे आशुतोष तिवारी को मैदान में उतारा है। पार्टी आलाकमान का यह फैसला दतिया के स्थानीय बीजेपी कार्यकर्ताओं को बिल्कुल रास नहीं आया है। हालात इतने बिगड़ गए कि कार्यकर्ताओं ने सड़क जाम कर दी, पुलिस से झड़प हुई और अब पार्टी के स्थानीय पदाधिकारियों ने थोक के भाव में इस्तीफे दे दिए हैं। आइए, एक दोस्त की तरह बिल्कुल आसान भाषा में समझते हैं कि दतिया में आखिर क्या चल रहा है और इस बगावत के पीछे की असली कहानी क्या है।
आखिर क्या है पूरा विवाद? (टिकट कटने का दर्द)
दतिया सीट नरोत्तम मिश्रा का गढ़ मानी जाती है। उपचुनाव की घोषणा के बाद सबको उम्मीद थी कि ‘दादा’ (नरोत्तम मिश्रा) को ही टिकट मिलेगा। लेकिन बीजेपी ने इस बार बदलाव करते हुए युवा नेता आशुतोष तिवारी को प्रत्याशी बना दिया।
जैसे ही यह खबर दतिया पहुंची, नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों का गुस्सा फूट पड़ा। उनका सीधा कहना है कि जिस आशुतोष तिवारी को वे ठीक से जानते तक नहीं, उसके लिए वे चुनाव प्रचार क्यों करें? कार्यकर्ताओं ने खुलकर आशुतोष का बहिष्कार कर दिया है और उनका आरोप है कि यह सब सूबे के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के इशारे पर हो रहा है।
आधी रात को कैसे बिगड़े हालात? (सड़क पर बवाल और पुलिस एक्शन)
टिकट कटने के विरोध में बीजेपी कार्यकर्ताओं ने देर रात दतिया नेशनल हाईवे पर चक्काजाम कर दिया। यह कोई छोटा-मोटा जाम नहीं था, बल्कि करीब 11 घंटे तक हाईवे बंद रहा और 20 किलोमीटर लंबी लाइनों में गाड़ियां फंसी रहीं।
जब भीड़ बेकाबू होने लगी, तो पुलिस ने एक्शन लिया। कार्यकर्ताओं का आरोप है कि पुलिस ने उन पर बर्बरता से लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े।
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कार्यकर्ताओं का दावा: इस पुलिस कार्रवाई में 50 से ज्यादा बीजेपी कार्यकर्ता घायल हो गए हैं। महिला कार्यकर्ताओं का भी आरोप है कि पुलिस ने उनके साथ बदसलूकी की, उनकी गाड़ियां पलट दीं और बड़े अधिकारियों ने खुद उन्हें गालियां दीं। कार्यकर्ताओं का कहना है कि वे सुबह 5 बजे शांति से राम भजन कर रहे थे, तब भी उन्हें पीटा गया।
‘लाठीचार्ज नहीं हुआ, पत्थरबाजी हुई’: डीएम ने बताई अपनी तरफ की सच्चाई
हर कहानी के दो पहलू होते हैं। दतिया के जिलाधिकारी (DM) स्वप्निल वानखेड़े ने प्रशासन का पक्ष रखते हुए पुलिस की ज्यादती और लाठीचार्ज के सभी आरोपों को सिरे से नकार दिया है।
डीएम ने बताया कि हाईवे पर 11 घंटे से जाम लगा था, जिसमें महिलाओं और बच्चों से भरी बसें फंसी हुई थीं। आम जनता बहुत परेशान थी। पुलिस और प्रशासन की टीम ने सुबह 4 बजे तक प्रदर्शनकारियों को शांति से समझाने की कोशिश की। लेकिन, जवाब में भीड़ की तरफ से पुलिस पर पत्थरबाजी शुरू कर दी गई।
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प्रशासन का नुकसान: इस पत्थरबाजी में खुद डीएम, एसपी और करीब 8 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। हालात को कंट्रोल करने के लिए पुलिस को मजबूरी में आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े। डीएम ने साफ कहा कि हमारा काम सिर्फ शांतिपूर्ण तरीके से चुनाव कराना है, टिकट किसे मिलता है इससे प्रशासन का कोई लेना-देना नहीं है।
सामूहिक इस्तीफे से बीजेपी में हड़कंप: 291 बूथ अध्यक्षों ने छोड़ी कुर्सी
सड़क के बवाल के बाद राजनीति कागजों पर आ गई। नरोत्तम मिश्रा के टिकट कटने से नाराज होकर बीजेपी के जिलाध्यक्ष रघुवीर सिंह कुशवाहा ने पार्टी के राष्ट्रीय पदाधिकारियों (नितिन नवीन और हेमंत खंडेलवाल) को एक कड़ा पत्र लिखा है।
इस पत्र में उन्होंने पार्टी के फैसले को ‘एकतरफा’ और ‘कार्यकर्ताओं का अपमान’ बताया है। इसके साथ ही दतिया बीजेपी में सामूहिक इस्तीफों की झड़ी लग गई है।
जिन लोगों ने अपने पदों से इस्तीफा दिया है, उनकी लिस्ट काफी लंबी है:
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जिलाध्यक्ष रघुवीर सिंह समेत पूरी कार्यकारिणी
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जिला पंचायत अध्यक्ष और नगर पालिका अध्यक्ष
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दतिया विधानसभा के 6 मंडलों के अध्यक्ष
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और सबसे बड़ी बात— 291 बूथों के अध्यक्ष ने एक साथ अपना पद छोड़ दिया है।
24 घंटे का अल्टीमेटम:
जिलाध्यक्ष ने पार्टी हाईकमान को सीधी चेतावनी दी है कि अगर 24 घंटे के अंदर आशुतोष तिवारी को हटाकर नरोत्तम मिश्रा को टिकट नहीं दिया गया, तो वे सभी पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से भी इस्तीफा दे देंगे और चुनाव में खुलकर विरोध करेंगे।












